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ऊंट के मुंह में जीरा! पांच माह से भुगतान अधूरा, मिड-डे मील समूहों में आक्रोश


दीपावली सिर पर, समूहों के सामने किराना-सब्जी दुकानदारों और रसोइयों का बकाया चुकाने का संकट; 3 नवंबर तक पूरा भुगतान जमा करने की मांग



दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने वाले स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। करीब पांच माह से भुगतान पूरा नहीं मिलने के कारण मिड-डे मील योजना से जुड़े समूहों में शासन की भुगतान व्यवस्था को लेकर गहरी नाराजगी है। अक्टूबर माह में भी पूरा भुगतान करने के बजाय कुछ राशि ही खातों में जमा कराई गई, जिसे समूह संचालक ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं।

समूहों का कहना है कि एक ओर शासन बच्चों को नियमित पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने का निर्देश देता है, वहीं दूसरी ओर भोजन तैयार करने में लगने वाली सामग्री का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा। किराना दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं से उधारी लेकर व्यवस्था संचालित करना अब मुश्किल होता जा रहा है। लगातार बढ़ते बकाये के चलते समूहों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और योजना का संचालन भी प्रभावित होने की आशंका गहराने लगी है।

दीपावली पर भी आर्थिक संकट की मार

दीपावली का पर्व नजदीक है, लेकिन भुगतान अटका होने से समूह संचालकों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक तरफ किराना एवं सब्जी विक्रेताओं का पुराना बकाया चुकाना है, वहीं दूसरी तरफ मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को भी मेहनताना देना है। रसोइयों के लिए दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

समूह संचालकों ने मांग की है कि शासन 3 नवंबर तक लंबित भुगतान की पूरी राशि उनके खातों में जमा कराए, ताकि बैंक से राशि आहरित कर 8 नवंबर से पहले दुकानदारों और रसोइयों का भुगतान किया जा सके। उनका कहना है कि अधूरे भुगतान से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक पूरी बकाया राशि नहीं मिलेगी, तब तक आर्थिक संकट बना रहेगा।

बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी, लेकिन भुगतान की जवाबदेही कौन लेगा?

जनता ने भी शासन-प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सवाल यह है कि बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले समूह आखिर कब तक अपनी जेब और उधारी के भरोसे योजना चलाते रहेंगे? यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो इसका सीधा असर योजना के संचालन और उससे जुड़े रसोइयों की आजीविका पर पड़ सकता है।

समूहों और आम नागरिकों ने मांग की है कि दीपावली के मद्देनजर 3 नवंबर तक मध्यान्ह भोजन योजना की संपूर्ण लंबित राशि जारी की जाए, ताकि 8 नवंबर से पहले भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो सके।

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