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पानी टंकी की जमीन पर कब्जे की कोशिश! बाउंड्री तोड़कर खड़ी की जा रही दीवार, राजस्व अमला खामोश

पंचायत ने कलेक्टर की जनसुनवाई में लगाई गुहार, तहसील में शिकायत और नोटिस के बावजूद निर्माण जारी; आखिर सरकारी जमीन को अतिक्रमणकारियों से कौन बचाएगा?



दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला।

जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत बड़ी खैरी में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आरडी कॉलेज के ठीक सामने स्थित पानी की टंकी और सामुदायिक भवन की बाउंड्रीवाल तोड़कर सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने और पक्की दीवार खड़ी करने का आरोप सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि ग्राम पंचायत द्वारा नोटिस जारी करने और तहसील कार्यालय में शिकायत करने के बावजूद कथित अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग सकी।

मामले को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीण जिला योजना भवन स्थित कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी टंकी के नीचे स्थित पंचायत की सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमणकारी द्वारा बाउंड्रीवाल तोड़कर ईंट, सीमेंट और पत्थर जमा किए जा रहे हैं। मजदूर लगाकर निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

नोटिस दिया, शिकायत की, प्रस्ताव भी पारित... फिर कार्रवाई कहां?

ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत ने पहले भी संबंधित व्यक्ति को अतिक्रमण के संबंध में नोटिस जारी किया था। तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत देकर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग भी की गई। पंचायत की बैठक में इस मामले को लेकर प्रस्ताव तक पारित किया गया, लेकिन इसके बावजूद मौके पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

सवाल यह है कि जब पंचायत स्वयं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत कर रही है, तब राजस्व विभाग ने अब तक सीमांकन और स्थल निरीक्षण क्यों नहीं कराया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को निर्माण कार्य की जानकारी नहीं है या फिर शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा, प्रशासन की चुप्पी क्यों?

पानी की टंकी और सामुदायिक भवन जैसी सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप सामान्य मामला नहीं है। यदि भूमि वास्तव में शासकीय अथवा पंचायत के स्वामित्व की है, तो उसकी सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद शिकायतों के बाद भी निर्माण जारी रहने के आरोप प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

पंचायत की तीन प्रमुख मांगें

राजस्व विभाग तत्काल भूमि का विधिवत सीमांकन कराए।

अतिक्रमण के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

अतिक्रमण प्रमाणित होने पर अवैध निर्माण हटाकर शासकीय भूमि मुक्त कराई जाए।

अब बड़ा सवाल: क्या कलेक्टर इस मामले में राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे या बड़ी खैरी की यह सार्वजनिक भूमि भी धीरे-धीरे अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाएगी? ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्थानीय लोगो का मुख्य सवाल: जब ग्राम पंचायत शिकायत कर चुकी है, नोटिस जारी हो चुका है और कलेक्टर तक मामला पहुंच गया है, तो फिर मौके पर निर्माण रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? इससे यह प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन पर भू माफ़िया हावी नज़र आ रहें हैं ।

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