मंडला में स्कूलों और छात्रावासों की छतों पर टीन शेड लगाने पर सवाल, टीएसपी फंड के खर्च की जांच की मांग
मंडला। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों और स्कूल भवनों की छतों पर मरम्मत के नाम पर टीन शेड लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन कार्यों की उपयोगिता, तकनीकी स्वीकृति, गुणवत्ता और खर्च की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिला शिक्षा समिति के अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने अनियमितताओं की आशंका जताई है। ट्राइबल सब प्लान (टीएसपी) फंड से हो रहे खर्च की जांच की मांग भी उठाई गई है।

करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में विभाग के सैकड़ों छात्रावासों और स्कूल भवनों में ये कार्य किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन पर टीएसपी फंड से करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कार्यों की स्वीकृति से पहले भवनों की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया गया और अपनाई जा रही तकनीक को किस स्तर पर मंजूरी मिली। यह भी सवाल है कि क्या इतने खर्च में दूसरी छत बनाई जा सकती थी।
अधीक्षकों को जानकारी और निगरानी पर सवाल
आरोप है कि छात्रावास अधीक्षकों को जानकारी दिए बिना ही भवनों पर टीन शेड लगाए जा रहे हैं। ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से निर्माण कराने, अधिकारियों-कर्मचारियों की निगरानी नहीं होने और कार्य का सूचना पटल नहीं लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कार्य की गुणवत्ता और स्वीकृति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
टीन शेड लगाने का तकनीकी आधार क्या है?
छात्रावासों और स्कूल भवनों की मरम्मत का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में सवाल है कि छतों पर टीन शेड लगाने का विकल्प किन परिस्थितियों में चुना गया। क्या इसका उद्देश्य पानी का रिसाव रोकना है, गर्मी से बचाव करना है या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण है?
स्थानीय स्तर पर कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, विभागीय प्रक्रिया और खर्च के औचित्य को लेकर चर्चा हो रही है। उठाए गए सवालों के बीच टीएसपी फंड से किए जा रहे खर्च और निर्माण कार्यों की जांच की मांग की गई है।