अटैचमेंट के नाम पर चल रहा खेल? CMHO के दो आदेशों के पालन पर उठे गंभीर सवाल
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। जिले के स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मचारियों के अटैचमेंट एवं संलग्नीकरण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), मंडला द्वारा 19 अक्टूबर 2026 को जारी दो अलग-अलग आदेशों के पालन की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इन आदेशों में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में संलग्न किए गए 9 चिकित्सकों तथा नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम और एलएचवी सहित 29 कर्मचारियों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें उनकी मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन आदेश जारी होने के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों ने वास्तविक रूप से अपनी मूल पदस्थापना पर कार्यभार संभाला है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि कुछ कर्मचारियों की जॉइनिंग कागजों में दर्शाई गई है, जबकि उनकी वास्तविक कार्यस्थिति की पुष्टि होना बाकी है।
आदेश जारी होने की तारीख : 19 अक्टूबर 2026
दो अलग-अलग आदेशों से समाप्त किए गए अटैचमेंट
प्राप्त जानकारी के अनुसार CMHO कार्यालय मंडला द्वारा जारी पहला आदेश क्रमांक 1691/5423 नौ चिकित्सकों की मूल पदस्थापना से संबंधित बताया गया है। वहीं दूसरा आदेश क्रमांक संस्था/नर्सिंग/2026/1689 नर्सिंग कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर उनकी मूल पदस्थापना पर वापसी से संबंधित है।
इन आदेशों का उद्देश्य संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य विभाग के मानव संसाधन का उचित उपयोग करना बताया जा रहा है।
हालांकि आदेश जारी होने के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों की कार्यभार ग्रहण रिपोर्ट प्राप्त हुई या नहीं और वर्तमान में वे किन संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
नौ चिकित्सकों को मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश
चिकित्सकों के संबंध में जारी आदेश के अनुसार निम्नलिखित डॉक्टरों को संबंधित मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है।
| चिकित्सक का नाम | मूल पदस्थापना |
|---|---|
| डॉ. दिलीप अहिरवार | मवई |
| डॉ. अनूप भारतीय | मनेरी, निवास |
| डॉ. जितेन्द्र परते | निवास |
| डॉ. सुमित सिंगौर | घुघरी |
| डॉ. सौम्या चौबे | बकौरी, बम्हनी |
| डॉ. वैभव पटेल | अंजनी, मवई |
| डॉ. लोकराम गर्गे | मोहिनिया, पटपरा, बम्हनी |
| डॉ. नीरज राज | चिरईडोंगरी |
| डॉ. रिचा बाजपेयी | सिविल अस्पताल, नैनपुर |
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आदेश के बाद इन सभी चिकित्सकों ने अपने निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं। संबंधित संस्थानों में उनकी वर्तमान उपस्थिति और सेवाओं की स्थिति की पुष्टि विभागीय अभिलेखों से होनी चाहिए।
29 नर्सिंग कर्मचारियों और एएनएम की तैनाती भी जांच के दायरे में
चिकित्सकों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की पदस्थापना को लेकर भी विभागीय आदेश चर्चा में है। आदेश क्रमांक संस्था/नर्सिंग/2026/1689 के अंतर्गत नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम और एलएचवी सहित 29 कर्मचारियों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है।
ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मरीजों की देखभाल, दवा वितरण, प्रसव संबंधी सेवाओं और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य गतिविधियों के संचालन में इन कर्मचारियों की नियमित उपलब्धता जरूरी है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित 29 कर्मचारियों को किन स्वास्थ्य केंद्रों में वापस भेजा गया और वर्तमान में उनकी वास्तविक सेवाएं कहां उपलब्ध हैं।
कागजों में जॉइनिंग और जमीन पर तैनाती में अंतर होने के आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल आदेशों के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ कर्मचारियों की कार्यभार ग्रहण रिपोर्ट दस्तावेजों में दर्ज होने के बावजूद उनके वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी कर्मचारी के संबंध में अनियमितता का निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित कार्यभार ग्रहण रिपोर्ट, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रोस्टर और सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आदेशों का सत्यापन आवश्यक है।
यदि जांच में सामने आता है कि किसी कर्मचारी की जॉइनिंग केवल दस्तावेजों में दर्ज है और वह बिना वैध आदेश के निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हो रहा, तो संबंधित नियमों के अनुसार जवाबदेही तय करने की आवश्यकता होगी।
मूल आदेश : अटैचमेंट समाप्त करने वाले दोनों आदेशों की प्रमाणित प्रतियां।
रिलीविंग रिपोर्ट : कर्मचारियों को पूर्व कार्यस्थल से कार्यमुक्त किए जाने का विवरण।
जॉइनिंग रिपोर्ट : मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने की तारीख।
उपस्थिति रिकॉर्ड : उपस्थिति रजिस्टर और उपलब्ध डिजिटल हाजिरी।
ड्यूटी रोस्टर : वर्तमान में किस संस्थान में सेवाएं दी जा रही हैं।
अगले आदेश : यदि किसी कर्मचारी की तैनाती बदली गई है तो संबंधित सक्षम अधिकारी का वैध आदेश।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी से मरीजों को हो सकती है परेशानी
मंडला जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सीधे तौर पर चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मचारियों की नियमित तैनाती से जुड़ी है।
मवई, बम्हनी, बिछिया, मोहगांव और नारायणगंज सहित अन्य क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होना आवश्यक है, ताकि मरीजों को सामान्य उपचार के लिए दूरस्थ अस्पतालों तक न जाना पड़े।
यदि किसी स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक चिकित्सक और नर्सिंग कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो मरीजों को उपचार में देरी, अतिरिक्त परिवहन खर्च और आपातकालीन परिस्थितियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होना जरूरी है।
आखिर आदेशों के पालन की निगरानी कौन कर रहा है?
जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें उनकी मूल पदस्थापना पर वापस भेजने के आदेश जारी किए गए हैं, तो इन आदेशों के पालन की निगरानी भी संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
सवाल यह है कि आदेश जारी होने के बाद कितने कर्मचारियों ने निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण किया? कितनों की जॉइनिंग रिपोर्ट प्राप्त हुई? संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में उनकी नियमित उपस्थिति का सत्यापन किस अधिकारी द्वारा किया गया?
इन प्रश्नों का उत्तर विभागीय रिकॉर्ड और वास्तविक कार्यस्थल के परीक्षण से स्पष्ट हो सकता है। इससे अनियमितता के आरोपों की वास्तविकता सामने आने के साथ नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट होगी।
कलेक्टर से दोनों आदेशों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर मंडला और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से 19 अक्टूबर 2026 को जारी दोनों आदेशों की अनुपालन स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि संबंधित 9 चिकित्सकों और 29 नर्सिंग कर्मचारियों की मूल पदस्थापना, कार्यभार ग्रहण रिपोर्ट और वास्तविक उपस्थिति का मिलान कराया जाना चाहिए।
साथ ही जिन ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की आवश्यकता है, वहां आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी कर्मचारी या जिम्मेदार अधिकारी द्वारा आदेशों का उल्लंघन अथवा अभिलेखों में गलत जानकारी दर्ज करने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
CMHO कार्यालय की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना शेष
फिलहाल दोनों आदेशों के वास्तविक पालन, सभी संबंधित कर्मचारियों की वर्तमान तैनाती और कथित कागजी जॉइनिंग के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने आना शेष है।
CMHO कार्यालय और जिला प्रशासन द्वारा आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की वास्तविक उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही का आकलन भी किया जा सकेगा।
मंडला में स्वास्थ्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त करने संबंधी दो आदेशों ने प्रशासनिक निगरानी और जमीनी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। आदेश जारी करना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन उसका वास्तविक पालन सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है।
यदि सभी 38 संबंधित कर्मचारियों की मूल पदस्थापना और वर्तमान उपस्थिति का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाता है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिल सकती है।
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