Breaking

revanchal times new

नारायणगंज के स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, जेसीबी-ट्रैक्टर और कबाड़ के बीच पढ़ रहे नौनिहाल

 शिक्षा के मंदिर में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़!

सरस्वती ज्ञान मंदिर नारायणगंज में जेसीबी-ट्रैक्टर के बीच पढ़ रहे नौनिहाल, कीचड़ में तब्दील खेल मैदान और चारों तरफ कबाड़—शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सवाल
 खबरें प्रकाशित होने के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार, आखिर किसके संरक्षण में चल रही है स्कूल की बदहाल व्यवस्था?
 दैनिक रेवाँचल टाईम्स | नारायणगंज/मंडला

बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन सरस्वती ज्ञान मंदिर नारायणगंज के आसपास की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विद्यालय के सामने खड़ी जेसीबी, ट्रैक्टर, ट्रॉली, पिकअप और कबाड़, चारों तरफ पसरी अव्यवस्था तथा बारिश में कीचड़ में तब्दील परिसर बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



जिस उम्र में बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ना, खेलना और आगे बढ़ना चाहिए, उसी उम्र में उन्हें अव्यवस्थित और जोखिम भरे वातावरण का सामना करना पड़ रहा है।

 स्कूल के सामने मशीनें, बच्चों के लिए मैदान कहां?

विद्यालय के सामने भारी वाहनों और मशीनों की मौजूदगी साफ नजर आ रही है। आसपास लोहे का कबाड़ और अन्य सामान पड़ा हुआ है। बारिश के चलते जमीन की स्थिति भी बदहाल दिखाई दे रही है।



❓ सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विद्यालय परिसर के आसपास इस तरह भारी मशीनों और कबाड़ का रखा होना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से उचित है?

अगर किसी बच्चे के साथ कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होगी या उन अधिकारियों की, जो शिकायतों के बावजूद निरीक्षण तक करने को तैयार नहीं हैं?

 बच्चों का खेल मैदान बना कीचड़ का मैदान!

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान होना उनके शारीरिक और मानसिक विकास का अहम हिस्सा है। लेकिन यहां बारिश के दौरान मैदान और आसपास का क्षेत्र कीचड़ में बदलता दिखाई दे रहा है।

 कागजों में शिक्षा, जमीन पर कीचड़!

क्या यही नौनिहालों के भविष्य की तस्वीर है?

बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की बातें खूब होती हैं, लेकिन शिक्षा के लिए जरूरी सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और खेलने की उचित व्यवस्था ही सवालों के घेरे में हो तो शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 बालकनी में बच्चों की मौजूदगी भी चिंता का विषय

विद्यालय भवन की बालकनी में बच्चों के असुरक्षित तरीके से मौजूद होने की तस्वीर भी सामने आई है। यह स्थिति किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को बढ़ाती है।

बच्चों की सुरक्षा कोई छोटी बात नहीं है कि हादसा होने के बाद फाइल खोलकर जांच बैठा दी जाए।

 पहले खबरें, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

विद्यालय की अव्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायतें और समाचार सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद यदि स्थिति जस की तस बनी हुई है तो सवाल सीधे शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से है।

❓ जवाब मांगते ये सवाल

🔸 क्या अधिकारियों ने कभी विद्यालय का मौके पर निरीक्षण किया?

🔸 क्या विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की जांच हुई?

🔸 क्या भवन, परिसर, खेल मैदान और शिक्षकों की योग्यता से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई?

🔸 अगर जांच हुई तो कार्रवाई क्या हुई?

इन सवालों का जवाब अभिभावक और क्षेत्र के लोग जानना चाहते हैं।

 शिक्षकों की योग्यता भी जांच के घेरे में

विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों की बीएड/डीएड योग्यता, नियुक्ति और पदस्थापना संबंधी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

महत्वपूर्ण: हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।

 हादसे का इंतजार कर रहा है शिक्षा विभाग?

मामला केवल एक निजी स्कूल की अव्यवस्था का नहीं है। मामला उन नौनिहालों का है, जिनके हाथों में देश का भविष्य है।

यदि किसी स्कूल में बच्चों के आसपास भारी मशीनें खड़ी हों, कबाड़ पड़ा हो, खेल मैदान बदहाल हो और सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में हो, तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करे।

❗ लेकिन सवाल यही है—
क्या शिक्षा विभाग तब जागेगा, जब कोई हादसा हो जाएगा?

 धारदार सवाल—बच्चों की फीस दिखती है, सुरक्षा क्यों नहीं?

अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए फीस देते हैं और उम्मीद करते हैं कि स्कूल उन्हें शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण भी देगा। ऐसे में यदि स्कूल की व्यवस्था चौपट है तो जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों पर पट्टी क्यों बंधी है?

मंडला के ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सरस्वती ज्ञान मंदिर नारायणगंज की यह तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगा रही है।

✅ अब जरूरत कागजी खानापूर्ति की नहीं

बल्कि मौके पर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की है।

 क्योंकि सवाल किसी एक स्कूल का नहीं—
सवाल मंडला के नौनिहालों के भविष्य और उनकी सुरक्षा का है।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग जांच की कलम उठाता है या फिर किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने का इंतजार करता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post