डिजिटल इंडिया के दौर में कीचड़ से जूझते नौनिहाल!
कागजों में विकास की रफ्तार तेज, जमीन पर स्कूल का रास्ता ही गायब — बारिश में दलदल बनी सड़क
घुघरी, मंडला। मंडला जिले के ग्रामीण अंचलों में विकास के दावों की हकीकत बारिश ने एक बार फिर उजागर कर दी है। ग्राम पंचायत घोरेघाट के प्राथमिक शाला धनौली के पास ऊपरटोला से सड़क टोला तक का मार्ग इन दिनों कीचड़ और पानी से लबालब है।
हालात ऐसे हैं कि स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को छाता लेकर इसी दलदल से होकर अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।
एक ओर हाथों में किताबें और पानी की बोतलें हैं, तो दूसरी ओर पैरों के नीचे कीचड़ और फिसलन। बारिश के बीच ये नौनिहाल किसी पक्की सड़क पर नहीं, बल्कि कीचड़ से भरे ऐसे रास्ते पर चलने को मजबूर हैं, जहां जरा सी चूक उन्हें चोटिल कर सकती है।
यह कैसी ‘विकास की नई तस्वीर’?
सरकार डिजिटल इंडिया, आधुनिक शिक्षा और गांव-गांव विकास की बात करती है। योजनाओं और विकास कार्यों के आंकड़े कागजों पर चमकते नजर आते हैं, लेकिन मंडला के ग्रामीण अंचलों में जमीनी हकीकत कई जगह कुछ और ही कहानी कहती है।
यहां सवाल सिर्फ सड़क का नहीं है। सवाल उन बच्चों का है जो हर बारिश में शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने के लिए कीचड़ की परीक्षा देते हैं।
स्कूल तक सड़क नहीं, बच्चों के सामने खतरा
बारिश के दौरान कीचड़ से भरे इस मार्ग पर फिसलन बढ़ गई है। बच्चे छाता संभालें या रास्ता—यह भी अपने आप में चुनौती है। ऐसे रास्ते पर बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों का आवागमन किसी जोखिम से कम नहीं।
❓ हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?
अगर किसी बच्चे का पैर फिसल गया, गंभीर चोट लग गई या कोई बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
जिम्मेदारों के विकास दावों पर बड़ा सवाल
ग्राम पंचायत से लेकर संबंधित विभाग और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने अब सवाल खड़ा है कि आखिर बारिश आने के बाद ही ग्रामीण सड़कों की बदहाली क्यों दिखाई देती है?
❓ क्या जिम्मेदारों को इस रास्ते की स्थिति की जानकारी नहीं है?
❓ क्या स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने के लिए बच्चों को पक्की सड़क मिलना भी विकास की प्राथमिकता नहीं है?
❓ और क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद ही जागेगा?
एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे और दूसरी तरफ स्कूल जाने वाले बच्चों के पैरों में चिपका कीचड़— यही मंडला के ग्रामीण अंचल में विकास की जमीनी तस्वीर है।
ग्रामीणों ने की तत्काल सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि मार्ग का तत्काल निरीक्षण कर बारिश के दौरान अस्थायी राहत और भविष्य के लिए स्थायी सड़क निर्माण की व्यवस्था की जाए, ताकि शिक्षा हासिल करने निकले इन नौनिहालों को हर रोज कीचड़ और खतरे से होकर स्कूल न जाना पड़े।
डिजिटल इंडिया की बात करने वाले जिम्मेदारों के लिए घोरेघाट की यह तस्वीर आईना है। सवाल सीधा है— जब स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं, तो आखिर किस बात का विकास?
