प्रशासन की नाक के नीचे कॉलोनाइजर का आतंक!
राजस्व RI की जांच में अवैध प्लॉटिंग की पुष्टि, फिर भी नगर परिषद निवास मौन
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं—आखिर किसके इशारे पर बचाया जा रहा कॉलोनाइजर?
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - निवास (मंडला)। नगर परिषद निवास के वार्ड क्रमांक-02 रासलगंज में कथित अवैध प्लॉटिंग का खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजस्व निरीक्षक (RI) की जांच रिपोर्ट में नियम विरुद्ध प्लॉटिंग की पुष्टि होने के बावजूद नगर परिषद और एस डी एम राजस्व प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। शिकायत हुई, राजस्व विभाग ने जांच की, मौके की स्थिति सामने आई, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों खामोश हैं?
वही स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे कॉलोनाइजर बेखौफ होकर प्लॉटिंग का खेल चला रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि जब जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो फिर कार्रवाई किस बात का इंतजार कर रही है?
जांच में अवैध प्लॉटिंग सामने आई, फिर भी कार्रवाई गायब
वार्ड क्रमांक-02 रासलगंज में बिना आवश्यक अनुमति और नियमों का पालन किए कॉलोनी विकसित किए जाने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा की गई थी। शिकायत के बाद राजस्व विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में नियमों के विपरीत प्लॉटिंग किए जाने की बात सामने आने के बावजूद नगर परिषद की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही जा रही है। न तो निर्माण गतिविधियों पर प्रभावी रोक नजर आ रही है और न ही संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नगर परिषद प्रशासन के लिए जांच रिपोर्ट भी महज कागज का टुकड़ा बनकर रह गई है?
कॉलोनाइजर बेखौफ, जिम्मेदार मौन—आखिर क्यों?
यदि क्षेत्र में वास्तव में बिना वैधानिक स्वीकृति के प्लॉट काटे जा रहे हैं, तो नगर परिषद और राजस्व विभाग के एस.डी.एम. तहसीलदार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि तत्काल जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करें। लेकिन शिकायत और जांच के बाद भी यदि स्थिति जस की तस है, तो यह प्रशासनिक निष्क्रियता का गंभीर मामला है।
वही स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई और नियमों के पालन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर निवास में कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर प्लॉटिंग का खेल चल रहा है।
सरकारी राजस्व को नुकसान का भी सवाल
अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत प्लॉटिंग के मामलों में शासन को मिलने वाले विभिन्न शुल्क और वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का सवाल भी उठता है। यदि बिना आवश्यक अनुमति के प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं, तो इसकी जांच होना जरूरी है कि शासन के राजस्व और खरीदारों के हितों पर कितना असर पड़ा है।
गरीब और आम खरीदार फंसे तो जिम्मेदार कौन होगा?
सबसे बड़ा खतरा उन आम लोगों पर मंडरा रहा है, जो अपनी जिंदगी की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदते हैं। यदि कॉलोनी वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए बिना विकसित की गई और भविष्य में सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का संकट खड़ा हुआ, तो इसका खामियाजा आम खरीदारों को भुगतना पड़ेगा।
ऐसे में सवाल है—यदि आज प्रशासन कार्रवाई नहीं करता और कल खरीदारों के साथ धोखा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
शिकायत के बाद भी राजस्व और नगर परिषद की चुप्पी, संरक्षण या लापरवाही?
वही स्थानीय नागरिकों ने अब नगर परिषद की भूमिका पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी दबाव में हैं? क्या कॉलोनाइजर को किसी का संरक्षण प्राप्त है? या फिर प्रशासनिक लापरवाही के चलते अवैध प्लॉटिंग को बढ़ावा मिल रहा है?
ये सवाल इसलिए गंभीर हैं क्योंकि मामला किसी अफवाह का नहीं, बल्कि शिकायत और राजस्व विभाग की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है।
राजस्व विभाग के अधिकारी नगर परिषद प्रशासन को चाहिए कि मामले की पूरी जांच सार्वजनिक करते हुए यह स्पष्ट करे कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई? यदि कार्रवाई नहीं की गई तो क्यों नहीं की गई? और यदि प्लॉटिंग अवैध पाई गई है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई कब होगी?
अब देखना यह है—कार्रवाई होगी या फाइलों में दब जाएगी रिपोर्ट?
रसलगंज के नागरिक अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहते हैं। सवाल सीधा है—जब जांच में गड़बड़ी सामने आ गई तो कार्रवाई क्यों नहीं? यदि नगर परिषद प्रशासन जल्द ही मामले में ठोस कदम नहीं उठाता, तो स्थानीय नागरिकों ने वरिष्ठ अधिकारियों सहित सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायत करने की बात कही है।
अब स्थानीय लोगों की निगाह नगर परिषद निवास पर है—क्या अवैध प्लॉटिंग पर चलेगा प्रशासन का डंडा, या फिर जांच रिपोर्ट फाइलों में दबाकर कॉलोनाइजरों को यूं ही खुला मैदान दे दिया जाएगा?

