दैनिक रेवांचल टाईम्स - भाद्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र और अर्धरात्रि का वह समय जब कारागार कि अंधकार को चीरकर भगवान कृष्ण का जन्म हुआ
व्रत का विधान
व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि से ही खान-पान के संयम के साथ हो जाती है अष्टमी तिथि को पूरे दिन व्रत रखकर मध्य रात्रि के बाद ही पारण किया जाता है।
राधा कृष्ण का प्रेम
कृष्ण के बिना राधा और राधा के बिना कृष्ण अधूरे माने जाते हैं यह अलौकिक प्रेम आत्मा का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है यशोदा मैया के आंगन में घुटनों के बल चलते हुए माखन चुराना गोपियों की मटकिया फोड़ना यह लीला हमें सिखाती है कि ईश्वर केवल भय या सिंहासन पर बैठने वाले भगवान नहीं बल्कि हमारे बहुत करीब हमारे सखा है
मध्य रात्रि का महा पूजन
रात के ठीक 12:00 बजे शंखनाद घंटियो की गड़गड़ाहट और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारो के साथ मंदिरों और घरों में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं चंदन अक्षत रोली फल फूल मेवा धूप दीप निवेद से पूजन कर आरती की जाती है
कान्हा को उनकी प्रिय वस्तु माखन मिश्री पंजीरी और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है
झूला झूलाने की परंपरा
भक्त अपने घरों और मंदिरों में सुंदर फूलों से सजे पालने में लड्डू गोपाल को झुलाकर अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करते हैं जन्माष्टमी का पर्व केवल एक व्रत या पूजा नहीं बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति का जीवंत सास्कृतिक समागम है।
आज भी जब श्री कृष्ण जन्माष्टमी आती है तो समय का पहिया जैसे पीछे घूम जाता है हर गली हर चौराहे और घर में कान्हा की स्वागत की तैयारी इस बात का प्रमाण है की कृष्ण केवल ऐतिहासिक चरित्र नहीं बल्कि भारत की सांस सांस में रचे बसे एक जीवंत एहसास है कंस के कारागार से लेकर गोकुल की गलियों और वृंदावन की कुंज गलियों तक कान्हा का पूरा बचपन एक उत्सव था कालिया नाग का मर्दन हो या गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाना हर प्रसंग में प्रगति और समाज की रक्षा का संदेश छिपा है जब कुरुक्षेत्र के मैदान में उन्होंने अर्जुन को मोहित देखकर गीता का अमर ज्ञान दिया तो वे संपूर्ण ब्रह्मांड के मार्गदर्शक बन गए
आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी तनाव और भौतिकतावादी युग में श्री कृष्ण के दर्शन और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य पथ पर अधिक रहने की प्रेरणा देता है
भारत में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया जाता है इस पावन अवसर पर यहां के गांव-गांव और शहरी मोहल्लों में दही हांडी फोड़ने के कार्यक्रमों का आयोजन होता है भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित बेहद आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और भजन कीर्तन होते हैं
वही इस बार जन्माष्टमी की खास बात यह है कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी रात में निशीत पूजा का समय रात में 11:57 से 12:41 तक रहेगा उसी दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है यही वजह है कि भक्तों के लिए यह पर्व धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है
