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मंडला में दर्दनाक हादसा: समय पर 108 एंबुलेंस नहीं मिली, जर्जर सड़क के बीच गर्भवती महिला और जुड़वा बच्चों की मौत

 


मंडला। जिले के बीजाडांडी विकासखंड के वनग्राम सलैया से बेहद दुखद मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही 28 वर्षीय गर्भवती महिला को समय पर 108 जननी एंबुलेंस सेवा नहीं मिल सकी। इसके बाद जर्जर और कीचड़ से भरे ग्रामीण मार्ग से निजी वाहन में अस्पताल ले जाने के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीजाडांडी पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला के गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की भी मौत हो चुकी थी।

108 एंबुलेंस नहीं मिली तो निजी वाहन से निकले

मृतका के पति प्रीतम नरेती के अनुसार मंगलवार शाम करीब 4 बजे उनकी पत्नी रुक्मणी नरेती को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को फोन कर मदद मांगी।

परिजनों का कहना है कि फोन पर ऑपरेटर ने वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही और निजी वाहन से मरीज को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने आनन-फानन में गांव से निजी वाहन की व्यवस्था की।

कीचड़ और गड्ढों भरे रास्ते ने बढ़ाई परेशानी

गांव से मुख्य मार्ग तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश के कारण बेहद खराब बताया जा रहा है। सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के चलते निजी वाहन को बेहद धीमी गति से आगे बढ़ना पड़ा।

परिजनों के अनुसार खराब सड़क और समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण महिला को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हुई।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

परिजन शाम करीब 5:10 बजे रुक्मणी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीजाडांडी लेकर पहुंचे। चिकित्सा जांच के बाद डॉक्टरों ने करीब 5:25 बजे महिला को मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अक्षय हरदाह के अनुसार जांच के दौरान महिला की नब्ज नहीं चल रही थी। गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों में भी दिल की धड़कन और सांस के कोई लक्षण नहीं मिले। चिकित्सकों के अनुसार दोनों गर्भस्थ शिशुओं की भी मौत हो चुकी थी।

सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी महिला

चिकित्सकों के मुताबिक रुक्मणी पहले से सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी और उसका स्वास्थ्य परीक्षण अस्पताल में नियमित रूप से किया जा रहा था।

ऐसे में गर्भावस्था के दौरान आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण था। घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय तहसीलदार, थाना प्रभारी और पुलिस बल अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया।

वहीं बीजाडांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा का आवंटन और संचालन राज्य मुख्यालय भोपाल स्तर से होता है, जबकि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र का इस सेवा के संचालन पर सीधा नियंत्रण नहीं है।

मर्ग कायम, एंबुलेंस नहीं मिलने के आरोपों की जांच

पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही परिजनों द्वारा लगाए गए समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है।

फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों तथा घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

एक साथ तीन जिंदगियों के जाने से गांव में मातम

रुक्मणी नरेती और उनके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना ने एक बार फिर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और खराब सड़कों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब जांच का विषय यह भी है कि आपात स्थिति में 108 सेवा क्यों उपलब्ध नहीं हो सकी और क्या खराब ग्रामीण मार्ग ने अस्पताल पहुंचने में देरी को बढ़ाया। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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