अतिरिक्त कमिश्नर के आदेश को ठेंगा? बिछिया में CMO का ‘बुलडोजर राज’!
स्वामित्व विवादित भूमि पर अचानक तोड़फोड़, सामान जब्त—न पंचनामा, न नोटिस, न कार्रवाई का स्पष्ट आधार
जिले के भुआ बिछिया में कानून और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि 25 अगस्त 2026 को नगर परिषद बिछिया के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) राजेश मार्को और संबंधित एआरआई ने बिना पूर्व सूचना, बिना स्पष्ट आदेश और बिना मौके पर जब्ती पंचनामा बनाए एक भूमि पर बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की।
जिस भूमि पर कार्रवाई की गई, वह खसरा नंबर 168/3 को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का हिस्सा बताई जा रही है। मनीष अग्रवाल द्वारा उक्त भूमि पर अपना स्वामित्व बताया गया है।
जब इसी भूमि को लेकर राजस्व न्यायालयों में प्रकरण चला, सीमांकन हुआ और मामला अतिरिक्त कमिश्नर, जबलपुर संभाग के न्यायालय तक पहुंचा, तो नगर परिषद ने किस अधिकार और किस आदेश के आधार पर अचानक तोड़फोड़ की?
कमिश्नर के आदेश के बाद भी नगर परिषद ने क्यों दिखाई ‘दबंगई’?
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार प्रकरण अतिरिक्त कमिश्नर, जबलपुर संभाग के समक्ष अपील क्रमांक 0028/अपील/2025-26 के रूप में विचाराधीन रहा।
आदेश में संबंधित भूमि, कब्जे और राजस्व प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर विचार किया गया है। दस्तावेज में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 250 सहित वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख भी है।
क्या नगर परिषद को वरिष्ठ राजस्व न्यायालय के आदेशों और राजस्व प्रक्रिया से ऊपर कोई अलग अधिकार प्राप्त है?
अगर कार्रवाई का वैध आदेश था तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
किस अधिकारी ने आदेश दिया? किस धारा के तहत कार्रवाई हुई?
किस आधार पर निर्माण को अवैध माना गया?
घर तोड़ा, सामान उठाया… लेकिन पंचनामा तक नहीं?
शिकायतकर्ता के अनुसार कार्रवाई के दौरान भूमि पर बने निर्माण को तोड़ा गया। वहां सुरक्षा के लिए लगाई गई टीन-बल्ली, खटिया, लोहे का सामान, बिजली के तार, मीटर, ग्रीन गेट सहित अन्य सामग्री नगर परिषद द्वारा उठाकर ले जाई गई।
आरोप है कि मौके पर जब्ती का विधिवत पंचनामा तक नहीं बनाया गया। न तो यह स्पष्ट किया गया कि कौन-सा सामान किस आधार पर जब्त किया जा रहा है और न ही कार्रवाई की लिखित वजह मौके पर बताई गई।
यदि कार्रवाई विधिसम्मत थी तो पंचनामा कहां है?
जब्ती सूची कहां है?
आदेश की प्रति कहां है?
राजस्व अमला मौके पर मौजूद, भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम का एक और चौंकाने वाला पहलू शिकायतकर्ता की ओर से सामने आया है। आरोप है कि कार्रवाई के समय राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी भी मौके पर मौजूद थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कार्रवाई किस आदेश पर की जा रही है पूछे जाने पर कथित तौर पर इस तरह का जवाब दिया गया। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
नगर परिषद ने विवादित भूमि पर ‘गीता भवन’ का बोर्ड कैसे लगा दिया?
आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद नगर परिषद द्वारा उक्त भूमि पर ‘गीता भवन हेतु आरक्षित’ होने का बोर्ड भी लगा दिया गया।
❓ यदि भूमि निजी स्वामित्व की है तो नगर परिषद ने उसे किस आदेश से आरक्षित घोषित किया?
❓ यदि भूमि नगर परिषद की है तो उसका रिकॉर्ड क्या है?
❓ यदि भूमि को लेकर विवाद चल रहा था तो अंतिम स्थिति स्पष्ट हुए बिना बोर्ड कैसे लगाया गया?
CMO से पूछा तो जवाब के बजाय ‘इधर-उधर की बातें’!
जब नगर परिषद CMO से कार्रवाई के आधार और आदेश के संबंध में सवाल किया गया तो शिकायत के अनुसार उन्होंने स्पष्ट आदेश अथवा वैधानिक आधार बताने के बजाय टालमटोल की।
वहीं कुछ पार्षदों द्वारा भी मौके पर कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है।
क्या किसी राजनीतिक संरक्षण में चल रहा नगर परिषद का ‘अपना कानून’?
बिछिया में नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
❓ क्या CMO को किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण का भरोसा है?
❓ क्या वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना इतनी बड़ी कार्रवाई संभव है?
❓ क्या किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई की गई?
❓ या नगर परिषद के अधिकारियों ने खुद को कानून और प्रशासन से ऊपर मान लिया?
जिला प्रशासन करे तत्काल जांच
मामले में शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। अब निगाहें कलेक्टर, एसडीएम, अतिरिक्त कमिश्नर और नगरीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं।
जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर 25 अगस्त की कार्रवाई, उससे जुड़े दस्तावेजों और भूमि की स्थिति को स्पष्ट किया जाए।
✔ 25 अगस्त की कार्रवाई की वीडियोग्राफी
✔ कार्रवाई के आदेश की प्रति
✔ जब्ती पंचनामा एवं जब्ती सूची
✔ राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन रिपोर्ट
✔ नगर परिषद के भूमि संबंधी प्रस्ताव एवं अभिलेख
सवाल यह है कि क्या बिछिया में कानून किताबों में चलेगा या फिर अधिकारियों की मर्जी से?
“हमारी निजी भूमि में निर्माण कार्य चल रहा था। नगर परिषद ने आपत्ति लगाई तो हमने तहसीलदार बिछिया में केस लगाया और निर्णय हमारे पक्ष में हुआ। इसके बाद भी उसे नहीं माना गया।
कलेक्टर महोदय मंडला, कमिश्नर महोदय जबलपुर से लेकर न्यायालय तक फैसला हमारे पक्ष में आया, फिर भी नगर परिषद बिछिया के अधिकारी-कर्मचारी नहीं मान रहे हैं।
बिना नोटिस और बिना सूचना के सब तोड़फोड़ कर अपना बोर्ड लगा दिए हैं। सभी दस्तावेज हमारे पास हैं कि उक्त भूमि हमारी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। यहां तो न्यायालय तक की नहीं सुनी जा रही है।”
पीड़ित, बिछिया मंडला
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