सेवानिवृत्त कर्मचारी श्रीकांत मोदी ने उठाए सवाल, शासन के आदेश और पूर्व स्वीकृत लाभ का हवाला देकर वसूली रोकने की मांग
रेवांचल टाइम्स, मंडला जनपद पंचायतों के मूल कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिए जाने का मामला अब विवादों के घेरे में है। सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी श्रीकांत मोदी द्वारा दिए गए लिखित आवेदन में वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शासन के निर्देशों के अनुसार समयमान वेतनमान का लाभ देने तथा कर्मचारियों से निकाली जा रही कथित वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
आवेदन के अनुसार, जनपद पंचायत के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ पूर्व में शासन के निर्देशों के आधार पर दिया जाता रहा है। आवेदक का दावा है कि जिला पंचायत के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिए जाने के बाद जनपद पंचायत की समिति की बैठक में संकल्प पारित किया गया था। समिति के अनुमोदन के उपरांत तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारियों द्वारा जनपद पंचायत के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया गया.श्रीकांत मोदी का आरोप है कि वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा शासन के निर्देशानुसार समयमान वेतनमान का लाभ देने के बजाय कर्मचारियों के विरुद्ध वसूली निकाली जा रही है। आवेदक ने इसे शासन द्वारा जारी आदेशों की भावना के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
एक ही व्यवस्था, फिर अलग अलग नियम क्यों
आवेदन में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि यदि जनपद पंचायत के मूल कर्मचारी शासन के अधीन निर्धारित नियमों के अनुसार समयमान वेतनमान का लाभ पाने के पात्र हैं, तो उन्हें लाभ देने के बजाय वसूली की कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत में संलग्न कुछ कर्मचारियों को इसी प्रकार का लाभ मिलने का हवाला भी आवेदन में दिया गया है।
श्रीकांत मोदी ने अपने आवेदन में बताया है कि रमेश विश्वकर्मा जनपद पंचायत मोहगांव, रमेश कछवाहा जनपद पंचायत बीजाडांडी तथा संदीप मोदी जनपद पंचायत नारायणगंज के मूल कर्मचारी हैं, जो वर्तमान में जिला पंचायत मंडला में संलग्न बताए गए हैं। आवेदनकर्ता का दावा है कि इन कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ प्राप्त हो रहा है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ही पंचायत व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के मामले में नियमों का अलग-अलग तरीके से पालन क्यों किया जा रहा है यदि समयमान वेतनमान का लाभ शासन के आदेशों के अनुरूप है तो जनपद पंचायत के मूल कर्मचारियों को इससे वंचित करने का आधार क्या है और यदि लाभ गलत तरीके से दिया गया था तो क्या सभी समान मामलों की समीक्षा की गई है
शासन के आदेश की प्रति स्थापना शाखा में होने का दावा
आवेदक ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि शासन द्वारा जारी समयमान वेतनमान संबंधी आदेश की प्रति जिला पंचायत मंडला की स्थापना शाखा में उपलब्ध है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे उपलब्ध शासन आदेश, कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, नियुक्ति आदेश तथा पूर्व में पारित समिति के संकल्प का परीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करें।आवेदन में यह भी बताया गया है कि संबंधित कर्मचारियों की नियुक्तियां पंचायत अधिनियम 1976 के अधीन जनपद पंचायतों में की गई थीं। इसलिए उनके मूल पद, नियुक्ति की प्रकृति, सेवा शर्तों और समयमान वेतनमान की पात्रता का परीक्षण नियमानुसार किया जाना आवश्यक बताया गया है।
वसूली ने बढ़ाई कर्मचारियों की चिंता
समयमान वेतनमान का लाभ मिलने के बाद यदि कर्मचारियों से राशि की वसूली की जाती है तो इसका सीधा असर उनके आर्थिक हितों पर पड़ता है। विशेषकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामले में वसूली का मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है। श्रीकांत मोदी स्वयं सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उन्होंने इसी आधार पर मामले में मानवीय एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाए जाने की मांग की है।
उन्होंने मांग की है कि शासन के निर्देशों एवं उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण कर जनपद पंचायत के मूल कर्मचारियों को नियमानुसार समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया जाए। साथ ही जब तक मामले में स्पष्ट निर्णय न हो, तब तक कथित वसूली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
जांच से ही सामने आएगा नियमों का सच
अब पूरा मामला संबंधित अधिकारियों की जांच और अभिलेखों के परीक्षण पर टिका है। यदि पूर्व में समिति के संकल्प और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के आधार पर समयमान वेतनमान दिया गया था, तो वर्तमान में वसूली का आधार क्या है—यह सवाल कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं यदि पूर्व में दिया गया लाभ नियमसम्मत नहीं था, तो इसकी जिम्मेदारी और प्रक्रिया भी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है।फिलहाल सेवानिवृत्त कर्मचारी श्रीकांत मोदी ने लिखित आवेदन के माध्यम से शासन के निर्देशों के अनुरूप न्यायपूर्ण निर्णय की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अधिकारी इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और शासन के आदेशों की जांच कर कर्मचारियों को राहत देते हैं या वसूली की कार्रवाई को ही आगे बढ़ाया जाता है।

