“कंप्यूटर क्रांति के सूत्रधार, पंचायती राज के शिल्पकार और अंतिम छोर के व्यक्ति को प्रथम पंक्ति में लाने वाले युवा प्रधानमंत्री थे राजीव गांधी :- विनोद सेन सिरोंज
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय श्री राजीव गांधी आधुनिक भारत के उन नेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने देश को केवल अपने समय की चुनौतियों से निकालने का प्रयास नहीं किया, बल्कि आने वाली 21वीं सदी के भारत की नींव रखने का सपना देखा। वे ऐसे समय में राजनीति में आए, जब देश तकनीकी रूप से आज की तुलना में बहुत पीछे था। उन्होंने विज्ञान, तकनीक, संचार, शिक्षा और पंचायती राज को भारत के भविष्य की ताकत के रूप में देखा।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वे पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के बड़े पुत्र और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाती थे। प्रारंभ में उनकी राजनीति में कोई विशेष रुचि नहीं थी। उन्होंने विमान चालक के रूप में अपना पेशेवर जीवन शुरू किया और सार्वजनिक जीवन से दूर रहना पसंद किया। लेकिन छोटे भाई संजय गांधी की 23 जून 1980 को विमान दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति में आने के लिए मजबूर किया। वर्ष 1981 में उन्होंने अमेठी से लोकसभा चुनाव जीता और सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
31 अक्टूबर 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के सामने असाधारण परिस्थितियां थीं। उसी दिन राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। दिसंबर 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। उस समय उनकी आयु मात्र 40 वर्ष थी। वे भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक थे।
राजीव गांधी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने भारत को भविष्य की दृष्टि से देखने का साहस किया। उन्होंने कहा था कि भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा। जिस दौर में कंप्यूटर को लेकर देश में आशंकाएं थीं, उसी दौर में राजीव गांधी ने कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक को भारत की विकास यात्रा का आवश्यक हिस्सा माना।
सैम पित्रोदा के साथ मिलकर उन्होंने दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई दिशा देने का प्रयास किया। कंप्यूटर और आधुनिक संचार तकनीक को बढ़ावा देने के उनके फैसलों का उस समय विरोध भी हुआ, लेकिन बाद के वर्षों में यही तकनीकी क्रांति भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार बनी। आज भारत की डिजिटल शक्ति और सूचना प्रौद्योगिकी की वैश्विक पहचान को समझने के लिए राजीव गांधी के उस शुरुआती दृष्टिकोण को याद करना जरूरी है।
राजीव गांधी का सपना केवल शहरों को आधुनिक बनाने का नहीं था। वे चाहते थे कि विकास की रोशनी गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के कारण उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि लोकतंत्र केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव के स्तर तक जनता की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
राजीव गांधी ने प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका प्रसिद्ध कथन था कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से बहुत कम राशि वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचती है। इस कथन के माध्यम से उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि विकास योजनाओं का पैसा अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए।
73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज और नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा देने की दिशा में निर्णायक कदम बाद में 1992-93 में उठाया गया, अर्थात राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए उनका प्रस्तावित विधेयक पारित नहीं हो सका था। लेकिन स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक मजबूती देने की उनकी पहल ने आगे की प्रक्रिया की मजबूत आधारभूमि तैयार की। मध्य प्रदेश में भी पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में उस दौर में महत्वपूर्ण प्रयास हुए और बाद में राज्य ने इसे व्यापक रूप से लागू किया।
राजीव गांधी की सोच में युवा भारत का विशेष स्थान था। मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का संवैधानिक संशोधन उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इससे करोड़ों युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर मिला।
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी नई सोच को आगे बढ़ाया। 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा के विस्तार, आधुनिकीकरण और तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया गया। ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर देने के उद्देश्य से जवाहर नवोदय विद्यालयों की अवधारणा भी इसी दौर में आगे बढ़ी।
राजीव गांधी की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी था कि वे भारत को विज्ञान और तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र बनाना चाहते थे। उनके लिए आधुनिकता का अर्थ केवल बड़े शहर, बड़ी इमारतें या नई मशीनें नहीं थीं। उनका सपना था कि तकनीक का लाभ सामान्य नागरिक तक पहुंचे और शासन व्यवस्था अधिक तेज, पारदर्शी तथा जवाबदेह बने।
राजीव गांधी का व्यक्तित्व भी उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग बनाता था। वे मूल रूप से एक सरल, सौम्य और आधुनिक सोच वाले व्यक्ति थे। उन्होंने राजनीति को अपना पहला करियर नहीं चुना था। परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति में पहुंचाया, लेकिन उन्होंने अपने सामने आए दायित्व को देश के भविष्य को बदलने के अवसर के रूप में स्वीकार किया।
उनकी पत्नी श्रीमती सोनिया गांधी थीं। उनके दो बच्चे—राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा—हैं। राजीव गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन में अपने परिवार को सत्ता की राजनीति में स्थापित करने की कोशिश नहीं की। उनका जीवन इस बात का उदाहरण था कि राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति के साधन के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के माध्यम के रूप में भी देखा जा सकता है।
राजीव गांधी के जीवन में उपलब्धियों के साथ विवाद और राजनीतिक चुनौतियां भी रहीं। बोफोर्स सहित कई मुद्दों ने उनके शासन और राजनीतिक छवि को प्रभावित किया। लेकिन किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन केवल उसके विवादों से नहीं, बल्कि उसके विचारों, नीतियों और दीर्घकालीन प्रभाव से भी किया जाना चाहिए।
1991 में आम चुनाव के दौरान वे देशभर में कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम विस्फोट में उनकी हत्या कर दी गई। उनकी आयु उस समय केवल 46 वर्ष थी। यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक थी।
आज जब हम डिजिटल इंडिया, मोबाइल संचार, इंटरनेट, सूचना प्रौद्योगिकी, स्थानीय स्वशासन और युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी की बात करते हैं, तब राजीव गांधी के उस दौर को याद करना आवश्यक हो जाता है जब इन विषयों को लेकर देश में भविष्य की केवल कल्पना की जा रही थी।
राजीव गांधी का सपना था—एक ऐसा भारत जिसमें विज्ञान और तकनीक केवल चुनिंदा लोगों की सुविधा न होकर आम नागरिक की ताकत बने; जिसमें सत्ता का विकेंद्रीकरण हो; जिसमें गांव का व्यक्ति भी निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बने और जिसमें देश का अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति विकास की पहली पंक्ति में आए।
इसीलिए स्वर्गीय राजीव गांधी को केवल पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में याद करना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित करना होगा। वे आधुनिक भारत की उस सोच के सूत्रधार थे, जिसने कंप्यूटर, दूरसंचार, शिक्षा, युवा शक्ति और पंचायती राज को भविष्य के भारत से जोड़ा।
स्व. राजीव गांधी का सपना आज भी हमारे सामने एक सवाल की तरह खड़ा है—क्या विकास की अंतिम किरण वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंची है? यदि उनके सपने को सही अर्थों में पूरा करना है, तो तकनीक का लाभ गांव तक, लोकतंत्र की ताकत अंतिम व्यक्ति तक और विकास के अवसर समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने होंगे।
यही स्वर्गीय राजीव गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
— विनोद सेन
सचिव
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी
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