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पिंडरई की अनुजा एचपी गैस एजेंसी पर गंभीर सवाल, जांच की मांग



गांव-गांव महंगे सिलेंडर देने की चर्चा, भुगतान के बाद बिल नहीं मिलने के आरोप

 स्कूलों के सिलेंडर वितरण में भी उठ रहे सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला। कई तरह की गड़बड़ी शासन प्रशासन के संरक्षण में मध्य प्रदेश के मंडला जिले में हो रही है।  सभी तरह की गड़बड़ियों को रोकने के कोई प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। सिर्फ आम नागरिक परेशान हो रहे हैं। एक ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के मंडला जिले के तहसील नैनपुर

का सामने आया है। रसोई गैस एजेंसी की मनमानी चरम सीमा पर पहुंच गई है और कोई  लगाम नहीं कसी जा रही है जिसकी वजह से नागरिकों  में आक्रोश बढ़ रहा है।

नैनपुर तहसील के ग्राम पिंडरई स्थित अनुजा एचपी गैस एजेंसी इन दिनों कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों के बीच चल रही शिकायतों और चर्चाओं ने गैस सिलेंडर वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एजेंसी से जुड़े कर्मचारी गांव-गांव पहुंचकर निर्धारित दर से अधिक राशि में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करा रहे हैं और उपभोक्ताओं से राशि लेने के बावजूद बिल नहीं दिया जा रहा है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह उपभोक्ताओं के अधिकारों और गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।


निर्धारित कीमत से ज्यादा वसूली की चर्चा


ग्रामीणों का कहना है कि घर तक सिलेंडर पहुंचाने के नाम पर उनसे अतिरिक्त राशि लिए जाने की बात सामने आ रही है। उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सिलेंडर की कीमत और डिलीवरी शुल्क निर्धारित है, तो वसूली गई पूरी राशि की रसीद अथवा बिल क्यों नहीं दिया जा रहा? बिल नहीं मिलने से लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


बिना बिल भुगतान—किसके इशारे पर?


ग्रामीणों के अनुसार कई मामलों में भुगतान लेने के बाद बिल उपलब्ध नहीं कराया जाता। यही स्थिति सबसे ज्यादा संदेह पैदा कर रही है। उपभोक्ताओं की मांग है कि एजेंसी के बिक्री रिकॉर्ड, बुकिंग विवरण, डिलीवरी रिकॉर्ड और वास्तविक वसूली का मिलान कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपभोक्ताओं से निर्धारित राशि ही ली जा रही है या नहीं।


स्कूलों के सिलेंडर पर भी उठे सवाल


सबसे गंभीर चर्चा सरकारी स्कूलों में उपयोग होने वाले रसोई गैस सिलेंडरों को लेकर है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि स्कूलों के लिए सिलेंडर उपलब्ध कराने से पहले दो बार ओटीपी लिए जाने की बात कही जा रही है। इसी आधार पर कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि कहीं रिकॉर्ड में दो सिलेंडर की बुकिंग और वास्तविक आपूर्ति में अंतर तो नहीं है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए पूरे मामले की दस्तावेजी जांच जरूरी है।


रिकॉर्ड खंगाले जाएं तो सामने आ सकती है सच्चाई


ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग वास्तव में स्थिति स्पष्ट करना चाहता है तो केवल कागजी खानापूर्ति के बजाय पिछले कई महीनों के सिलेंडर बुकिंग रिकॉर्ड, ओटीपी विवरण, डिलीवरी चालान, उपभोक्ता बिल, स्कूलों को की गई आपूर्ति और एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर की जांच की जाए। रिकॉर्ड का भौतिक स्टॉक से मिलान होते ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।


जांच हुई तो कई सवालों के मिलेंगे जवाब


अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच करेगा? ग्रामीणों की मांग है कि एजेंसी के वितरण रिकॉर्ड और उपभोक्ताओं से की गई वसूली का सत्यापन कराया जाए। जांच में यदि अनियमितता, अधिक वसूली, बिना बिल भुगतान या रिकॉर्ड में किसी प्रकार की हेराफेरी सामने आती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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