सरपंच पर लठ से मारपीट और गुंडों से पिटवाने के आरोप, अस्पताल में भी कथित धमकी—“पोंडी वापस आया तो जिंदा गाड़ दूंगा”; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स - महाराजपुर/मंडला। ग्राम पंचायत पोंडी में चुनावी रंजिश का मामला अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। 13 अगस्त को एक युवक के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम पंचायत पोंडी के सरपंच राजेंद्र धुर्वे पर युवक को लठ से पीटने तथा अन्य लोगों से पिटवाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, चुनावी विवाद को लेकर पहले से चली आ रही रंजिश के चलते मौका पाकर युवक के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि घटना में लाठियों का इस्तेमाल किया गया और युवक को अन्य लोगों के माध्यम से भी पिटवाया गया। मारपीट में घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में भी नहीं थमी कथित धमकी!
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान भी आरोपी पक्ष की ओर से उसे धमकाया गया। कथित रूप से युवक से कहा गया कि “अगर पोंडी वापस आया तो जिंदा गाड़ दूंगा।”
यदि पीड़ित द्वारा लगाए गए ये आरोप सही हैं तो यह केवल मारपीट का मामला नहीं, बल्कि घायल व्यक्ति को अस्पताल में जाकर कथित रूप से धमकाने का भी गंभीर मामला बनता है। ऐसे में पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या चुनावी रंजिश में कानून व्यवस्था बौनी हो गई?
ग्राम पंचायत के निर्वाचित सरपंच पर इस तरह के गंभीर आरोप लगना अपने आप में चिंता का विषय है। सवाल यह है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि पर मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, तो पुलिस ने मामले को कितनी गंभीरता से लिया? क्या पीड़ित के बयान दर्ज किए गए? मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई? घटना में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान और भूमिका की जांच की गई?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या पुलिस की निष्क्रियता से आरोपियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और पीड़ित युवक को सुरक्षा के बजाय डर के माहौल में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है?
पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में पुलिस प्रशासन से मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाए। यदि मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन यदि एक घायल युवक अस्पताल में भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और उसे कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी जा रही है, तो यह स्थानीय कानून व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।
