Breaking

revanchal times new

बिछिया नगर परिषद में हितग्राहियों को प्रधानमंत्री योजना का लाभ दे रहे चिन्ह चिन्ह के बाटी गई रबड़ी के आरोप....




प्रधानमंत्री आवास योजना में ‘हितग्राही’ चयन पर सवाल, योजना प्रभारी की पत्नी को लाभ का आरोप

पहले से पक्का मकान होने का भी दावा, दस्तावेजों की जांच हुई या सिर्फ कागजों में निपटा सत्यापन?

दैनिक रेवांचल टाइम्स — मंडला भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर सामने आए एक मामले ने योजना की पारदर्शिता और हितग्राही चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही नाम न छापने की तर्ज में स्थानीय लोग ने आरोप लगाया गया है, कि नगर परिषद में प्रधानमंत्री आवास योजना के योजना प्रभारी के रूप में मनोज निगम के कार्यकाल के दौरान उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रजनी निगम के नाम से योजना का लाभ लेने व योजना स्वीकृत किये जाने की जानकारी सामने आ रही है। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि संबंधित परिवार के पास पहले से पक्का मकान मौजूद होने की जनचर्चा बनी हुई इसके बावजूद भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लिया गया। यह बड़ा सवाल की आखिर योजनाएं के नियंम शर्ते क्या ओर किसे मिलनी चाहिये या नही ये देखा कौन हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी होना बाकी है, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला महज एक हितग्राही को योजना का लाभ मिलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पात्रता परीक्षण, दस्तावेजों की जांच, स्थल सत्यापन और हितग्राही चयन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होंगे।


योजना प्रभारी के परिवार तक कैसे पहुंचा योजना का लाभ?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका को लेकर उठ रहा है। यदि योजना प्रभारी के पद पर रहते हुए उनके ही परिवार की सदस्य के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ स्वीकृत हुआ, तो यह जांच का विषय है कि आवेदन की जांच किस अधिकारी ने की? पात्रता का परीक्षण किस आधार पर किया गया? स्थल सत्यापन किसने किया? और स्वीकृति की प्रक्रिया में योजना प्रभारी की भूमिका क्या रही?

सवाल यह भी है कि क्या संबंधित हितग्राही के परिवार की आवासीय एवं संपत्ति संबंधी स्थिति का नियमानुसार सत्यापन किया गया था या फिर पूरी प्रक्रिया महज दस्तावेजों तक सीमित रही?


गरीब पात्र हितग्राही लाइन में, लाभ पहुंचा किसे?

प्रधानमंत्री आवास योजना का मूल उद्देश्य ऐसे पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, जिनके पास आवास की पर्याप्त सुविधा नहीं है। ऐसे में यदि किसी ऐसे परिवार को योजना का लाभ मिला, जिसके पास पहले से पक्का मकान था, तो यह उन गरीब परिवारों के साथ अन्याय का सवाल भी खड़ा करता है, जो वर्षों से योजना के लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

      वही स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पात्रता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ लेता है तो न केवल सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठता है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद हितग्राही अपने अधिकार से वंचित हो जाता है।


फाइल खोली जाए तो सामने आएगी पूरी कहानी!

मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए केवल मौखिक दावों के बजाय संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी है। जांच में प्रधानमंत्री आवास योजना का मूल आवेदन, पात्रता संबंधी दस्तावेज, परिवार की आवासीय स्थिति, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, स्वीकृति आदेश, भुगतान विवरण, जियो-टैगिंग/फोटो रिकॉर्ड तथा योजना प्रभारी और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जानी चाहिए।

    वही खास तौर पर यह देखा जाना जरूरी है कि योजना का लाभ स्वीकृत किए जाने के समय संबंधित परिवार के पास पहले से पक्का मकान था या नहीं और यदि था, तो पात्रता परीक्षण में उसे किस आधार पर पात्र माना गया।


आरोप सही तो जिम्मेदारी तय हो, गलत तो स्थिति भी साफ हो

इस मामले में निष्पक्ष जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आरोप सीधे सरकारी योजना की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका से जुड़े हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो हितग्राही चयन से लेकर स्वीकृति और भुगतान तक की प्रक्रिया में जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


वहीं यदि जांच में यह साबित होता है कि संबंधित हितग्राही सभी निर्धारित मापदंडों को पूरा करती थीं और उनके पास योजना की पात्रता के विपरीत कोई पक्का आवास नहीं था, तो लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता भी सामने आ जाएगी।


नगर परिषद से बड़ा सवाल—जांच होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?


अब निगाहें नगर परिषद एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर हैं। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि मामले की जांच उसी व्यवस्था के अधिकारियों से कराने के बजाय किसी सक्षम और निष्पक्ष अधिकारी से दस्तावेजों सहित जांच कराई जाए, ताकि हितों के टकराव अथवा पक्षपात की किसी भी आशंका को समाप्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए बनाई गई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है। ऐसे में योजना के लाभार्थी चयन में यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो यह गंभीर विषय है। अब असली सवाल यही है कि योजना प्रभारी की पत्नी के नाम लाभ कैसे स्वीकृत हुआ, पात्रता का सत्यापन किसने किया और क्या संबंधित परिवार के पास पहले से पक्का मकान था?

      वही इन सवालों का जवाब फाइलों और मौके के भौतिक सत्यापन से ही मिलेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में सिर्फ कागजी जांच करता है या दस्तावेजों से लेकर जमीन तक वास्तविक पड़ताल कर पूरी सच्चाई सामने लाता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post