दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। सरकारी खाद्यान्न की सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हुए मंडला जिले के नारायणगंज स्थित दीपिका वेयरहाउस में धान में जानबूझकर पानी छिड़कने का गंभीर मामला अब प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण की आशंका का प्रतीक बन गया है। तीन करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी धान से छेड़छाड़ का आरोप जांच में सही पाए जाने के बावजूद एक महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी न एफआईआर दर्ज हुई है, न किसी अधिकारी या वेयरहाउस संचालक पर कार्रवाई हुई है।
15 मई 2026 को किसान एग्रो राइस मिल प्रबंधन ने जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर बताया था कि दीपिका वेयरहाउस में रखे धान में अत्यधिक नमी (19-20 प्रतिशत से अधिक), 55-60 प्रतिशत टूटन और खराब गुणवत्ता पाई गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया कि धान का वजन बढ़ाने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिसके कारण दो लॉट धान से एक लॉट चावल भी नहीं निकल पा रहा है।
जांच दल ने भी पुष्टि की शिकायत के आधार पर गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में पानी छिड़काव की पुष्टि कर दी। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 22 जून 2026 को जिला प्रबंधक ने पूरी जांच रिपोर्ट कलेक्टर मंडला, महाप्रबंधक (मिलिंग) भोपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक जबलपुर और जिला आपूर्ति अधिकारी को भेज दी थी। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नियमों के अनुसार, सरकारी गोदाम में खाद्यान्न की गुणवत्ता खराब करने, वजन बढ़ाने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे कृत्य आपराधिक श्रेणी में आते हैं लेकिन यहां न गोदाम सील किया गया, न स्टॉक का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया और न ही संदिग्ध स्टॉक को उठाने पर रोक लगाई गई।
उठ रहे गंभीर सवाल
शिकायत के एक महीने बाद तक गोदाम को सील क्यों नहीं किया गया?
जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई ?
कितना धान इस दौरान गोदाम से बाहर उठाया गया?
क्या पूरे स्टॉक का वैज्ञानिक परीक्षण हुआ?
जांच की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई रोकी जा रही है?
जनता के अनाज से खिलवाड़
यह मामला मात्र एक गोदाम तक सीमित नहीं है। यह पूरे खाद्यान्न प्रबंधन तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है। मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों की मेहनत से उपजे अनाज को यदि सरकारी गोदामों में इस तरह बर्बाद किया जाएगा तो न केवल लाखों रुपये का सरकारी नुकसान होगा, बल्कि गरीबों को वितरित होने वाले राशन की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
जिला प्रशासन, पुलिस और राज्य शासन अब इस अग्निपरीक्षा से नहीं बच सकता। जनता जानना चाहती है कि तीन करोड़ के धान से छेड़छाड़ करने वालों पर कब और कैसे कार्रवाई होगी। अन्य वेयरहाउसों की भी जांच होनी चाहिए ताकि ऐसे घोटाले दोबारा न दोहराए जा सकें।

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