शिक्षक, पटवारी, एएनएम समेत कई अधिकारी नहीं रह रहे कार्यस्थल पर, पढ़ाई से लेकर राजस्व और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
दैनिक रेवाँचल टाईम्स- मंडला। मंडला जिले में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शिक्षक, पटवारी, एएनएम सहित विभिन्न विभागों के अनेक कर्मचारी और अधिकारी अपने निर्धारित मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं। वे प्रतिदिन शहरों से अप-डाउन कर सरकारी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जिसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व जैसी आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है। लगातार शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी लोगों में नाराजगी बढ़ा रही है।
सबसे अधिक असर शासकीय विद्यालयों में देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते या जल्दी लौट जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सूत्रों के अनुसार नैनपुर तहसील के संकुल केंद्र सालीवाड़ा अंतर्गत प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में पदस्थ अधिकांश शिक्षक मुख्यालय में न रहकर शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन आना-जाना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और बच्चों का भविष्य दांव पर लग रहा है।
स्थिति केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। राजस्व विभाग में भी कई पटवारी मुख्यालय में नहीं रहने के कारण किसानों और ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग में एएनएम और अन्य मैदानी कर्मचारियों की अनुपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे मंडला जिले में व्यापक रूप ले चुकी है। लगातार शिकायतों और समाचारों के बावजूद न तो मुख्यालय में निवास सुनिश्चित कराया जा रहा है और न ही नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई हो रही है। इससे शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
जनता का कहना है कि यदि कर्मचारी और अधिकारी मुख्यालय में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें तो सरकारी सेवाओं में सुधार आ सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी विभागों में मुख्यालय निवास के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए, नियमित निरीक्षण किए जाएं और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों को समय पर बेहतर शासकीय सेवाएं मिल सकें।

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