BREAKING
जवाहर नवोदय विद्यालय से दो छात्र लापता | एमपी में बड़ा प्रशासनिक फैसला | जबलपुर में सनसनीखेज वारदात
सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर बड़ा सवाल - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

aaj ka akhbar padhen

आज का ई-पेपर

पूरा अखबार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

ई-पेपर Viewer

Monday, July 13, 2026

सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर बड़ा सवाल



दाखिले बढ़ाने की मुहिम कागजों में, शिक्षक और विभागीय अमला बेपरवाह

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, जिले के  अभिभावकों और बच्चों का निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान, सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

      मध्यप्रदेश के मंडला जिले में सरकारी स्कूलों की गिरती छात्र संख्या अब शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का बड़ा विषय बनती जा रही है। शासन द्वारा सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों तक में अभिभावक अब अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए न तो शिक्षक गंभीर दिखाई दे रहे हैं और न ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाते नजर आ रहे हैं। हर वर्ष नामांकन बढ़ाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई विद्यालयों में बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

शहरी क्षेत्रों में निजी स्कूलों का बढ़ता प्रभाव अब ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है। बेहतर पढ़ाई और अनुशासन की उम्मीद में अभिभावक निजी संस्थानों का रुख कर रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित पढ़ाई और व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

नैनपुर क्षेत्र में बिगड़ रहे हालात

जानकारी के अनुसार मंडला जिले की तहसील नैनपुर अंतर्गत कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने को लेकर अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। संकुल केंद्र सालीवाड़ा के अंतर्गत आने वाले सभी प्राथमिक माध्यमिक विद्यालयों में भी नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों द्वारा विशेष अभियान चलाने की कमी महसूस की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर संपर्क कर बच्चों को स्कूल से जोड़ने, अभिभावकों को जागरूक करने और सरकारी स्कूलों की खूबियां बताने जैसे प्रयास केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। इसका सीधा असर सरकारी विद्यालयों की छात्र संख्या पर पड़ रहा है।

जिम्मेदारों की उदासीनता से बिगड़ रही तस्वीर

सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में कई विद्यालयों में बच्चों की संख्या इतनी कम हो सकती है कि उनके संचालन पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

शासन-प्रशासन द्वारा स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और नामांकन बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है। केवल कागजी अभियानों और बैठकों से स्थिति में सुधार संभव नहीं है।

जनता की मांग—हो जवाबदेही तय

क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अधिकारियों को मैदानी स्तर पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाना चाहिए और जिन स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है वहां विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर कब जागता है और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।

No comments:

Post a Comment