मांगलिक कार्यों पर लगेगा ब्रेक
विवाह गृह प्रवेश मुंडन यज्ञोपवीत नए भवन का शुभारंभ भूमि पूजन पर लगेगा ब्रेक
दैनिक रेवांचल टाईम्स - शनिवार को आषाढ़ महीने शुक्ल पक्ष की देव सयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होगा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और अगले 4 महीने तक विश्राम करते हैं इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्म चिंतन का प्रारंभ माना जाता है
चतुर मास में क्यों रुक जाते हैं मांगलिक कार्य
पंडित संदीप ज्योतिषी अमरकंटक ने बताया कि देव सैनी एकादशी से विवाह गृह प्रवेश मुंडन यज्ञोपवीत नए भवन का शुभारंभ भूमि पूजन सभी प्रकार के मांगलिक संस्कारों पर विराम लग जाता है इसका प्रमुख कारण यह है कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं तो शुभ एवं मांगलिक कार्य के लिए उनकी प्रत्यक्ष कृपा उपलब्ध नहीं रहती चातुर्मास वर्षा ऋतु का समय होता है प्राचीन काल में भारी वर्षा के कारण यात्रा करना कठिन होता था इसीलिए ऋषि मुनि एक ही स्थान पर रहकर जप तप साधना आराधना अध्ययन और धर्म उपदेश करते थे इसी परंपरा ने चातुर्मास को साधना और संयम का व्रत बना दिया
देवशयनी एकादशी यह संदेश देती है की जीवन में केवल भौतिक उपलब्धि ही पर्याप्त नहीं है बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की उतनी ही आवश्यक है चातुर्मास के चार महीने मन वचन और कर्म की शुद्धि ईश्वर के प्रति समर्पण और जीवन में अनुशासन स्थापित करने का श्रेष्ठ अवसर है जो व्यक्ति इस अवधि में श्रद्धा संयम और सेवा का पालन करता है उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं संत महात्मा भी इन चार महीने में प्रवास छोड़कर एक स्थान पर रहकर धार्मिक प्रवचन भागवत कथा रामायण पाठ शिव महापुराण रुद्राभिषेक आध्यात्मिक आयोजन से समाज को सनातन धर्म को संस्कारों का संदेश देते हैं।
देवशयनी एकादशी पर करें पांच शुभ कार्य
भगवान विष्णु को गुड और चने का भोग लगाये इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है पंचामृत का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है इस दिन पीली वस्तु का दान करें और श्रद्धा पूर्वक ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें भगवान विष्णु की कृपा पानी के लिए विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदाई माना जाता है देवशयनी एकादशी पर केले के पेड़ की पूजा कर उसमें जल अर्पित करें घी का दीपक जलाएं इससे सुख समृद्धि और जीवन में खुशहाली बनी रहती है
वही पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि देवशयनी एकादशी 24 जुलाई को 9:13 से शुरू होकर 25 जुलाई की सुबह 11:34 तक रहेगी उदया तिथि की मान्यता के अनुसार व्रत और पूजा 25 जुलाई शनिवार को ही किया जाएगा
