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बैगा अंचल की शिक्षा भगवान भरोसे! आखिर किसके हवाले आदिवासी बच्चों का भविष्य?



17 दिनों से बिना खण्ड शिक्षा अधिकारी चल रहा मवई बीईओ कार्यालय, 20 से अधिक स्कूल शिक्षकविहीन

मनचाहे तबादलों ने उजाड़े दूरदराज के स्कूल, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल



दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडलाआदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सरकार के "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" के दावों की पोल खोल रही है। बैगा अंचल के मवई विकासखंड में पिछले 17 दिनों से खण्ड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का पद खाली पड़ा है। पूर्व बीईओ हरे सिंह परते 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन 17 जुलाई तक नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो सकी। सवाल यह है कि आखिर बैगा अंचल की शिक्षा व्यवस्था किसके भरोसे चल रही है?

स्थिति केवल बीईओ कार्यालय तक सीमित नहीं है। विकासखंड के करीब 20 स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जबकि कई विद्यालय केवल अतिथि शिक्षकों के सहारे किसी तरह संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब आदिवासी बच्चों का हो रहा है, जिनके भविष्य की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर है।

स्थानांतरण का खेल, उजड़ गए दूरदराज के स्कूल

बताया जा रहा है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त श्रीमती वंदना गुप्ता के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के स्थानांतरण हुए। सहायक आयुक्त कार्यालय में आवेदन, सिफारिश और राजनीतिक दबाव का दौर चलता रहा। परिणाम यह हुआ कि जिन शिक्षकों को बैगा और वनांचल के बच्चों को शिक्षा देने के लिए नियुक्त किया गया था, वे अपने मनपसंद और सुविधाजनक स्कूलों में स्थानांतरित हो गए।

उधर, मवई और घुघरी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूल शिक्षकविहीन हो गए, जबकि मंडला मुख्यालय से 20-25 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक पदस्थ बताए जा रहे हैं। यह असंतुलन शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है।

बच्चों का भविष्य या अधिकारियों का निजी स्वार्थ?

सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, वे आज शिक्षक का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार की बात करने वाली सरकार और जिम्मेदार प्रशासन आखिर इन बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर मौन क्यों हैं?

यदि दूरदराज के स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर सुविधा वाले स्कूलों में भेजा गया है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या गरीब आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है?

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में

क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मंचों से शिक्षा सुधार और आदिवासी विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जब बैगा अंचल के स्कूल शिक्षकविहीन हो रहे हैं, तब उनकी आवाज क्यों नहीं उठ रही? क्या विकास केवल भाषणों तक सीमित है?

जवाब चाहिए...

17 दिन से बीईओ का पद खाली क्यों है?

20 से अधिक स्कूल शिक्षकविहीन क्यों हैं?

मनमाने स्थानांतरण किसके दबाव में हुए?

आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई कब होगी?

क्या जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि अब भी चुप्पी साधे रहेंगे?

बैगा अंचल के बच्चों का भविष्य किसी की प्रशासनिक लापरवाही और स्थानांतरण की राजनीति की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। यदि समय रहते शिक्षक और अधिकारी नहीं पहुंचाए गए, तो इसका सीधा असर पूरी एक पीढ़ी की शिक्षा पर पड़ेगा। अब जिला प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर आदिवासी बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है?

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