रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इन दिनों बस संचालकों के द्वारा मनमानियां की जा रही बस परिचालक के द्वारा यात्रियों से दूरी से अधिक किराया वसूल रहे है और बस की छमता से अधिक यात्रियों को बैठा रहे हैं। बसों में मनमाने तरीके से जानवरों की तरह ठुस ठूस के सवारियों को भर रहे न कोई नियम कोई कानून नही केवल बस संचालकों और चालक परिचालकों की नियम चलता है और अगर कोई इनके ख़िलाफ़ कुछ कहता है तो इनके द्वारा खुली दादा गिरी बताई जाती और सरेआम कहा जाता है कि क्या कर लोगे शिकायत करोगे पर कहाँ करोगे सब को हम पैसे खिलाते है कोई कुछ नही कर सकता जाओ जहाँ लगे शिकायत करो शायद चालक परिचालक ओर बस संचालकों का कहना भी सही हो क्योंकि सरेआम बस में जानवरों की सवारियों को ढोया जा रहा है किसका क्या परमिट है किसका इंश्योरेंस है बस का फिटनिश है कि नही किराया लिस्ट है कि नही जिले में न कोई बोलने वाला है न कोई सुनने वाला है। और तो ओर जिस विभाग को ये जिम्मेदारी दी गई है उसको कभी यात्रियों को यात्रा के दौरान क्या परेशानी हो रही बस चालक परिचालक ओर बस संचालक किस तरह से पेश आ रहे है उन्हें कोई मतलब नही है। बस में सफर करने वाले यात्रियों से किराया तो मन माफ़िक़ वसूल रहे पर उन्हें कोई सुविधाएं नही दी जा रही है बल्कि सफर के दौरान लोगों को एक पैर खड़े खड़े होकर अपना सफर करना पड़ रहा है। जबकि यात्रा के दौरान लोग जब पूरा किराया दे रहे हैं और उसके बाद भी उनको न बैठने की जगह ओर नही खड़े होने की जगह मिलती है।
जिले में चल रही है बस संचालकों की मनमानी जिला परिवहन विभाग ने मुदी आँख कर रहे हैं, लोगो से बत्तमीजी...
bydigital bharat
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