केलवारी पंचायत में पांच निर्माण कार्य अधूरे, वर्षों से मजदूरी भुगतान नहीं होने का आरोप!
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। जिले के बिछिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत केलवारी में विधायक निधि से कराए गए पांच निर्माण कार्यों के अधूरे रहने और ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी का भुगतान वर्षों से लंबित होने के आरोप सामने आए हैं।
अपनी मेहनत की कमाई के लिए लंबे समय से परेशान ग्रामीण महिला एवं पुरुष मजदूर जिला योजना सभागार पहुंचे और कलेक्टर को आवेदन सौंपकर लंबित भुगतान तथा अधूरे निर्माण कार्यों की जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। हालांकि वास्तविक भुगतान स्थिति और कार्यों की प्रगति संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वर्षों से मजदूरी भुगतान अटका होने का आरोप
ग्राम पंचायत केलवारी के मजदूरों ने आरोप लगाया कि विभिन्न निर्माण कार्यों में उनसे मजदूरी कराई गई, लेकिन काम करने के बाद भी निर्धारित मेहनताना नहीं दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार मजदूरी भुगतान के लिए पंचायत तथा संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं मिल सका।
लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलने से मजदूर परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले को प्राथमिकता देने की मांग की है।
विधायक निधि के इन पांच निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने विधायक निधि से संबंधित पांच निर्माण कार्यों का उल्लेख किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये कार्य वर्षों बाद भी अधूरे हैं।
1. महुआ नाला में स्टॉप डेम निर्माण।
2. बीजा धार नाला निर्माण कार्य।
3. बीजा धार नाला में पुलिया निर्माण।
4. छोटू राठौर के घर के पास सीसी रोड निर्माण।
5. भगवान के घर के पास निर्माण कार्य।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि इन निर्माण कार्यों के लिए शासन से राशि स्वीकृत की गई थी, तो कार्य निर्धारित समय पर पूरे क्यों नहीं हुए और मजदूरों का भुगतान लंबित क्यों है।
दीपावली से पहले मेहनताना दिलाने की उठाई थी मांग
ग्रामीण मजदूरों ने कलेक्टर से आवेदन के माध्यम से दीपावली से पहले लंबित मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की थी, ताकि उनके परिवारों को त्योहार के समय आर्थिक राहत मिल सके।
मजदूरों का कहना है कि मेहनत करने के बाद भी भुगतान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़ रहा है।
प्रशासन से मांग की गई है कि मजदूरी भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण कर वास्तविक देय राशि की पुष्टि की जाए और पात्र मजदूरों को जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
पंचायत से अधिकारियों तक गुहार, फिर कलेक्टर के पास पहुंचे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्यों और भुगतान के संबंध में स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
इसके बाद महिला एवं पुरुष मजदूर सामूहिक रूप से जिला योजना सभागार पहुंचे और कलेक्टर के समक्ष अपनी समस्या रखी।
आवेदन की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बिछिया तथा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बिछिया को भी सौंपी गई है।
निर्माण कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच जरूरी
ग्रामीणों की शिकायत के बाद निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि, वास्तविक प्रगति, मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच का सवाल उठ रहा है।
जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कार्यों के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च की गई और कौन-कौन से निर्माण कार्य किस स्तर तक पूरे हुए हैं।
साथ ही मजदूरी भुगतान के रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य करने वाले मजदूरों की जानकारी का मिलान कर लंबित देयकों की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
● पांचों कार्यों की स्वीकृत लागत कितनी थी?
● निर्माण कार्य कितने प्रतिशत पूरे हुए?
● मजदूरी भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है?
● शेष निर्माण कार्य कब पूरे होंगे?
● देरी के लिए किसकी जवाबदेही बनती है?
ग्रामीणों ने शीघ्र भुगतान और निर्माण पूरा कराने की मांग की
ग्राम पंचायत केलवारी के मजदूरों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, लंबित मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने और अधूरे निर्माण कार्यों को जल्द पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों का लाभ गांव के लोगों को तभी मिलेगा, जब कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हों और उनमें काम करने वाले मजदूरों को समय पर मेहनताना मिले।
फिलहाल संबंधित पंचायत और जिम्मेदार विभागों के भुगतान रिकॉर्ड तथा निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक होने का इंतजार है।
यदि ग्रामीणों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो वर्षों से मजदूरी भुगतान लंबित रहने और निर्माण कार्य अधूरे होने के कारणों की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा। अब देखना है कि प्रशासन मजदूरों की शिकायत पर कब तक जांच पूरी कर भुगतान एवं निर्माण कार्यों के संबंध में ठोस कार्रवाई करता है।
