गढ़ी बफर की 14 ईको विकास समितियों के तालाबों में छोड़ा गया 180 किलोग्राम मछली बीज
मत्स्य पालन से स्वरोजगार बढ़ाने की पहल, वन संरक्षण के साथ आजीविका पर जोर
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व के गढ़ी बफर परिक्षेत्र में स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मानसून सीजन के दौरान जुलाई माह में परिक्षेत्र की 14 ईको विकास समितियों के अंतर्गत आने वाले तालाबों में कुल 180 किलोग्राम मिश्रित मछली बीज छोड़ा गया।

मछली बीज में रोहू, कतला, ग्रास कार्प एवं कॉमन कार्प जैसी प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं। इनका चयन मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। मछलियों की बेहतर वृद्धि और समुचित पोषण के लिए संबंधित तालाबों में नियमित रूप से चारा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
14 समितियों के सदस्यों को अतिरिक्त आय की उम्मीद
इस पहल का उद्देश्य ईको विकास समितियों से जुड़े सदस्यों को स्थानीय स्तर पर काम और अतिरिक्त आमदनी के अवसरों से जोड़ना है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच मत्स्य पालन आजीविका का एक विकल्प बन सकता है। तालाबों में बेहतर उत्पादन होने पर समितियों के सदस्यों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
वन संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी पर जोर
ईको विकास समितियों का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीणों को जंगल पर निर्भरता कम करने तथा वैकल्पिक आजीविका अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर मिलने से वन संरक्षण की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी भी बढ़ सकती है।
उत्पादन और आमदनी से तय होगी सफलता
पहल की वास्तविक सफलता तालाबों में मछलियों की वृद्धि, उत्पादन और उससे होने वाली आमदनी पर निर्भर करेगी। इसके लिए नियमित देखरेख, पर्याप्त चारा, तालाबों का उचित प्रबंधन और समितियों के सदस्यों को मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी होगा।