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मंडला में अवैध प्लॉटिंग के आरोप: स्थगन आदेशों के बाद भी निर्माण जारी रहने की शिकायत

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मंडला में अवैध प्लॉटिंग के आरोप: स्थगन आदेशों के बाद भी निर्माण जारी रहने की शिकायत

दैनिक रेवांचल टाइम्स | पड़ताल: निवास–नारायणगंज

मंडला में अवैध प्लॉटिंग के आरोप: स्थगन आदेशों के बाद भी निर्माण जारी रहने की शिकायत

निवास। मंडला जिले के निवास, आमाडोंगरी, नारायणगंज और पड़रिया में कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग तथा सरकारी जमीन को निजी प्लॉटों की चतुर्सीमा में शामिल किए जाने की शिकायतों ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। राजस्व निरीक्षक और पटवारियों की जांच के बाद एसडीएम न्यायालय में प्रकरण दर्ज होने तथा क्रय-विक्रय और नामांतरण पर स्थगन आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर निर्माण गतिविधियां अब भी जारी हैं।

जांच प्रतिवेदनों में अनुमति और सुविधाओं पर सवाल

आमाडोंगरी, निवास के पटवारी हल्का क्रमांक 36 और नारायणगंज तहसील के पड़रिया से संबंधित राजस्व प्रतिवेदनों में बिना डायवर्सन, बिना नगर तथा ग्राम निवेश की अनुमति और बिना मूलभूत सुविधाओं के कृषि भूमि पर प्लॉट काटे जाने की स्थिति दर्ज होने की जानकारी है। कार्रवाई के तहत क्रय-विक्रय और नामांतरण पर स्थगन लगाने तथा संबंधित पक्षों से जवाब लेने की प्रक्रिया सामने आई है।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कहीं मुरम-गिट्टी डालकर रास्ते बनाए जा रहे हैं तो कहीं बाउंड्रीवॉल खड़ी की जा रही हैं। ऐसे में स्थगन आदेशों के दायरे, उनके पालन की निगरानी और मौके की वास्तविक स्थिति के भौतिक सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आमाडोंगरी में 23 जनवरी 2026 को मौका जांच

ग्राम आमाडोंगरी के पटवारी हल्का क्रमांक 37 में खसरा नंबर 51/1/1/1/1/1/1/1/1/1/1 और 51/2 की भूमि को लेकर शिकायत पर 23 जनवरी 2026 को राजस्व निरीक्षण मंडल निवास द्वारा मौका जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में सड़क, नाली, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया गया है। आरोप है कि भूमि पर वैधानिक अनुमति के बिना प्लॉटिंग की गई।

इस मामले में कई आदिवासी और गैर-आदिवासी खरीदारों के नाम सामने आए हैं। शिकायतों में यह सवाल भी उठाया गया है कि कहीं आदिवासी जमीनों के संरक्षण संबंधी प्रावधानों की आड़ में किसी दूसरे व्यक्ति या समूह ने जमीन के कारोबार का रास्ता तो नहीं बनाया। इस आशंका की पुष्टि के लिए जांच आवश्यक है।

निवास के पांच खसरों में 89 प्लॉटों का विवरण

निवास के पटवारी हल्का क्रमांक 36 में खसरा नंबर 271, 344, 300, 273 और 595 को लेकर एसडीएम न्यायालय में दर्ज प्रकरणों में क्रमशः 26, 24, 20, 13 और 6 प्लॉट काटे जाने की जानकारी सामने आई है। इन पांच भूमि प्रकरणों में कुल 89 प्लॉटों के क्रय-विक्रय का विवरण है। आरोप है कि आवश्यक डायवर्सन और नगर तथा ग्राम निवेश की अनुमति के बिना प्लॉटिंग की गई।

पड़रिया में 0.53 हेक्टेयर भूमि पर 25 प्लॉट

नारायणगंज तहसील के ग्राम पड़रिया में खसरा नंबर 139, रकबा 0.53 हेक्टेयर के मामले में संतकुमार चौकसे और कुलदीप चौकसे के नाम सामने आए हैं। तहसीलदार के जांच प्रतिवेदन के अनुसार, यहां कृषि भूमि पर 25 प्लॉट बनाए जाने का मामला सामने आया है। मौके पर सड़क, नाली और विद्युत व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बताया गया है। यह स्थिति प्लॉट खरीदारों के हितों और जमीन की वैधानिक स्थिति से जुड़े सवाल भी खड़े करती है।

सरकारी रास्तों और चरनोई को चतुर्सीमा में शामिल करने के आरोप

शिकायतों में सरकारी रास्तों, चरनोई और अन्य शासकीय मद की जमीनों को निजी प्लॉटों की चतुर्सीमा में शामिल किए जाने का आरोप लगाया गया है। राजस्व अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर होने की बात भी उठाई गई है। यदि गलत चौहद्दी दर्ज कराकर सरकारी भूमि को निजी बताकर रजिस्ट्री कराए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला सरकारी संपत्ति और राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता से भी जुड़ता है।

इन शिकायतों के संदर्भ में रजिस्ट्री के दौरान संबंधित खसरा, भूमि की प्रकृति, प्रतिबंधों और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के परीक्षण की प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता उठाई गई है। जिन कर्मचारियों पर दबाव डालने या मिलीभगत के आरोप हैं, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच का सवाल भी सामने है।

आदेशों के पालन और जवाबदेही पर उठे सवाल

शिकायतकर्ता दस्तावेज लेकर कार्यालयों के चक्कर लगाने और कार्रवाई की प्रतीक्षा करने की बात कह रहे हैं। प्रमुख सवाल हैं कि स्थगन आदेशों के पालन की निगरानी किस स्तर पर हुई, निर्माण गतिविधियों का भौतिक सत्यापन किया गया या नहीं और सरकारी भूमि की पहचान कर उसे सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। संबंधित पक्षों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस को प्रतिवेदन भेजे जाने का सवाल भी उठाया गया है।

कलेक्टर के स्तर पर संबंधित खसरों का संयुक्त सीमांकन, शासकीय भूमि की पहचान, संदिग्ध रजिस्ट्रियों और चतुर्सीमा में कथित हेराफेरी की जांच तथा स्थगन आदेशों के पालन का भौतिक सत्यापन कराने की आवश्यकता रेखांकित की गई है। उप पंजीयक कार्यालय और संबंधित राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की जांच, प्लॉट खरीदारों की जमा-पूंजी की सुरक्षा और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी इस मामले के अहम प्रश्न हैं।

यह मामला सरकारी जमीन, आदिवासियों के अधिकार और प्लॉट खरीदारों के हितों से जुड़ा है। शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों में सामने आए बिंदुओं पर स्पष्ट कार्रवाई तथा मौके की स्थिति का सत्यापन प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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