वनग्राम फीटारी में जर्जर छत के नीचे नौनिहालों की पढ़ाई, हादसे की आशंका से उठे सवाल!
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – बजाग (डिंडौरी)। विकासखंड बजाग के वनांचल स्थित वनग्राम फीटारी की प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की तस्वीर सामने आई है। यहां छोटे बच्चे ऐसे जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिसकी छत और दीवारों की हालत बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
विद्यालय की छत पर कई स्थानों से प्लास्टर उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। छत की सतह क्षतिग्रस्त नजर आ रही है, जबकि दीवारों पर नमी, सीलन, काई और उखड़े प्लास्टर के निशान दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में भवन की स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण आवश्यक है।
छत का प्लास्टर उखड़ा, दीवारों पर सीलन और काई
प्राथमिक शाला भवन की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छत के विभिन्न हिस्सों में प्लास्टर उखड़ने और सतह खराब होने की जानकारी सामने आई है। कई जगह नमी के कारण काले धब्बे और काई दिखाई देने की बात कही गई है।
दीवारों के ऊपरी हिस्सों में भी सीलन और प्लास्टर खराब होने के निशान बताए गए हैं। भवन की ऐसी स्थिति में बच्चों को कक्षा में बैठाकर पढ़ाना सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय है।
हालांकि भवन की वास्तविक संरचनात्मक मजबूती और खतरे के स्तर का निर्धारण तकनीकी विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।
● क्या जर्जर छत की तकनीकी जांच कराई गई है?
● क्या बच्चों को सुरक्षित कक्ष उपलब्ध कराया गया है?
● नए विद्यालय भवन का प्रस्ताव किस स्थिति में है?
● क्या स्कूल का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?
नए भवन की मांग कई बार, लेकिन समाधान का इंतजार
ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन द्वारा नए भवन की मांग कई बार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद अब तक नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर निराशा है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर बार-बार मांग उठाने के बाद भी समाधान नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में शिक्षा विभाग से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि विद्यालय भवन के निर्माण अथवा मरम्मत के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या व्यवस्था प्रस्तावित है।
30 बच्चों में सोमवार को केवल 20 उपस्थित
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला में लगभग 30 बच्चे दर्ज हैं। इनमें अधिकांश बच्चे बैगा जनजाति के परिवारों से आते हैं।
सोमवार को विद्यालय में दर्ज 30 बच्चों में से केवल 20 बच्चे उपस्थित बताए गए। इस दौरान एक शिक्षक विद्यालय में मौजूद थे, जबकि दूसरे शिक्षक के अनुपस्थित होने की जानकारी सामने आई।
बच्चों की कम उपस्थिति और संबंधित शिक्षक की अनुपस्थिति के वास्तविक कारण विभागीय अभिलेखों एवं जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेंगे।
विद्यालय भवन की बदहाल स्थिति बच्चों की नियमित उपस्थिति को प्रभावित करने वाला एक संभावित कारण हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन से जानकारी लेना आवश्यक है।
स्थान : वनग्राम फीटारी, विकासखंड बजाग
दर्ज विद्यार्थी : लगभग 30
सोमवार की बताई गई उपस्थिति : 20
प्रमुख समस्या : जर्जर भवन, सीलन और क्षतिग्रस्त छत
मांग : नया भवन और सुरक्षित शिक्षण व्यवस्था
रसोईघर की स्वच्छता पर भी उठे सवाल
विद्यालय की समस्याएं केवल जर्जर भवन तक सीमित नहीं हैं। परिसर में साफ-सफाई के अभाव और रसोईघर की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बच्चों के मध्यान्ह भोजन के लिए अनाज और सब्जियों के सुरक्षित एवं स्वच्छ भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आई। भोजन लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जा रहा था।
ऐसे में भोजन तैयार करने के स्थान की स्वच्छता, सामग्री के सुरक्षित रखरखाव और रसोईघर की आवश्यक सुविधाओं का निरीक्षण किया जाना जरूरी है।
बैगा जनजाति के बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर चिंता
वनग्राम फीटारी की प्राथमिक शाला में अधिकांश विद्यार्थी बैगा जनजाति के परिवारों से संबंधित बताए गए हैं। वनांचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित भवन और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय में नामांकन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नियमित शिक्षक, सुरक्षित कक्ष, स्वच्छ परिसर और मध्यान्ह भोजन की समुचित व्यवस्था भी आवश्यक है।
विद्यालय की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही समस्याओं पर विभागीय अधिकारियों का ध्यान जाना जरूरी है।
क्या किसी हादसे के बाद जागेंगे जिम्मेदार?
विद्यालय की छत से प्लास्टर उखड़ने और दीवारों में सीलन की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
यदि छत का कोई कमजोर हिस्सा टूटकर गिरता है तो उसके नीचे मौजूद बच्चों को चोट लगने की आशंका हो सकती है। ऐसे जोखिम को देखते हुए भवन की तकनीकी जांच और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था में देरी नहीं होनी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय एहतियाती कार्रवाई करना आवश्यक है।
तत्काल निरीक्षण और सुरक्षित वैकल्पिक कक्ष की मांग
ग्रामीणों की अपेक्षा है कि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी तत्काल विद्यालय पहुंचकर भवन की स्थिति का निरीक्षण कराएं। छत, दीवारों और भवन की संरचनात्मक मजबूती का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
इसके साथ ही नए भवन के निर्माण के लिए आवश्यक प्रस्ताव और स्वीकृति संबंधी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए।
जब तक विद्यालय भवन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक शिक्षण कक्ष की व्यवस्था किए जाने की मांग भी महत्वपूर्ण है।
विद्यालय परिसर की स्वच्छता, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था और शिक्षकों की उपस्थिति की भी जांच कर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।
वनग्राम फीटारी की प्राथमिक शाला में भवन की बदहाल स्थिति बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी शिक्षा सुविधाओं के प्रति जवाबदेही का सवाल खड़ा करती है। अब आवश्यकता है कि जिम्मेदार विभाग समयबद्ध निरीक्षण, सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था और नए भवन की मांग पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करें।
