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डिंडौरी महिला बाल विकास विभाग में 79.95 लाख के भुगतान पर गंभीर सवाल, दो कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया!

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | डिंडौरी

महिला बाल विकास विभाग में 79.95 लाख के भुगतान पर गंभीर सवाल, अभियोजन स्वीकृति के लिए पत्राचार!

कोदो-कुटकी पोषण आहार योजना में कथित अनियमितताएं, दो कर्मचारियों पर आरोप और सात दिन में जांच रिपोर्ट की मांग

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – डिंडौरी। जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग की कोदो-कुटकी आधारित पोषण आहार योजना में लाखों रुपये के भुगतान को लेकर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। तेजस्वनी महिला संघ, डिंडौरी को किए गए 79 लाख 95 हजार 727 रुपये के भुगतान के संबंध में शिकायत और विभागीय पत्राचार के बाद मामला भोपाल स्तर तक पहुंच गया है।



उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस मामले में दो अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की मांग और विस्तृत विभागीय जांच से संबंधित पत्र जारी किए गए हैं। हालांकि आरोपों की पुष्टि, जांच के अंतिम निष्कर्ष और अभियोजन स्वीकृति पर अंतिम निर्णय की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

विवादित भुगतान की राशि
₹79,95,727
कोदो-कुटकी आधारित पोषण आहार योजना

79.95 लाख रुपये के भुगतान में कथित वित्तीय गड़बड़ी

प्राप्त जानकारी के अनुसार डिंडौरी जिले में संचालित कोदो-कुटकी आधारित पोषण आहार योजना के तहत तेजस्वनी महिला संघ को किए गए भुगतान में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत में योजना के क्रियान्वयन के दौरान पद के कथित दुरुपयोग, अभिलेखों में हेरफेर और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इस संबंध में डिंडौरी के वार्ड क्रमांक 02, सुखबहार निवासी दिगंबर खांडिलकर द्वारा शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

दो अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

शिकायत में तत्कालीन सहायक संचालक एवं प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी श्यामलाल सिंगौर तथा लिपिक सहायक ग्रेड-03 एवं प्रभारी पोषण आहार शाखा दिगंबर श्याम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में उल्लिखित नाम

1. श्यामलाल सिंगौर — तत्कालीन सहायक संचालक एवं प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।

2. दिगंबर श्याम — लिपिक सहायक ग्रेड-03 एवं प्रभारी पोषण आहार शाखा।

इनके विरुद्ध आरोप शिकायत का हिस्सा हैं। दोष सिद्ध होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

भोपाल से अभियोजन स्वीकृति के संबंध में पत्र

उपलब्ध विभागीय पत्रों के विवरण के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय द्वारा 17 सितंबर 2026 को जारी पत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 218 के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है।

अभियोजन स्वीकृति मांगे जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप स्वतः प्रमाणित हो गए हैं। यह संबंधित कानूनी प्रक्रिया का एक चरण है, जिसमें सक्षम प्राधिकारी के निर्णय का महत्व होता है।

2 नवंबर को सात दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश

मामले में 2 नवंबर 2026 को संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास, मध्यप्रदेश द्वारा संभागीय संयुक्त संचालक, जबलपुर संभाग को पत्र भेजे जाने का उल्लेख है।

पत्र में संबंधित मामले के सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कर सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। इसकी प्रतिलिपि कलेक्टर, डिंडौरी को भी भेजी गई है।

मामले से जुड़ी प्रमुख तारीखें

17 सितंबर 2026: अभियोजन स्वीकृति के अनुरोध से संबंधित पत्र।

2 नवंबर 2026: विस्तृत जांच कर सात दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश संबंधी पत्र।

वर्तमान स्थिति: अंतिम जांच प्रतिवेदन और अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय की पुष्टि उपलब्ध नहीं।

क्या जांच में तय होगी भुगतान की जवाबदेही?

सरकारी पोषण आहार योजनाओं का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों तक सहायता और पोषण संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है। ऐसे में लाखों रुपये के भुगतान को लेकर अनियमितताओं की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।

जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित भुगतान किन स्वीकृतियों, अभिलेखों और प्रक्रियाओं के आधार पर किया गया। साथ ही यह भी सामने आना चाहिए कि योजना के क्रियान्वयन में निर्धारित वित्तीय नियमों और विभागीय निर्देशों का पालन हुआ या नहीं।

पत्राचार के बाद आगे क्या कार्रवाई हुई?

मामले में अभियोजन स्वीकृति का अनुरोध और जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब आगे की प्रशासनिक तथा कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या जांच प्रतिवेदन निर्धारित समय में प्राप्त हुआ? क्या आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य मिले? क्या सक्षम प्राधिकारी ने अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लिया? इन प्रश्नों के उत्तर संबंधित विभागीय अभिलेखों और आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेंगे।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों का पक्ष और विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष शामिल नहीं हैं। इसलिए आरोपों को प्रमाणित अनियमितता या दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

बड़ा सवाल : जांच और कार्रवाई कब तक?

डिंडौरी की पोषण आहार योजना में 79 लाख 95 हजार 727 रुपये के भुगतान को लेकर उठे सवालों का जवाब कब मिलेगा? क्या विभाग जांच के निष्कर्ष और अभियोजन स्वीकृति से संबंधित निर्णय स्पष्ट करेगा? यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो क्या जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी?

दैनिक रेवाँचल टाईम्स
डिंडौरी | महिला एवं बाल विकास | पोषण आहार योजना | विभागीय जांच

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