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विश्व स्ट्रोक दिवस विशेष: युवाओं में भी बढ़ता खतरा, जीवनशैली और मानसिक तनाव पर ध्यान जरूरी

दैनिक रेवाँचल टाईम्स

विश्व स्ट्रोक दिवस विशेष: युवाओं में भी बढ़ता खतरा, जीवनशैली और मानसिक तनाव पर ध्यान जरूरी

दैनिक रेवांचल टाईम्स। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव और स्वास्थ्य की अनदेखी स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। कभी मुख्यतः बुजुर्गों की बीमारी समझा जाने वाला स्ट्रोक अब युवाओं में भी सामने आ रहा है। विश्व स्ट्रोक दिवस का संदेश है कि जोखिम कारकों को पहचानें, जीवनशैली पर ध्यान दें और लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय मदद लें।

विश्व स्ट्रोक दिवस विशेष: युवाओं में भी बढ़ता खतरा, जीवनशैली और मानसिक तनाव पर ध्यान जरूरी

क्या है स्ट्रोक और क्यों जरूरी है जागरूकता?

हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस जनजागरूकता के लिए मनाया जाता है। मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह रुकने या मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव होने से स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है। रक्त वाहिका में अवरोध भी इसका कारण हो सकता है। यह गंभीर स्थिति है, जिसमें समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।

अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन के अनुसार, स्ट्रोक किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकता है। दुनिया भर में 25 साल से ज्यादा उम्र के हर चार वयस्कों में से एक को अपने जीवनकाल में कभी न कभी स्ट्रोक हो सकता है।

युवाओं में भी जोखिम, नींद और दिनचर्या पर ध्यान जरूरी

नेशनल स्ट्रोक रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, स्ट्रोक के हर 7 में से 1 मरीज युवा अवस्था के कामकाजी वर्ग से है। भारत में 14 प्रतिशत मरीज 45 साल से कम उम्र के होते हैं। स्लीप मेडिसिन रिव्यूज 2023 में बताया गया था कि कामकाजी उम्र के 104 मिलियन भारतीय ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं, जो स्ट्रोक का एक जोखिम कारक है।

धूम्रपान, मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाते हैं। शारीरिक निष्क्रियता, व्यायाम की कमी, अनियमित नींद, नशे की आदत और असंतुलित खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिम्मेदारियों और लगातार बैठकर काम करने के बीच स्वास्थ्य की उपेक्षा करने के बजाय जीवनशैली और कार्यशैली में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।

30 अस्पतालों के अध्ययन में सामने आई उपचार में देरी

वर्ष 2020-2022 के दौरान देश के 30 अस्पतालों के 34792 स्ट्रोक मरीजों पर किए गए अध्ययन में पुरुषों की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत और महिलाओं की 36.6 प्रतिशत बताई गई। 70 प्रतिशत से अधिक मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से थे। अध्ययन में 74.5 प्रतिशत मरीजों में उच्च रक्तचाप, 28.5 प्रतिशत में तंबाकू का सेवन और 27.3 प्रतिशत में मधुमेह प्रमुख जोखिम कारक पाए गए।

अध्ययन के अनुसार, 37.8 प्रतिशत मरीज 24 घंटे बाद अस्पताल पहुंचे, जबकि केवल 20.1 प्रतिशत मरीज लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच पाए। स्ट्रोक के तीन महीने बाद 27.8 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी। लगभग 30 प्रतिशत मरीज गंभीर विकलांगता का शिकार हुए और 1.1 प्रतिशत मरीजों को दोबारा स्ट्रोक आया।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अचानक संतुलन खोना, आंखों में बदलाव, चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ में कमजोरी और बोलने में कठिनाई स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर हर मिनट कीमती मानें और मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।

दुनिया भर में मौत और विकलांगता का बड़ा कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2021 में स्ट्रोक दुनिया भर में मौत और विकलांगता का तीसरा प्रमुख कारण था। उस वर्ष इसके अनुमानित 93.8 मिलियन मामले थे और 11.9 मिलियन नए मामले दर्ज किए गए। पिछले 20 वर्षों में जीवनभर स्ट्रोक होने का जोखिम 50 फीसदी तक बढ़ गया है।

‘डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ इयर्स’ के रूप में मापा जाने वाला स्ट्रोक का वैश्विक बोझ वर्ष 2000 के 137 मिलियन से बढ़कर 2021 में 160 मिलियन हो गया। स्ट्रोक के बोझ का अधिकांश हिस्सा ऐसे 10 जोखिम कारकों से जुड़ा है, जिन्हें बदला या नियंत्रित किया जा सकता है।

इनमें उच्च रक्तचाप, वायु प्रदूषण, धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल, अधिक सोडियम वाला आहार, उच्च फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, किडनी की खराबी, अधिक शारीरिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और शराब का हानिकारक सेवन शामिल हैं।

बचाव के लिए संतुलित दिनचर्या अपनाएं

पोषक आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। धूम्रपान, शराब और अन्य नशों से दूर रहें। तले हुए, अधिक मीठे, नमकीन और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें। रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

मानसिक सुकून और तनाव का प्रबंधन भी स्वास्थ्य की देखभाल का हिस्सा होना चाहिए। गुस्से, द्वेष, ईर्ष्या और अनावश्यक दिखावे से दूरी रखते हुए सकारात्मक संबंधों और संतुलित जीवन को महत्व दें। स्वच्छ जल, पोषक आहार और स्वस्थ पर्यावरण की जरूरत को समझते हुए प्रकृति के संरक्षण के प्रति भी जिम्मेदार बनें।

स्ट्रोक की आशंका पर क्या करें?

मरीज के लक्षणों पर ध्यान दें और चिकित्सकीय सहायता के लिए तुरंत आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। तंग कपड़े ढीले करें और मरीज को खाने-पीने के लिए कुछ न दें। संभव हो तो एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाएं। सांस और पल्स पर ध्यान रखें। सांस रुकने पर, यदि सीपीआर देना आता है, तो सीपीआर शुरू करें।

घबराने के बजाय मनोबल बनाए रखें और मरीज को भी दिलासा दें। रोकथाम के उपाय अपनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन स्ट्रोक के संकेत दिखाई देने पर अस्पताल पहुंचने और उचित चिकित्सा लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

लेखक: डॉ. प्रीतम भी. गेडाम
महाराष्ट्र सरकार द्वारा सम्मानित लेखक

दैनिक रेवाँचल टाईम्स

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