मंडला में मिड-डे मील पर संकट! पैसा नहीं मिला, अब राशन भी गायब?
प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, सरकारी स्कूलों में बच्चों के भोजन पर मंडराया खतरा
शिक्षा सत्र की शुरुआत से भुगतान लंबित होने की शिकायतें; अक्टूबर-नवंबर के राशन की उपलब्धता पर अनिश्चितता और पोर्टल पर दर्ज भुगतान की वास्तविक स्थिति जांचने की मांग।
दैनिक रेवाँचल टाईम्स | मंडला। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण) की व्यवस्था को लेकर मंडला जिले में चिंताजनक सवाल सामने आ रहे हैं। योजना के संचालन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शिक्षा सत्र की शुरुआत से ही भोजन निर्माण के लिए आवश्यक राशि का भुगतान समय पर नहीं होने की समस्या बनी हुई है।
अब अक्टूबर-नवंबर माह के राशन आवंटन और आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भोजन बनाने के लिए राशि और राशन दोनों ही समय पर उपलब्ध नहीं होंगे, तो सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित भोजन कैसे मिल पाएगा?
पहले पैसा अटका, अब राशन की बारी!
योजना से जुड़े लोगों का कहना है कि भोजन तैयार करने के लिए आवश्यक राशि समय पर नहीं मिलने से पहले ही संचालन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब राशन की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने चिंता और बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित शासकीय उचित मूल्य दुकानों तक राशन पहुंचने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से स्कूलों में भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। यदि भुगतान और खाद्यान्न की आपूर्ति में देरी बनी रहती है, तो इसका असर योजना के नियमित संचालन पर पड़ सकता है।
जब भोजन निर्माण की राशि और राशन की आपूर्ति ही अनिश्चित हो, तो बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी आखिर कैसे पूरी होगी?
दो-दो माह का राशन, हिसाब-किताब पर भी सवाल
राशन वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। बताया जा रहा है कि कई बार दो-दो माह का राशन एक साथ उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि किस महीने के लिए कितना खाद्यान्न आवंटित किया गया, कितना उठाया गया और वास्तव में कितना स्कूलों तक पहुंचा।
संबंधित विभाग को अक्टूबर और नवंबर माह के राशन आवंटन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके साथ ही उचित मूल्य दुकानों को भेजे गए खाद्यान्न तथा स्कूलों को उपलब्ध कराए गए वास्तविक राशन का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पोर्टल पर भुगतान दर्ज, लेकिन बैंक खाते खाली?
सबसे गंभीर सवाल भुगतान व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित पोर्टल पर भुगतान दर्ज दिखाई देने की बात कही जा रही है, जबकि कुछ लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, पोर्टल पर दर्ज भुगतान और बैंक खातों में वास्तविक राशि जमा होने के बीच अंतर की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। यदि ऐसा अंतर पाया जाता है, तो यह जानना आवश्यक होगा कि भुगतान किस स्तर पर लंबित है।
- क्या पोर्टल पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी दिखाई जा रही है?
- क्या संबंधित बैंक खातों में वास्तव में राशि जमा हुई है?
- यदि भुगतान लंबित है, तो देरी किस स्तर पर हो रही है?
- क्या पोर्टल रिकॉर्ड और बैंक विवरण का मिलान कराया गया है?
बच्चों के पोषण से जुड़ा है पूरा मामला
पीएम पोषण योजना केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्कूली बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति को प्रोत्साहित करना भी है।
यदि भोजन निर्माण की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होती और राशन आपूर्ति में भी बाधा आती है, तो इसका सीधा असर बच्चों को मिलने वाले भोजन पर पड़ सकता है। विशेषकर उन परिवारों के बच्चों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है, जिनके लिए विद्यालय में मिलने वाला भोजन दैनिक पोषण का अहम हिस्सा है।
भुगतान और राशन वितरण की प्रशासनिक समस्याओं का असर विद्यार्थियों के भोजन पर न पड़े, इसके लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा
इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वे योजना के अंतर्गत लंबित भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। जिन खातों में राशि जमा नहीं हुई है, उनकी जांच कर नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही अक्टूबर-नवंबर के खाद्यान्न आवंटन, उठाव और वितरण की जानकारी सामने लाई जाए। उचित मूल्य दुकानों से विद्यालयों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था की समीक्षा कर किसी भी संभावित कमी को समय रहते दूर किया जाना चाहिए।
जिम्मेदार विभाग को देना होगा स्पष्ट जवाब
सवाल केवल भुगतान में देरी या राशन आपूर्ति की अनिश्चितता का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जवाबदेही का भी है, जिसके भरोसे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
आवश्यक है कि विभाग स्पष्ट करे कि कितने विद्यालयों का भुगतान लंबित है, कितनी राशि जारी की गई है और कितनी वास्तव में संबंधित खातों में पहुंची है। इसी तरह खाद्यान्न वितरण की अद्यतन स्थिति भी सामने आनी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है। शिकायतों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक रिकॉर्ड और बैंक भुगतान विवरण के मिलान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मंडला में पीएम पोषण योजना को लेकर उठे सवालों का समाधान समयबद्ध भुगतान, पारदर्शी राशन वितरण और प्रशासनिक जवाबदेही से ही संभव है। सबसे जरूरी है कि किसी भी स्थिति में बच्चों का नियमित भोजन प्रभावित न हो।
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