मंडला में NH-30 बना ‘हादसों का हाईवे’! सीमेंट सड़क पर डामर की परत उखड़ी, गड्ढों से वाहन चालक परेशान
मंडला-बिछिया-मंगली मार्ग की बदहाली पर उठे सवाल; टोल वसूली के बावजूद सुरक्षित सफर को तरस रहे वाहन चालक, मरम्मत की गुणवत्ता की जांच की मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। जब सड़क की मरम्मत ही कुछ समय बाद नई परेशानी बन जाए, तो सवाल केवल गड्ढों का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, ठेकेदार की जवाबदेही और निगरानी करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली का भी होता है। मंडला से बिछिया होते हुए मंगली तक राष्ट्रीय राजमार्ग-30 की बदहाल स्थिति ने ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीमेंट सड़क के ऊपर डामर की परत बिछाकर मरम्मत का काम किया गया, लेकिन कई स्थानों पर यह परत उखड़ने लगी है। सड़क की असमान सतह, गड्ढों और खराब किनारों के कारण वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मरम्मत पर खर्च हुई राशि के बावजूद सड़क की हालत इतनी जल्दी क्यों बिगड़ गई?
यह राष्ट्रीय राजमार्ग जबलपुर से मंडला होते हुए रायपुर की ओर जाने वाले यातायात का महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से प्रतिदिन भारी ट्रक, मालवाहक वाहन, यात्री बसें और छोटे वाहन गुजरते हैं। ऐसे व्यस्त मार्ग पर सड़क की खराब स्थिति दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है।
सीमेंट सड़क पर डामर की लीपापोती? मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि सड़क की मरम्मत के नाम पर सीमेंट की सतह पर डामर बिछाया गया, लेकिन कई हिस्सों में डामर टिक नहीं पाया। इससे सड़क फिर उखड़ने लगी और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई।
यदि मरम्मत के कुछ समय बाद ही सड़क की सतह खराब हो रही है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण सामग्री, मरम्मत की तकनीक और कार्य की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरम्मत पूरी होने के बाद गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की थी? यदि जांच हुई थी, तो अब सड़क की बदहाल स्थिति के लिए जवाबदेह कौन है?
मोतीनाला, भाई-बहन नाला और मंगली के आगे बड़े गड्ढों की शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोतीनाला, भाई-बहन नाला और मंगली के आगे भी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर सड़क की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि वाहन चालकों को पक्की सड़क के बजाय ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने जैसा अनुभव हो रहा है।
विशेष रूप से भारी वाहनों के आवागमन के बीच दोपहिया वाहन चालकों और छोटे वाहनों के लिए ऐसे गड्ढे गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। रात के समय दृश्यता कम होने पर अचानक सामने आने वाला गड्ढा दुर्घटना की आशंका को और बढ़ा सकता है।
टोल पूरा, लेकिन सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे!
सड़क की बदहाली के बीच टोल वसूली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वाहन चालकों को सड़क उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ता है, लेकिन यदि मार्ग पर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा नहीं मिल रही, तो संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
जनता का सवाल है कि जब सड़क पर चलने के लिए शुल्क लिया जाता है, तो गड्ढों से राहत और सुरक्षित सफर की व्यवस्था क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही?
संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि इस मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास है और खराब हिस्सों की मरम्मत के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है।
दुर्घटनाओं की तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में सामने आई तस्वीरों के अनुसार, एक वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई देता है। अन्य तस्वीरों में सड़क की खराब सतह और सड़क किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहन दिखाई देने की बात कही गई है।
हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी दुर्घटना का एकमात्र कारण सड़क की खराब स्थिति थी। दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित जांच से ही हो सकती है। इसके बावजूद मार्ग की बदहाल स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन कब लेंगे सुध?
राष्ट्रीय राजमार्ग की खराब हालत को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने सड़क का निरीक्षण किया? क्या निर्माण और रखरखाव एजेंसी से जवाब मांगा गया? क्या खराब हिस्सों की मरम्मत के लिए कोई समयसीमा निर्धारित की गई?
सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर आम नागरिकों, बस यात्रियों, व्यापारियों और प्रतिदिन इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। ऐसे में केवल आश्वासन देने के बजाय सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी या फिर होगी नई मरम्मत?
सड़क की मरम्मत में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आने के बाद संबंधित ठेकेदार और निगरानी एजेंसी के कार्यों की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मरम्मत किस एजेंसी ने की, कितनी राशि खर्च हुई और कार्य की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई।
साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि मरम्मत कार्य की अनुबंध शर्तों में खराब हिस्सों को दोबारा सुधारने की जिम्मेदारी किसकी निर्धारित है। यदि जांच में निर्माण संबंधी अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इन सवालों का जवाब कब मिलेगा?
- मंडला-बिछिया-मंगली मार्ग की मरम्मत पर कितनी राशि खर्च हुई?
- मरम्मत का कार्य किस ठेकेदार या एजेंसी ने किया?
- सीमेंट सड़क पर डामर बिछाने के लिए कौन-सी तकनीक अपनाई गई?
- निर्माण सामग्री और गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की?
- उखड़ी सड़क और गड्ढों की मरम्मत कब तक होगी?
- सड़क की खराब स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले चाहिए कार्रवाई
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 की वर्तमान स्थिति को देखते हुए संबंधित विभाग को मंडला, बिछिया, मंगली और आगे के प्रभावित हिस्सों का तत्काल निरीक्षण कराना चाहिए। सड़क पर बने गड्ढों, उखड़ी डामर की परतों और असुरक्षित किनारों की पहचान कर समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जहां दुर्घटना का जोखिम अधिक है, वहां चेतावनी संकेतक, रात्रिकालीन दृश्यता के उपाय और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था भी की जानी चाहिए। सड़क पर पहले हुई दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा कर संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
अब जवाबदेही से नहीं बच सकते जिम्मेदार!
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 केवल सीमेंट और डामर से बनी सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, रोजगार और सुरक्षित घर वापसी से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग है। इसकी खराब स्थिति का असर पूरे क्षेत्र के आवागमन पर पड़ता है।
यदि मरम्मत के बाद सड़क दोबारा उखड़ रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ठेकेदार की लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो और निगरानी में चूक सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
अब सवाल जिला प्रशासन, संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से है—क्या NH-30 की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएंगे, या वाहन चालक इसी तरह गड्ढों और दुर्घटना के जोखिम के बीच सफर करने को मजबूर रहेंगे?
सड़क पर सुरक्षित चलना जनता का अधिकार है, किसी की मेहरबानी नहीं।
