कान्हा से सटे गांव में घर के पोर्च में सो रही महिला पर बाघ का हमला, हालत गंभीर
रात करीब 9 बजे अरोली गांव में हुई घटना; महिला के सिर, कान और शरीर पर गंभीर चोटें, बम्हनी से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। कान्हा नेशनल पार्क से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही के बीच एक गंभीर घटना सामने आई है। जिले की तिलरी पंचायत अंतर्गत ग्राम अरोली में रात करीब 9 बजे घर के पोर्च में सो रही महिला पर कथित तौर पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में रमली बाई मरावी गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
घर के पोर्च में सो रही थीं महिला, अचानक हुआ हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना ग्राम अरोली स्थित बालिका छात्रावास के पीछे की है। रमली बाई मरावी अपने घर के पोर्च में सो रही थीं। इसी दौरान कथित तौर पर बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में महिला के सिर, कान और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल उपचार की व्यवस्था की गई।
निजी वाहन से पहुंचाया अस्पताल, जबलपुर रेफर
घायल रमली बाई को परिजन निजी वाहन से उपचार के लिए बम्हनी लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन गंभीर चोटों को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला का उपचार जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
वन विभाग की भूमिका पर परिजनों ने उठाए सवाल
घटना के बाद वन विभाग की त्वरित सहायता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि आपात स्थिति में वन विभाग की ओर से समय पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका, जिसके कारण घायल महिला को निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि कान्हा नेशनल पार्क से लगे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी ग्रामीण पर हमला होने की स्थिति में तत्काल बचाव, उपचार और परिवहन की प्रभावी व्यवस्था होना जरूरी है।
हालांकि, वन विभाग की ओर से घटना और परिजनों के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। विभागीय जांच के बाद ही हमले की परिस्थितियों और संबंधित वन्यजीव की पुष्टि हो सकेगी।
कान्हा से लगे गांवों में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
कान्हा नेशनल पार्क के आसपास बसे गांवों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की आशंका हमेशा बनी रहती है। लेकिन घर के पोर्च में सो रही महिला पर हमले की घटना ने ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए और वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
क्या अरोली और आसपास के गांवों में वन्यजीवों की निगरानी बढ़ाई जाएगी? क्या हमले के बाद बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के लिए ट्रैकिंग की जाएगी? आपात स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल सहायता देने की क्या व्यवस्था है? और क्या घायल महिला के परिवार को नियमानुसार उपचार सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा?
ग्रामीणों को सुरक्षा और तत्काल सहायता का इंतजार
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि कान्हा से लगे गांवों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए कितने प्रभावी इंतजाम किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीणों के जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
फिलहाल रमली बाई मरावी जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन बताई जा रही हैं। अब ग्रामीणों और परिजनों की निगाहें वन विभाग की जांच, सुरक्षा उपायों और प्रभावित परिवार को मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।
सवाल यही है कि जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों के खतरे के बीच ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कैसे सुनिश्चित होगी?
