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करोड़ों का स्टेशन, सुरक्षा रामभरोसे! मंडला फोर्ट के प्लेटफॉर्म पर दौड़ते मवेशी, यात्रियों की जान पर खतरा

करोड़ों का स्टेशन, सुरक्षा रामभरोसे! मंडला फोर्ट के प्लेटफॉर्म पर दौड़ते मवेशी, यात्रियों की जान पर खतरा

आरपीएफ की रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल—स्टेशन पर स्थाई आरपीएफ चौकी नहीं, औचक जांच के भरोसे सुरक्षा; यात्रियों ने मांगी स्थाई तैनाती

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन को आधुनिक और यात्री सुविधाओं से लैस बनाने की कवायद चल रही है। स्टेशन की नई इमारत, निर्माण कार्य और सुविधाओं को विकास की तस्वीर के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इसी बीच प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


स्टेशन परिसर में कुत्ते, गाय और भैंसों की आवाजाही यात्रियों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन रही है। हाल ही में सामने आए वीडियो में यात्रियों और बच्चों की मौजूदगी के बीच प्लेटफॉर्म पर भैंसें दौड़ती दिखाई देने का दावा किया गया है। ऐसी स्थिति में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि कोई मवेशी किसी बच्चे, महिला, बुजुर्ग या अन्य यात्री से टकरा जाए और हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

आरपीएफ की स्थाई चौकी नहीं, सुरक्षा औचक जांच के भरोसे

मामले को लेकर रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा किए गए पत्राचार के बाद सामने आए आरपीएफ के पत्र ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पत्र के अनुसार मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की कोई स्थाई पोस्ट अथवा चौकी उपलब्ध नहीं है। स्टेशन नैनपुर आरपीएफ पोस्ट के क्षेत्राधिकार में आता है और समय-समय पर औचक चेकिंग एवं विशेष ड्राइव के माध्यम से निगरानी की जाती है।

बड़ा सवाल: जिस रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने के लिए बड़ी राशि खर्च की जा रही है, वहां यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्थाई आरपीएफ व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या स्टेशन का विकास केवल भवन और सुविधाओं तक सीमित रहेगा या सुरक्षा भी प्राथमिकता बनेगी?

प्लेटफॉर्म यात्रियों के लिए या मवेशियों के लिए?

स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर मवेशियों की मौजूदगी केवल अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ट्रेन के आने-जाने के दौरान यदि कोई मवेशी अचानक प्लेटफॉर्म पर दौड़ पड़े तो यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन सकती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ऐसी स्थिति ज्यादा जोखिमपूर्ण हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्टेशन को आधुनिक बनाने के साथ रेलवे को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि यात्री सुरक्षित वातावरण में स्टेशन पहुंच सकें और बिना किसी खतरे के ट्रेन का इंतजार कर सकें।

करोड़ों के विकास के बीच सुरक्षा पर बड़ा सवाल

एक तरफ मंडला फोर्ट स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नया स्वरूप देने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं की आवाजाही और आरपीएफ की स्थाई मौजूदगी नहीं होने का मुद्दा रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।

जनता का सीधा सवाल
जब स्टेशन के निर्माण, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं पर बड़ी राशि खर्च की जा सकती है, तो यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्थाई आरपीएफ चौकी और जवानों की तैनाती क्यों नहीं की जा सकती?

आरपीएफ आउटपोस्ट और स्थाई जवानों की तैनाती की मांग

रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी सहित यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे तथा रेल मंत्रालय से मंडला फोर्ट स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। मांग है कि स्टेशन पर आरपीएफ आउटपोस्ट स्थापित कर स्थाई जवानों की तैनाती की जाए और स्टेशन परिसर तथा प्लेटफॉर्म पर मवेशियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाएं।

अब सवाल सिर्फ प्लेटफॉर्म पर मवेशियों के दौड़ने का नहीं है।
सवाल यात्रियों की सुरक्षा का है—रेलवे किसी बड़े हादसे के बाद व्यवस्था सुधारेगा या उससे पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेगा?

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