Breaking

revanchal times new

मंडला पहुंचीं आदिवासी अधिकारों की मुखर आवाज हीरा मीणा, आदिवासी महापंचायत ने किया भव्य स्वागत

मंडला | आदिवासी समाज एवं संवैधानिक अधिकार

मंडला पहुंचीं आदिवासी अधिकारों की मुखर आवाज हीरा मीणा, आदिवासी महापंचायत ने किया भव्य स्वागत

पांचवीं अनुसूची, स्थानीय स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा; गांव से संसद तक आदिवासी समाज की आवाज पहुंचाने पर जोर

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | मंडला। आदिवासी समुदाय के अधिकारों और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को विभिन्न मंचों पर उठाने वाली राजस्थान की सामाजिक कार्यकर्ता तिरुमय हीरा मीणा के प्रथम मंडला आगमन पर आदिवासी महापंचायत गढ़ा मंडला द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और समाजसेवियों ने पुष्पमालाओं एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

स्वागत कार्यक्रम के बाद सिविल लाइन स्थित रेस्ट हाउस के बैठक कक्ष में सामाजिक प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित हुई। इसमें आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति, संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन और स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

पुष्पमालाओं से हुआ अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम के दौरान तिरुमय हीरा मीणा का स्वागत तिरुमय अनीता मरावी एवं पिंकी द्वारा किया गया। डॉ. गौतम मीणा का अभिनंदन तिरु. अजीत सिंह मरावी ने किया।

इसी क्रम में धर्म परिषद के केंद्रीय सदस्य एवं प्रदेश अध्यक्ष तिरु. भुवन सिंह कुर्राम का स्वागत सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारी तिरुमय गोपाल सिंह मरावी द्वारा किया गया। इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने अतिथियों से परिचय प्राप्त किया और विभिन्न सामाजिक विषयों पर संवाद किया।

गोंडवाना के गौरवशाली इतिहास से कराया परिचित

बैठक में तिरुमय हीरा मीणा को गोंडवाना की ऐतिहासिक राजधानी गढ़ा मंडला की विरासत के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

सामाजिक प्रतिनिधियों ने महाराजा हृदय शाह, अमर शहीद राजा शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह और वीरांगना महारानी दुर्गावती के इतिहास एवं योगदान का उल्लेख किया।

इसके साथ ही पेन ठाना, राजराजेश्वरी किला, नामनगर चौगान मड़िया तथा किला महल सहित क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी साझा की गई।

चर्चा का मुख्य विषय: आदिवासी स्वशासन और संवैधानिक अधिकार

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय स्वशासन से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।

संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

बैठक में उपस्थित सामाजिक प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय की स्थिति और पांचवीं अनुसूची से संबंधित प्रावधानों के क्रियान्वयन को लेकर चिंता व्यक्त की।

वक्ताओं का कहना था कि स्वतंत्रता के कई दशक बीत जाने के बावजूद आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े अनेक प्रावधानों का अपेक्षित लाभ समुदाय तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने राज्य एवं केंद्र सरकार से इन विषयों पर प्रभावी पहल करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में यह सवाल भी उठाया गया कि आदिवासी समुदाय से निर्वाचित जनप्रतिनिधि समाज की समस्याओं को कितनी प्राथमिकता दे रहे हैं। सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र और समुदाय से जुड़े मुद्दों को विधानसभा तथा लोकसभा में प्रभावी ढंग से उठाना चाहिए।

गांव से संसद तक मुद्दे पहुंचाने का संकल्प

बैठक में गांव, ग्राम पंचायत, विकासखंड, संभाग, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समुदाय से जुड़ी समस्याओं को संगठित रूप से उठाने पर चर्चा हुई।

सामाजिक प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुदाय की समस्याओं को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय संबंधित जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

सामाजिक प्रतिनिधियों का संदेश

आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक हितों के संरक्षण के लिए गांव से राष्ट्रीय स्तर तक सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

समाज के वरिष्ठजन और पदाधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य तिरु. जयसिंह धुर्वे, कोर कमेटी सदस्य तिरु. एम.एल. कुसरे, युवा प्रभाग जिला अध्यक्ष तिरु. कमलेश तिलगाम, कोषाध्यक्ष तिरु. बाबूराम कुर्राम, सामाजिक जनप्रतिनिधि तिरु. राधेलाल नरेती, कोर कमेटी सदस्य तिरु. के.एस. मरावी तथा सामाजिक कार्यकर्ता तिरु. राजेंद्र झारिया सहित आदिवासी महापंचायत गढ़ा मंडला के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

सभी ने आदिवासी समाज की समस्याओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को गांव से संसद तक पहुंचाने के प्रयासों को समर्थन दिया।

ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन के लिए हुईं रवाना

बैठक के समापन के बाद तिरुमय हीरा मीणा नामनगर चौगान मड़िया तथा किला महल के दर्शन के लिए रवाना हुईं। उनके मंडला आगमन को आदिवासी महापंचायत के पदाधिकारियों ने सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

आदिवासी एकता और अधिकारों की आवाज

मंडला में आयोजित स्वागत और संवाद कार्यक्रम में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और गोंडवाना की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को प्रमुखता दी गई।

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | जनहित की खबर, जनता की आवाज

Post a Comment

Previous Post Next Post
revanchal times new