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मंडला: धौरगांव में जॉब कार्ड से जुड़े भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, जनसुनवाई में जांच की मांग

दैनिक रेवाँचल टाईम्स

मंडला: धौरगांव में जॉब कार्ड से जुड़े भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, जनसुनवाई में जांच की मांग

मंडला। जनपद पंचायत मंडला की ग्राम पंचायत धौरगांव में ग्रामीणों के जॉब कार्ड में कथित रूप से अपने बैंक खाते जोड़कर सरकारी योजनाओं की राशि प्राप्त करने की शिकायत सामने आई है। ग्राम निवासी लक्ष्मण सिंगौर ने मंडला की जनसुनवाई में आवेदन देकर सरपंच मीरा बाई सिंगौर, उनके पुत्र एवं रोजगार सहायक पवन सिंगौर तथा पंचायत सचिव जगदीश बंजारा की भूमिका की जांच और जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

मंडला: धौरगांव में जॉब कार्ड से जुड़े भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, जनसुनवाई में जांच की मांग

शिकायतकर्ता का दावा है कि आवेदन के साथ जॉब कार्ड और स्टेट बैंक की छायाप्रतियां प्रस्तुत की गई हैं। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इनका सत्यापन संबंधित अभिलेखों, बैंक भुगतान विवरण और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर ही हो सकेगा।

सरपंच और रोजगार सहायक पर क्या हैं आरोप?

शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत धौरगांव में मीरा बाई सिंगौर सरपंच हैं और उनके पुत्र पवन सिंगौर रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत हैं। लक्ष्मण सिंगौर ने आरोप लगाया है कि दोनों ने अपने पदों का दुरुपयोग कर ग्रामीणों के नाम से दर्ज जॉब कार्ड में अपने बैंक खाते जुड़वाए और विभिन्न सरकारी योजनाओं व कार्यों से संबंधित राशि प्राप्त की।

शांता बाई के जॉब कार्ड से जुड़े भुगतान की शिकायत

आवेदन में ग्राम की शांता बाई, पति बच्चू, के नाम से जुड़े जॉब कार्ड का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रोजगार सहायक पवन सिंगौर ने कथित तौर पर इस जॉब कार्ड में अपना बैंक खाता दर्ज कराया और प्रधानमंत्री आवास, नवीन पुलिया सहित अन्य कार्यों से संबंधित राशि अपने खाते में प्राप्त की।

इस आरोप की पुष्टि के लिए जॉब कार्ड में दर्ज बैंक खाते, संबंधित योजना और कार्य के भुगतान अभिलेखों तथा वास्तविक हितग्राही को मिली राशि का मिलान आवश्यक है। फिलहाल शिकायत में बताए गए भुगतान का स्वतंत्र सत्यापन होना बाकी है।

गीता बाई के नाम पर सरपंच के खाते में राशि जाने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्राम की गीता बाई के नाम के जॉब कार्ड में कथित तौर पर सरपंच मीरा बाई सिंगौर का बैंक खाता दर्ज कराया गया। आवेदन के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास, खेल मैदान, सीसी सड़क, मेढ़ बंधान तथा कैटल शेड सहित विभिन्न कार्यों से संबंधित राशि सरपंच के खाते में प्राप्त की गई।

लक्ष्मण सिंगौर का कहना है कि इस संबंध में जॉब कार्ड और बैंक की छायाप्रति भी आवेदन के साथ संलग्न की गई है। संबंधित खातों में कितनी राशि जमा हुई, भुगतान किन कार्यों के लिए हुआ और वास्तविक हितग्राहियों को कितना लाभ मिला, यह जांच से स्पष्ट होना बाकी है।

पंचायत सचिव की भूमिका की भी जांच की मांग

आवेदन में पंचायत सचिव जगदीश बंजारा पर भी कथित मिलीभगत और सहयोग का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि सचिव ने संबंधित व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित अनियमितताओं में सहयोग किया। भुगतान अभिलेख तैयार करने, उनका सत्यापन करने, स्वीकृति देने और बैंक खाते की जानकारी दर्ज करने में किसकी क्या भूमिका थी, इसकी जांच की मांग उठाई गई है।

पहले भी शिकायत करने का दावा

लक्ष्मण सिंगौर का आरोप है कि मामले में पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की है।

आरोपों की पड़ताल में जॉब कार्ड, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान सूची, बैंक खातों में जमा राशि का विवरण, आवास योजना के अभिलेख, निर्माण कार्यों के स्वीकृति आदेश और बिल-वाउचर जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित हितग्राहियों के बयान और कार्यों के स्थल सत्यापन से भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

आरोपों की पुष्टि बाकी: फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है। सरपंच मीरा बाई सिंगौर, रोजगार सहायक पवन सिंगौर और पंचायत सचिव जगदीश बंजारा का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। आधिकारिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बिना किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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