मध्य प्रदेश में सर्वर की समस्या से अटकी स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री, प्रदेश स्तर पर तकनीकी समीक्षा की जरूरत
भोपाल, दैनिक रेवाँचल टाईम्स। मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि से संबंधित रजिस्ट्री के आवेदन और अनुमोदन की प्रक्रिया सर्वर की तकनीकी समस्या से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, दिन में सर्वर ठीक से काम नहीं करने के कारण हितग्राहियों को परेशानी हो रही है। वहीं, गांवों में मौजूद रहकर काम कर रहे पटवारियों से रोजाना प्रगति का हिसाब लिया जा रहा है।

योजना के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया को गति देने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित कर मैदानी अमले को कार्य सौंपा गया है। लेकिन सर्वर की समस्या के कारण आवेदन दर्ज करने और उनके अनुमोदन में बाधा आ रही है, जिससे अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है।
दिन में सर्वर की समस्या, रात में काम की मजबूरी
रजिस्ट्री के आवेदन से लेकर अनुमोदन तक की प्रक्रिया ऑनलाइन है। ऐसे में सर्वर का सुचारु रूप से चलना जरूरी है। दिन में सर्वर ठीक से काम नहीं करने पर आवेदन समय पर दर्ज नहीं हो पाते और अनुमोदन भी प्रभावित होता है। सूत्रों के अनुसार, रात में सर्वर अपेक्षाकृत बेहतर चलने पर पटवारी देर रात तक काम करने का प्रयास करते हैं।
पटवारी अपने हलकों में हितग्राहियों से संपर्क करने, आवश्यक जानकारी जुटाने और रजिस्ट्री संबंधी कार्य पूरे कराने में जुटे हैं। इसके बावजूद तकनीकी बाधाओं के कारण उनकी मेहनत पोर्टल पर अपेक्षित प्रगति के रूप में दर्ज नहीं हो पा रही है।
देर रात हितग्राहियों की उपलब्धता भी चुनौती
गांवों में कुछ हितग्राही दिन के समय घर पर उपलब्ध रहते हैं, जबकि अनेक लोग खेती-किसानी, मजदूरी, रोजगार और अन्य जरूरी कामों में व्यस्त रहते हैं। दिन में सर्वर नहीं चलने और रात में काम की स्थिति बनने पर सभी हितग्राहियों को उपलब्ध करा पाना व्यावहारिक रूप से कठिन होता है।
दिनभर काम करने वाले ग्रामीणों को रात में आराम की जरूरत होती है। रात 10–11 बजे के बाद अधिकांश लोग सोने की तैयारी करते हैं। ऐसे में देर रात उन्हें बुलाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने की अपेक्षा से कठिनाइयां बढ़ती हैं।
प्रगति के साथ तकनीकी बाधाओं का आकलन जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, शाम के समय प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से संदेशों और बैठकों के माध्यम से पटवारियों के काम की प्रगति की समीक्षा की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आवेदन और अनुमोदन की प्रक्रिया सर्वर के कारण बाधित हो, तो केवल दर्ज प्रगति के आधार पर मैदानी कर्मचारियों की कार्यक्षमता का आकलन कितना उचित है। तकनीकी बाधाओं के बीच अनावश्यक दबाव से पटवारियों पर मानसिक तनाव बढ़ने की बात भी सामने आई है।
प्रदेश स्तर पर सर्वर की समीक्षा की जरूरत
इन परिस्थितियों में सर्वर की उपलब्धता, गति, लॉगिन संबंधी समस्याओं तथा आवेदन और अनुमोदन में आने वाली तकनीकी बाधाओं की प्रदेश स्तर पर समीक्षा जरूरी है। संबंधित तकनीकी एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ सर्वर बंद रहने की अवधि का रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता है, ताकि प्रभावित कार्यों का वास्तविक आकलन हो सके।
स्वामित्व योजना की प्रगति बढ़ाने के लिए लक्ष्य और दैनिक समीक्षा के साथ मजबूत तकनीकी व्यवस्था भी जरूरी है। सर्वर नियमित और पर्याप्त गति से चले तो लंबित आवेदन तथा अनुमोदन कम समय में पूरे किए जा सकते हैं। समीक्षा का केंद्र मैदानी अमले की प्रगति के साथ उन तकनीकी कारणों को भी बनाया जाना चाहिए, जिनसे काम बाधित हो रहा है।