बच्चों का खेल मैदान छीनकर कैसी विकास की सौगात?
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – जबलपुर। शहर में विकास की एक और सौगात का प्रचार किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि सामुदायिक भवन के निर्माण को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं। भूमिपूजन किया जा रहा है और गरीब तथा मध्यमवर्गीय परिवारों को सामाजिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। लेकिन इन तमाम दावों के बीच ठक्कर ग्राम वार्ड स्थित किलकारी गार्डन में प्रस्तावित सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर स्थानीय निवासियों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, जहां बच्चे खेलते और अपना समय बिताते थे, अब उसी सार्वजनिक स्थान पर नया भवन बनाने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि मैदान का हिस्सा निर्माण की जद में आ गया तो बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित खुली जगह कहां बचेगी?
निवासियों की चिंता केवल नए भवन के निर्माण को लेकर नहीं, बल्कि पहले से उपलब्ध सार्वजनिक सुविधाओं के संरक्षण, निर्माण की वास्तविक आवश्यकता और परियोजना से जुड़े निर्णयों में स्थानीय लोगों की भागीदारी को लेकर भी है।
स्थानीय निवासियों का सवाल है कि जब यहां पहले से सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भवन उपलब्ध है, तो नया निर्माण करने से पहले बच्चों के खेल मैदान को सुरक्षित रखने की योजना सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
क्षेत्र का प्रमुख खेल मैदान भी निर्माण की भेंट चढ़ जाएगा?
किलकारी गार्डन के स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में बच्चों के खेलने के लिए यही एक प्रमुख मैदान बचा हुआ है। इसी स्थान पर बच्चे खेलकूद करते हैं और आसपास के परिवारों को खुली जगह उपलब्ध होती है।
अब यहां सामुदायिक भवन के निर्माण की योजना सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। उनका सवाल है कि जिस स्थान का उपयोग वर्षों से बच्चों के खेलकूद के लिए होता रहा है, वहां निर्माण होने से मैदान कितना प्रभावित होगा?
यदि प्रस्तावित भवन के कारण बच्चों को खेलने की जगह छोड़नी पड़ती है, तो उनके लिए वैकल्पिक मैदान कहां उपलब्ध कराया जाएगा? नागरिकों का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना में बच्चों की आवश्यकताओं और उनके सुरक्षित बचपन को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पहले से भवन मौजूद, फिर उसे तोड़कर नया निर्माण क्यों?
स्थानीय निवासियों के अनुसार किलकारी गार्डन परिसर में पहले से एक भवन बना हुआ है, जिसका उपयोग शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए होता रहा है।
लोगों का दावा है कि अब इसी पुराने भवन को तोड़कर नए सामुदायिक भवन का निर्माण करने की तैयारी है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि वर्तमान भवन में पहले से सामाजिक आयोजन होते रहे हैं, तो उसे हटाने की वास्तविक आवश्यकता क्या है?
क्या पुराने भवन की तकनीकी स्थिति का परीक्षण कराया गया है? क्या उसकी मरम्मत, जीर्णोद्धार अथवा विस्तार कर जरूरतों को पूरा किया जा सकता है? क्या नए निर्माण से पहले स्थानीय नागरिकों की राय ली गई?
इन प्रश्नों के उत्तर निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी रिपोर्ट, परियोजना के नक्शे और संबंधित विभाग के अभिलेख सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
चार साल के कार्यकाल के बाद अंतिम वर्ष में विकास की याद?
सामुदायिक भवन के निर्माण को लेकर क्षेत्रीय पार्षद के कामकाज पर भी स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं।
कुछ निवासियों का आरोप है कि पार्षद अपने कार्यकाल के लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्य नहीं करा पाए। अब कार्यकाल का अंतिम वर्ष शेष रहने पर सामुदायिक भवन निर्माण को प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
हालांकि पार्षद के कार्यकाल में स्वीकृत, पूर्ण एवं लंबित विकास कार्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए वार्ड के विकास कार्यों, बजट आवंटन और खर्च संबंधी अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।
स्थानीय नागरिक सवाल पूछ रहे हैं कि वार्ड में विकास की प्राथमिकता किस आधार पर निर्धारित की जा रही है और क्या बच्चों के खेल मैदान का संरक्षण इन प्राथमिकताओं में शामिल है?
कब्रिस्तान में बनी पानी की टंकी का श्रेय किसे?
क्षेत्र में सार्वजनिक विकास कार्यों के श्रेय को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार क्षेत्रीय पार्षद अक्सर यह बताते हैं कि कब्रिस्तान में बनी पानी की टंकी उनके सहयोग से स्थापित हुई थी।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि एक अन्य पार्षद भी इसी पानी की टंकी के निर्माण में अपने योगदान का दावा करते हैं।
किसी सार्वजनिक निर्माण कार्य में एक से अधिक जनप्रतिनिधियों का सहयोग संभव है। ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह जानकारी सामने आनी चाहिए कि पानी की टंकी किस योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुई, किस मद से राशि उपलब्ध कराई गई और संबंधित जनप्रतिनिधियों की भूमिका क्या रही।
नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण में व्यक्तिगत श्रेय से अधिक महत्वपूर्ण निर्माण की उपयोगिता, गुणवत्ता और शासकीय धन के खर्च की पारदर्शिता है।
मुस्लिम शाह समाज ने भूमिपूजन में उपेक्षा का लगाया आरोप
सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद के बीच मुस्लिम शाह समाज बिरादरी ने भी नाराजगी व्यक्त की है। संगठन ने विधायक लखन घनघोरिया और क्षेत्रीय पार्षद के राजनीतिक दल पर समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
संगठन के जिला अध्यक्ष हसन शाह द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार ठक्कर ग्राम वार्ड स्थित किलकारी गार्डन में सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम शाह समाज को नजरअंदाज किया गया।
संगठन का दावा है कि पूर्व में विधायक लखन घनघोरिया के कैबिनेट मंत्री रहने के दौरान शाह समाज के प्रतिनिधिमंडल को भोपाल बुलाकर सामुदायिक भवन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह अब तक पूरा नहीं हो सका।
शाह समाज ने इन मुद्दों को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए 29 नवंबर 2026 को जबलपुर में प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित करने की घोषणा की है।
हालांकि संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों और पूर्व में दिए गए कथित आश्वासन की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। संबंधित जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
70 से 80 लाख के निर्माण पर जनता को चाहिए पारदर्शिता
किलकारी गार्डन में प्रस्तावित सामुदायिक भवन की अनुमानित लागत लगभग 70 से 80 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रारंभिक निर्माण कार्य 40 लाख रुपये की राशि से शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि परियोजना की अंतिम स्वीकृत राशि और वित्तीय विवरण का आधिकारिक सत्यापन होना बाकी है।
बताया जा रहा है कि इस भवन का उद्देश्य गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को विवाह तथा अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए कम खर्च में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इस उद्देश्य की उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन स्थानीय नागरिक यह जानना चाहते हैं कि निर्माण स्थल का चयन किस आधार पर किया गया और पहले से मौजूद भवन के बजाय नए निर्माण को प्राथमिकता क्यों दी गई।
यदि सार्वजनिक धन से नया भवन बनाया जा रहा है, तो नागरिकों को परियोजना की स्वीकृति, लागत, तकनीकी आवश्यकता और निर्माण के बाद उपलब्ध होने वाली सुविधाओं की जानकारी मिलनी चाहिए।
खेल मैदान : निर्माण के बाद बच्चों के खेलने के लिए कितनी जगह सुरक्षित रहेगी?
पुराना भवन : क्या मौजूदा भवन की तकनीकी जांच हुई और उसका जीर्णोद्धार संभव है?
परियोजना की लागत : स्वीकृत बजट, निर्माण मद और भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है?
वैकल्पिक स्थान : क्या अन्य स्थान पर नया सामुदायिक भवन बनाया जा सकता है?
जनभागीदारी : निर्माण योजना तय करने से पहले स्थानीय नागरिकों से चर्चा की गई थी?
विकास का लेखा-जोखा : वार्ड में पिछले चार वर्षों में कितने कार्य स्वीकृत और पूर्ण हुए?
भवन तो बन जाएगा, लेकिन बच्चों का बचपन कहां जाएगा?
किसी शहर या बस्ती में बच्चों के खेलने के लिए खुली जगह केवल खाली जमीन नहीं होती। वह बच्चों के शारीरिक विकास, सामाजिक मेलजोल और खेलकूद की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
यदि स्थानीय निवासियों की यह आशंका सही है कि किलकारी गार्डन में नया निर्माण होने से क्षेत्र का प्रमुख खेल मैदान प्रभावित होगा, तो प्रशासन को इस पहलू का गंभीरता से परीक्षण करना चाहिए।
क्या बच्चों के लिए मैदान सुरक्षित रखते हुए सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा सकता है? क्या किसी वैकल्पिक स्थान पर निर्माण संभव है? क्या पुराने भवन को बेहतर बनाकर कम खर्च में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं?
इन सभी सवालों पर नगर निगम, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के बीच खुला संवाद जरूरी है। विकास की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पहले से मौजूद सार्वजनिक सुविधाओं का भी संरक्षण हो।
आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी
फिलहाल प्रस्तावित निर्माण से खेल मैदान के प्रभावित होने, पुराने भवन को तोड़ने की योजना, पार्षद के कार्यकाल संबंधी आरोपों और पानी की टंकी के निर्माण में योगदान के अलग-अलग दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि शेष है।
विधायक लखन घनघोरिया, संबंधित पार्षद और नगर निगम का आधिकारिक पक्ष तथा परियोजना के स्वीकृत दस्तावेज सामने आने के बाद वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
किलकारी गार्डन में सामुदायिक भवन निर्माण के प्रस्ताव ने विकास की प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। सामाजिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर भवन बनाना उपयोगी हो सकता है, लेकिन यदि इसके कारण बच्चों की खुली जगह कम होती है, तो निर्माण योजना पर पुनर्विचार की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
जनता को केवल भवन निर्माण की घोषणा नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य, आवश्यकता, लागत और सार्वजनिक सुविधाओं के संरक्षण की स्पष्ट जानकारी चाहिए। सवाल यही है कि क्या विकास के नाम पर बच्चों के खेल मैदान को प्रभावित किए बिना बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का विकल्प तलाशा जाएगा?
स्थानीय संपादक
