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वादों की फाइलें खोलो, नहीं तो सड़कों पर उतरेंगे गुरुजी!


डिंडोरी में अतिथि शिक्षकों का शासन के खिलाफ मोर्चा, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

दैनिक रेवांचल टाइम्स, डिंडोरी। मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले अतिथि शिक्षक अब सरकार के आश्वासनों और घोषणाओं से आजिज आ चुके हैं। वर्षों से अल्प मानदेय पर सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। डिंडोरी में आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ ने शासन की कथित वादाखिलाफी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की दो-टूक चेतावनी दी।




संघ ने साफ शब्दों में कहा कि 2 सितंबर 2023 को की गई घोषणाओं को अब तक आदेश का रूप नहीं दिया गया तो अतिथि शिक्षक सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। संघ का कहना है कि वर्षों से सरकार के भरोसे अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों को हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन जब अधिकार देने की बारी आती है तो घोषणाएं फाइलों में दब जाती हैं।

घोषणाएं बड़ी-बड़ी, लेकिन अतिथि शिक्षक आज भी बदहाल

संघ ने शासन के सामने प्रमुख रूप से अतिथि शिक्षकों के स्थायीकरण, मानदेय को तत्काल दोगुना करने और लंबे समय से लंबित सीएल (CL) आदेश जारी करने की मांग रखी है।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद अतिथि शिक्षकों को न तो स्थायित्व मिला और न ही ऐसा मानदेय जिससे वे अपने परिवार का सम्मानजनक तरीके से भरण-पोषण कर सकें। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो शिक्षक वर्षों से बच्चों का भविष्य बना रहे हैं, उनके अपने भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

सात विकासखंडों में मानदेय के लिए भटक रहे शिक्षक!

अतिथि शिक्षक संघ ने डिंडोरी जिले के सातों विकासखंडों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि पर्याप्त आवंटन होने के बावजूद अतिथि शिक्षकों को समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई बार महीनों तक भुगतान के लिए शिक्षकों को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

अल्प मानदेय पर काम करने वाले शिक्षकों के सामने जब समय पर भुगतान नहीं होता तो परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है। संघ ने कहा कि जिस शिक्षक के हाथ में बच्चों का भविष्य है, वही अपने परिवार के भविष्य को लेकर परेशान है—इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी?

अब आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए

संघ पदाधिकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अतिथि शिक्षकों को हर महीने के प्रथम सप्ताह में अनिवार्य रूप से मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ 2 सितंबर 2023 की घोषणाओं के आदेश तत्काल जारी करने की मांग की गई है।

जिला अध्यक्ष इमरान मलिक, उपाध्यक्ष जगमोहन तिवारी, सचिव हारिश खान, कार्यकारी प्रभारी आनंद कटारिया एवं मीडिया प्रभारी वीरेन्द्र गर्ग सहित अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

‘अब आर-पार की लड़ाई’

संघ ने दो टूक कहा कि अतिथि शिक्षक अब अपने अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। यदि लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक आंदोलन किया जाएगा।


अब देखना यह है कि सरकार के लिए अतिथि शिक्षक सिर्फ चुनावी मंचों पर किए जाने वाले वादों का हिस्सा हैं या वास्तव में उनके अधिकारों पर भी कोई ठोस फैसला होगा? फिलहाल डिंडोरी में अतिथि शिक्षकों का गुस्सा साफ संकेत दे रहा है कि सब्र की सीमा टूट चुकी है और अगला कदम आंदोलन का हो सकता है।

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