Breaking

revanchal times new

299 दिन निलंबन के बाद प्रधान आरक्षक रोहन मरावी बर्खास्त, आचरण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी



 आचरण नियम की अनदेखी पड़ी भारी—वर्दी उतरी, नौकरी गई!”

299 दिन निलंबन के बाद प्रधान आरक्षक रोहन मरावी बर्खास्त

एक नियम टूटा तो बर्खास्तगी, बाकी मामलों में जांच कब होगी?



पहली पत्नी रहते दूसरी महिला के साथ संबंध का मामला बना गंभीर कदाचार, प्रधान आरक्षक रोहन मरावी पर गिरी गाज अब सवाल, पुलिस महकमे में आचरण नियम क्या सभी पर बराबर लागू होंगे?


दैनिक रेवांचल टाईम्स | डिंडोरीपुलिस की वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि कठोर अनुशासन और आचरण की जिम्मेदारी भी मांगती है। डिंडोरी पुलिस विभाग के एक मामले में आचरण नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए कार्यवाहक प्रधान आरक्षक प्र0आर0-244 रोहन सिंह मरावी को आखिरकार शासकीय सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। विभागीय जांच के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडोरी ने उनके विरुद्ध बर्खास्तगी का दंडादेश जारी किया है।

मामला पहली पत्नी के रहते दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी जैसा संबंध रखने और उससे संतान होने से जुड़ा है। विभागीय जांच में उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर आरोपों को गंभीर कदाचार माना गया। हालांकि जांच आदेश में दूसरी महिला से विधिवत दूसरी शादी का स्पष्ट दस्तावेज नहीं मिलने का भी उल्लेख है, लेकिन पहली पत्नी से विधिवत तलाक के बिना दूसरी महिला के साथ वैवाहिक जीवन जैसा संबंध और संतान होने के तथ्य विभाग के लिए कार्रवाई का आधार बने।

एक नियम पर इतनी सख्ती तो बाकी पर कब?

रोहन मरावी पर विभाग ने नियमों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए कार्रवाई कर दी। सवाल यहीं से खड़ा होता है—क्या पुलिस विभाग में आचरण नियमों की तलवार सभी कर्मचारियों पर समान रूप से चलेगी?

यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध आचरण नियमों के उल्लंघन, अनुशासनहीनता अथवा विभागीय मर्यादा को ठेस पहुंचाने के आरोपों की जांच चल रही है, तो उन मामलों का भी निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा कब होगा? जनता की नजर अब केवल एक बर्खास्तगी पर नहीं, बल्कि विभागीय कार्रवाई की समानता और पारदर्शिता पर भी है।

299 दिन निलंबन के बाद आया अंतिम फैसला दस्तावेजों के अनुसार रोहन मरावी को 27 मार्च 2025 से 10 नवंबर 2025 तक 299 दिनों के लिए निलंबित रखा गया। विभागीय जांच में परिवार आईडी, आधार एवं बच्चों से संबंधित दस्तावेजों तथा गवाहों के कथनों को जांच का आधार बनाया गया। पहली पत्नी सावित्री बाई को न्यायालय से भरण-पोषण राशि मिलने का उल्लेख भी विभागीय रिकॉर्ड में है।

जांच के बाद विभाग ने माना कि पहली पत्नी के रहते दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी जैसा संबंध रखना पुलिस कर्मचारी के आचरण के अनुरूप नहीं है और इससे विभाग की छवि प्रभावित हुई।

पुलिस में नियम किताबों के लिए या कार्रवाई के लिए?

यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश जरूर देती है—वर्दी पहनने वाले कर्मचारी के निजी आचरण का असर जब शासकीय सेवा की मर्यादा और विभाग की प्रतिष्ठा पर पड़ता है, तो विभाग कार्रवाई कर सकता है। लेकिन अब असली कसौटी यही होगी कि क्या यही सख्ती हर उस मामले में दिखाई जाएगी, जहां पुलिस कर्मचारियों पर गंभीर आचरण या अनुशासन संबंधी आरोप लगे हैं और जांच लंबित है?

     लोगो का सवाल सीधा है—नियम अगर एक है तो कार्रवाई भी एक जैसी होनी चाहिए। एक पर गाज गिराकर बाकी मामलों की फाइलें धूल खाती रहीं तो फिर सवाल बर्खास्त कर्मचारी से ज्यादा उस व्यवस्था पर उठेंगे, जो नियमों को व्यक्ति देखकर लागू करती दिखाई दे। एक पर कार्रवाई हुई है, अब निगाह बाकी लंबित जांचों के परिणाम पर है।

Post a Comment

Previous Post Next Post