स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री कैंप की तैयारी, लेकिन नाम और हिस्से की विसंगतियां बनीं बड़ी चुनौती
दैनिक रेवांचल टाईम्स - भोपाल। स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि में निर्मित प्लाटों के भूमिस्वामियों के नाम दर्ज किए जाने के बाद अब इन प्लाटों की रजिस्ट्री कराने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री के लिए तीन चरणों में शिविर आयोजित किए जाएंगे।
📅 तीन चरणों में आयोजित होंगे रजिस्ट्री शिविर
लक्ष्य है कि इन चरणों में सभी ग्राम पंचायतों को कवर किया जाए।
निर्देशों के अनुसार प्रत्येक दिन लगभग 30 से 40 भूमिधारियों को पूर्व सूचना देकर शिविर में बुलाया जाना है।
शिविरों के लिए जोनल अधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही उप पंजीयक के रूप में आरआई, नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एडीईओ एवं पीसीओ स्तर के अधिकारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया भी की जानी है।
संबंधित अधिकारियों की क्लास-3 डीएससी की प्रक्रिया दो दिवस में पूर्ण कराने तथा शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर जनप्रतिनिधियों को भी इससे जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
रिकॉर्ड की शुद्धता को लेकर उठे गंभीर सवाल
हालांकि, स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री शिविर आयोजित करने से पहले रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
योजना के अंतर्गत आबादी भूमि में बने प्लाटों को स्वामित्व के आधार पर संबंधित भूमिधारियों के नाम दर्ज किया गया है, लेकिन कई मामलों में दर्ज नाम और आधार कार्ड में दर्ज नाम के बीच विसंगति सामने आने की संभावना है।
इसका प्रमुख कारण यह बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने के दौरान समग्र आईडी में दर्ज नाम को आधार बनाया गया है, जबकि कई लोगों के आधार कार्ड में नाम की वर्तनी, नाम का क्रम अथवा अन्य विवरण अलग हैं।
समग्र, आधार और प्लाट की KYC बनी बड़ी चुनौती
रजिस्ट्री की प्रक्रिया में संबंधित हितग्राही की समग्र KYC, आधार KYC और प्लाट KYC जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं।
यदि समग्र आईडी और आधार कार्ड में नाम अलग-अलग है, तो रजिस्ट्री प्रक्रिया में तकनीकी समस्या उत्पन्न हो सकती है। नाम में मामूली अंतर होने पर भी रजिस्ट्री स्वीकार नहीं होने की स्थिति बन सकती है।
इसी प्रकार कुछ मामलों में प्लाट के हिस्से अथवा स्वामित्व संबंधी विवरण में भी विसंगति सामने आने की संभावना है। यदि रिकॉर्ड में दर्ज नाम, हिस्सा या अन्य विवरण सही नहीं है तो रजिस्ट्री कराने के दौरान संबंधित भूमिधारी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
धारा 113 के तहत पहले होना चाहिए रिकॉर्ड सुधार
जानकारों के अनुसार जहां स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में नाम, हिस्सा अथवा अन्य विवरण में वास्तविक त्रुटि है, वहां रजिस्ट्री कराने से पहले रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जाना आवश्यक है।
ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष द्वारा आवेदन अथवा प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद नियमानुसार धारा 113 के अंतर्गत संशोधन अथवा सुधार की कार्रवाई कराकर सक्षम न्यायालय के आदेश के पश्चात रिकॉर्ड को अपडेट किया जाना चाहिए।
जब बड़ी संख्या में स्वामित्व प्लाटों के रिकॉर्ड में नाम एवं हिस्से की संभावित विसंगतियों की पहचान पहले से नहीं की गई है, तो सीधे रजिस्ट्री शिविर आयोजित करने से प्रक्रिया किस प्रकार सुचारू रूप से पूरी होगी?
पहले रिकॉर्ड की जांच, फिर रजिस्ट्री की प्रक्रिया की मांग
फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि रजिस्ट्री कैंप लगाने से पहले प्रत्येक स्वामित्व प्लाट के खसरे और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जानी चाहिए।
- भूमिधारी का नाम
- आधार कार्ड का विवरण
- समग्र आईडी
- प्लाट का हिस्सा
- खसरा विवरण
- स्वामित्व संबंधी अन्य रिकॉर्ड
जांच के दौरान ऐसे प्लाटों को अलग से चिन्हित किया जाना चाहिए, जिनमें नाम, आधार-समग्र विवरण, हिस्से अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी विसंगति है।
इसके बाद संबंधित भूमिधारियों से आवेदन या प्रतिवेदन प्राप्त कर आवश्यक सुधार की प्रक्रिया पूरी कराई जाए तथा सक्षम न्यायालय के आदेश के बाद रिकॉर्ड अपडेट किया जाए। जिन प्लाटों का रिकॉर्ड पूरी तरह सही है, केवल उन्हीं मामलों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
जल्दबाजी से नई समस्या पैदा होने की आशंका
फील्ड कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि रिकॉर्ड की कमियों को दूर किए बिना निर्धारित समय सीमा में बड़ी संख्या में भूमिधारियों को शिविर में बुलाया गया और रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया, तो वास्तविक कार्यवाही के दौरान बड़ी संख्या में मामले अटक सकते हैं।
बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
रिकॉर्ड सुधार और रजिस्ट्री दोनों काम एक साथ बढ़ सकते हैं।
नाम, हिस्से और KYC की विसंगतियों से केस अटक सकते हैं।
नाम, हिस्से और केवाईसी संबंधी विसंगतियों का समाधान किए बिना रजिस्ट्री का लक्ष्य पूरा करने का दबाव कर्मचारियों के लिए मानसिक एवं शारीरिक परेशानी का कारण बन सकता है।
उपलब्धि दिखाने की जल्दबाजी से बचने की जरूरत
स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी को उनके आवासीय भूखंड पर वैधानिक स्वामित्व का अधिकार दिलाने की महत्वपूर्ण योजना है।
यदि रिकॉर्ड में त्रुटि रहते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो वर्तमान समस्या का समाधान होने के बजाय भविष्य में नामांतरण, बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक ऋण अथवा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के दौरान नई विवादित स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
कर्मचारियों ने उठाई व्यावहारिक प्रक्रिया अपनाने की मांग
फील्ड स्तर के कर्मचारियों का मानना है कि रजिस्ट्री शिविर को सफल बनाने के लिए पहले चरण में स्वामित्व प्लाटों के रिकॉर्ड का प्री-स्क्रीनिंग ऑडिट कराया जाना चाहिए।
- नाम का मिलान
- आधार कार्ड का मिलान
- समग्र आईडी का मिलान
- हिस्से का सत्यापन
- खसरा रिकॉर्ड
- प्लाट विवरण
विसंगति वाले प्रकरणों को अलग कर उनका विधिवत निराकरण कराया जाए और इसके बाद ही रजिस्ट्री के लिए पात्र प्लाटों की सूची तैयार की जाए।
यदि ऐसा किया जाता है तो रजिस्ट्री शिविर में आने वाले भूमिधारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा और कर्मचारियों पर भी अंतिम समय में रिकॉर्ड सुधार तथा रजिस्ट्री दोनों का एक साथ दबाव नहीं आएगा।
तैयार रजिस्ट्रियों का तत्काल वितरण भी नहीं
निर्देशों के अनुसार तैयार की गई रजिस्ट्रियों का वितरण भी तत्काल नहीं किया जाना है।
अब प्रशासन के सामने बड़ा फैसला
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन रजिस्ट्री शिविर के निर्धारित लक्ष्य को प्राथमिकता देता है या उससे पहले स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित कर संभावित विवादों का स्थायी समाधान करता है।
