गोल्डन चिकन को लेकर फिर गरमाया विवाद: बदबू, गंदगी और कथित अतिक्रमण से रहवासी परेशान
जबलपुर। बड़ी ओमती के नया मोहल्ला क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे गोल्डन चिकन सेंटर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि मुर्गियों के रखरखाव, कटिंग और उससे निकलने वाले अपशिष्ट के कारण क्षेत्र में बदबू और गंदगी फैल रही है। रहवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की मांग की है।
प्लॉट नंबर 877 के पास कारोबार संचालन का आरोप
रहवासियों द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्लॉट नंबर 877 के नजदीक, नया मोहल्ला, बड़ी ओमती क्षेत्र में गोल्डन मुर्गी फार्म के नाम से कारोबार संचालित किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यहां बड़ी संख्या में मुर्गियां लाई जाती हैं और उनसे निकलने वाली बीट एवं अन्य अपशिष्ट के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से आसपास गंदगी फैल रही है।
100 से 200 मीटर तक बदबू फैलने का दावा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुर्गियों के अपशिष्ट के कारण लगभग 100 से 200 मीटर के दायरे तक दुर्गंध फैलने की स्थिति बनी रहती है। रहवासियों ने कीड़े-मकौड़े और मच्छरों के बढ़ने की शिकायत भी की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार दुर्गंध और गंदगी से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की आशंका बनी हुई है।
सड़क पर खड़े वाहनों से आवागमन प्रभावित होने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुर्गियों से भरी बड़ी गाड़ियां सड़क पर खड़ी की जाती हैं और इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। रहवासियों ने सड़क और नाली में कथित गंदे पानी एवं अपशिष्ट बहने की भी शिकायत की है।
स्कूल, मदरसा और होटल के आसपास कारोबार, बच्चों की सेहत पर चिंता
मामला इसलिए भी संवेदनशील बताया जा रहा है क्योंकि शिकायत के अनुसार संबंधित स्थान के आसपास लॉज, खाने-पीने की होटल, स्कूल और मदरसा भी संचालित हैं।
रहवासियों ने सवाल उठाया है कि आबादी वाले क्षेत्र में इस प्रकार के कारोबार के संचालन के दौरान स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अपशिष्ट निपटान के निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
रहवासियों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर मुर्गियों की स्थिति, साफ-सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और कारोबार की परिस्थितियों की जांच करें।
संभावित संक्रमण को लेकर भी जताई चिंता
रहवासियों ने पक्षियों से जुड़ी बीमारियों और संभावित संक्रमण को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि किसी बीमारी या संक्रमण की मौजूदगी की पुष्टि केवल सक्षम स्वास्थ्य अथवा पशु चिकित्सा विभाग की जांच से ही हो सकती है।
इसी कारण स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन पूरे मामले का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट करे।
मृत मुर्गियों को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
गोल्डन चिकन से जुड़ा यह पहला विवाद नहीं है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी और मृत मुर्गियों से संबंधित गंभीर आरोप लगाए थे।
मृत मुर्गियों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासनिक जांच के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल—किस पर?
रहवासियों के मुताबिक शिकायत के बाद नगर निगम की टीम क्षेत्र में पहुंची और सड़क किनारे लगे छोटे ठेलों एवं कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई की गई।
अब स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि कार्रवाई का उद्देश्य सार्वजनिक सड़क और अतिक्रमण को व्यवस्थित करना था, तो फिर मुर्गियों के वाहनों, कथित गंदे पानी, अपशिष्ट और मूल शिकायत में उठाए गए दूसरे बिंदुओं पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या नियम-कायदे सभी के लिए समान हैं?
रहवासियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल दिखाई देती है, लेकिन जिस प्रतिष्ठान को लेकर मूल शिकायत की गई है, उसके संबंध में जांच और कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
लोगों की मांग है कि यदि कोई नियम लागू होता है तो वह छोटे दुकानदार और बड़े कारोबारी—दोनों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
मिलीभगत के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग
कुछ स्थानीय लोगों ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कथित मिलीभगत की आशंका व्यक्त की है।
किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत लेने, आर्थिक लाभ प्राप्त करने या कारोबारी से मिलीभगत करने का कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य सामने नहीं आया है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
शिकायत में तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग
- कारोबार के संचालन के लिए आवश्यक अनुमति की जांच
- स्वच्छता व्यवस्था और अपशिष्ट निपटान की जांच
- मुर्गियों के वाहनों की पार्किंग व्यवस्था
- सड़क और नाली में कथित गंदगी की जांच
- स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा विभाग से निरीक्षण
- कथित अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति
- नगर निगम की पूर्व कार्रवाई की समीक्षा

