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जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने की मांग, आठवें दिन भी धरना जारी


मंडला | OBC आंदोलन | आठवें दिन भी धरना जारी

जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने की मांग, आठवें दिन भी धरना जारी

माधोपुर से मरारटोला तक सड़क मार्ग और कछारी टोला को स्वतंत्र पंचायत बनाने की मांग ने पकड़ा जोर
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

मंडला। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं अखिल भारतीय ओबीसी महासभा, जिला मंडला के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन जनगणना-2027 में ओबीसी की जातिवार गणना के लिए अलग कॉलम सहित विभिन्न स्थानीय समस्याओं को लेकर महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।



8वां दिन
ओबीसी की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना जारी

जनगणना-2027 में ओबीसी के लिए अलग कॉलम की मांग

मोर्चा का कहना है कि सरकार ने जनगणना-2027 में जातिवार गणना का निर्णय तो लिया है, लेकिन पहले चरण में ओबीसी का व्याख्यान नहीं दिया गया और दूसरे चरण की प्रश्नावली में भी ओपन कॉलम की व्यवस्था रखी गई है।

संगठन का दावा है कि इस तरह की व्यवस्था से आंकड़ों के भ्रामक होने की आशंका है। इसलिए ओबीसी की गणना के लिए स्पष्ट और अलग व्यवस्था की जानी चाहिए।

2011 की गणना का दिया उदाहरण
संगठन ने कहा कि वर्ष 2011 में भी ओपन पद्धति से गणना की गई थी, जिसमें 46.7 लाख जातियां सामने आने का दावा किया गया। संगठन के अनुसार इसके बाद सरकार ने आंकड़े जारी करने से मना कर दिया था। मोर्चा ने इसे ओबीसी के साथ धोखा बताया।

एससी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी अलग कॉलम की मांग

संगठन की मांग है कि एससी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी जनगणना में अलग कॉलम निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही राज्यवार मास्टर जाति निर्देशिका और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ट कोड की व्यवस्था लागू की जाए।

ओबीसी संगठनों की प्रमुख मांगें
  • जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम
  • राज्यवार मास्टर जाति निर्देशिका
  • हर जाति के लिए विशिष्ट कोड
  • मानकीकृत गणना प्रणाली
  • पारदर्शी एवं ऑडिट योग्य व्यवस्था

धान का समर्थन मूल्य ₹3500 प्रति क्विंटल करने की मांग

अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने जनगणना के मुद्दे के साथ स्थानीय और किसानों से जुड़ी मांगें भी उठाई हैं। इसमें धान का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने और कीटनाशक दवाओं के दाम कम करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।

₹3500 / क्विंटल
धान का समर्थन मूल्य करने की मांग

अटैच शिक्षकों को मूल स्थान पर भेजने की मांग

जिले की समस्याओं में मंडला के अटैच शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेजने और अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

माधोपुर से मरारटोला तक सड़क निर्माण की मांग

संगठन और ग्रामीणों ने मरारटोला, करियागांव, डगनी टोला, जैताटोला और दफाई टोला को जोड़ने वाले माधोपुर मार्ग के निर्माण की मांग उठाई है।

ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का मुद्दा
माधोपुर मार्ग के निर्माण की मांग के जरिए कई गांव और टोलों की सड़क कनेक्टिविटी का मुद्दा धरने में प्रमुखता से उठाया गया।

जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग

जनपद बिछिया क्षेत्र में जर्जर हो चुके प्राथमिक स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवन का तत्काल निर्माण कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है।

मटियारी डेम पर पुल निर्माण की उठी मांग

करियागांव और मरारटोला के बीच मटियारी डेम पर पुल निर्माण की मांग भी आंदोलनकारियों ने उठाई। इसे क्षेत्रीय आवागमन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया।

कछारी को ककैय्या से अलग कर स्वतंत्र पंचायत बनाने की मांग

आंदोलन में ग्राम कछारी को ककैय्या पंचायत से अलग कर स्वतंत्र ग्राम पंचायत घोषित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

धरने में उठाए गए प्रमुख स्थानीय मुद्दे
  • धान का समर्थन मूल्य ₹3500 प्रति क्विंटल करना
  • कीटनाशक दवाओं के दाम कम करना
  • अटैच शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजना
  • अतिथि शिक्षकों को नियमित करना
  • माधोपुर से मरारटोला क्षेत्र में सड़क निर्माण
  • जर्जर प्राथमिक स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवन का निर्माण
  • करियागांव-मरारटोला के बीच मटियारी डेम पर पुल निर्माण
  • कछारी को अलग कर स्वतंत्र पंचायत घोषित करना

आदिवासी महापंचायत गढ़ा मंडला ने दिया समर्थन

इन मांगों को आदिवासी महापंचायत गढ़ा मंडला का भी समर्थन प्राप्त हुआ है।

धरना स्थल पर मरारटोला-माधोपुर से हूम लाल भांवरे, रामकुमार भांवरे, रामप्रसाद भांवरे, मायाराम भांवरे, राजेश भांवरे, राजेंद्र भांवरे, लक्ष्मी भांवरे, जगन्नाथ यादव तथा करियागांव से संत कुमार पटैल सहित बड़ी संख्या में ओबीसी समुदाय के लोग और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

जनगणना से गांव की सड़क तक—आठवें दिन भी मांगों पर डटे आंदोलनकारी
आंदोलन में एक ओर जनगणना-2027 में ओबीसी के लिए अलग और स्पष्ट कॉलम की मांग उठाई जा रही है, तो दूसरी ओर सड़क, पुल, पंचायत, शिक्षा, किसानों और शिक्षकों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया है। संगठनों ने मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

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