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मंडला जिला कोषालय में अनुकंपा नियुक्ति पर सवाल: बड़े भाई की सरकारी नौकरी के बावजूद हरीश पटेल को कैसे मिली नियुक्ति? RTI में धारा 8 का हवाला देकर क्यों रोके जा रहे दस्तावेज?

विशेष पड़ताल | मंडला

जिला कोषालय में अनुकंपा नियुक्ति पर सवाल, बड़े भाई की सरकारी नौकरी के बावजूद हरीश पटेल को कैसे मिली नियुक्ति?

RTI में धारा 8 का हवाला देकर दस्तावेज नहीं देने का आरोप, कलेक्टर और आयुक्त कोष एवं लेखा से जांच की मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

मंडला। आदिवासी बहुल मंडला जिले में सरकारी नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर नियमों के समान पालन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पात्रता और नियुक्ति के लिए जरूरतमंद परिवारों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर जिला कोषालय में पदस्थ एक कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति को लेकर सामने आई शिकायत ने व्यवस्था की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है।



मामला जिला कोषालय मंडला में सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदस्थ हरीश पटेल की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने नियुक्ति के समय परिवार के सदस्यों की सरकारी सेवा संबंधी जानकारी, प्रस्तुत शपथपत्रों और पात्रता की जांच कराने की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि हरीश पटेल के बड़े भाई नियुक्ति से पहले ही शासकीय सेवा में थे, तो विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता किस आधार पर निर्धारित की? क्या नियुक्ति के समय इस तथ्य की जानकारी विभाग को थी? यदि थी, तो किन नियमों के तहत नियुक्ति को स्वीकृति दी गई?

मामले में उठे प्रमुख सवाल

वर्ष 2012 से बड़े भाई के पटवारी होने का दावा, वर्ष 2013 में पिता का निधन, अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रस्तुत शपथपत्र और RTI में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के आरोप—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की जा रही है।

बड़े भाई वर्ष 2012 से पटवारी, फिर कैसे मिली अनुकंपा नियुक्ति?

शिकायतकर्ता के अनुसार, हरीश पटेल के पिता का वर्ष 2013 में निधन हुआ था। इसके बाद हरीश पटेल को जिला कोषालय में अनुकंपा नियुक्ति दी गई। लेकिन शिकायत में दावा किया गया है कि उनके बड़े भाई वर्ष 2012 से डिंडौरी जिले में पटवारी के पद पर शासकीय सेवा में कार्यरत थे।

ऐसे में सवाल उठता है कि नियुक्ति के समय परिवार के किसी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने की स्थिति का परीक्षण किया गया था या नहीं। यदि किया गया था, तो विभाग ने किस नियम और किन दस्तावेजों के आधार पर पात्रता निर्धारित की?

हालांकि, बड़े भाई की सरकारी सेवा संबंधी दावे और नियुक्ति की वैधता की पुष्टि संबंधित सेवा अभिलेखों तथा उस समय लागू अनुकंपा नियुक्ति नियमों के परीक्षण से ही हो सकती है।

नियुक्ति से पहले दिए गए शपथपत्रों में आखिर क्या जानकारी थी?

इस पूरे मामले में नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए शपथपत्र महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि परिवार के सदस्यों की शासकीय सेवा और अन्य पात्रता संबंधी जानकारी की जांच आवश्यक है।

यदि नियुक्ति से पहले प्रस्तुत किसी शपथपत्र में परिवार के सदस्यों की नौकरी संबंधी जानकारी दर्ज की गई थी, तो उसका मिलान संबंधित विभागों के मूल सेवा रिकॉर्ड से किया जाना चाहिए।

सवाल यह भी है कि नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों का सत्यापन किन अधिकारियों ने किया था और क्या किसी अन्य विभाग से परिवार के सदस्यों की सेवा स्थिति की पुष्टि कराई गई थी?

जांच का महत्वपूर्ण बिंदु

नियुक्ति के समय लागू नियमों, परिवार की परिभाषा, शपथपत्रों और बड़े भाई की कथित सेवा स्थिति का एक साथ परीक्षण किए बिना नियुक्ति के सही या गलत होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

RTI में धारा 8 का हवाला, आखिर क्यों नहीं दिए जा रहे दस्तावेज?

अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों को लेकर सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत की गई मांग भी विवाद का विषय बन गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने नियुक्ति संबंधी अभिलेख, परिवार के सदस्यों के शपथपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे थे, लेकिन संबंधित कार्यालय ने धारा 8 का हवाला देकर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है, तो संबंधित अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? क्या सूचना रोकने के पीछे केवल कानूनी कारण हैं या नियुक्ति को लेकर उठे सवालों का जवाब देने से बचा जा रहा है?

हालांकि, सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 में कुछ श्रेणियों की सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट का प्रावधान है। इसलिए केवल इस धारा का हवाला दिया जाना किसी कर्मचारी को अनुचित संरक्षण देने का प्रमाण नहीं है। आवश्यक है कि संबंधित कार्यालय यह स्पष्ट करे कि सूचना किस विशिष्ट उपधारा के अंतर्गत रोकी गई और क्या कानून के अनुसार उपलब्ध कराई जा सकने वाली जानकारी अलग से दी जा सकती थी।

कूटरचित दस्तावेजों का आरोप, जांच के बिना निष्कर्ष संभव नहीं

शिकायत में नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित शपथपत्रों और पारिवारिक जानकारी की जांच कराने की मांग की है।

दस्तावेजों में कथित कूटरचना का आरोप गंभीर है, लेकिन अभी इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए मूल आवेदन, शपथपत्र, नियुक्ति आदेश, विभागीय नोटशीट और सत्यापन संबंधी अभिलेखों की जांच आवश्यक है।

यदि जांच में गलत जानकारी देने या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि सभी दस्तावेज सही और नियुक्ति नियमानुसार पाई जाती है, तो संबंधित विभाग को शिकायतों पर स्पष्ट निष्कर्ष जारी करना चाहिए।

कलेक्टर और आयुक्त कोष एवं लेखा से निष्पक्ष जांच की मांग

प्राप्त शिकायत संबंधी जानकारी के अनुसार, मामले को लेकर कलेक्टर मंडला और आयुक्त, कोष लेखा एवं पेंशन, भोपाल के समक्ष शिकायत किए जाने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों, परिवार की सेवा स्थिति, शपथपत्रों और पात्रता संबंधी नियमों की जांच कराई जाए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने दस्तावेजों का परीक्षण किया था।

शिकायत पर अब तक क्या विभागीय कार्रवाई हुई है और संबंधित कार्यालय ने किन तथ्यों का सत्यापन किया है, यह भी सार्वजनिक हित से जुड़ा सवाल है।

प्रशासन से पांच सीधे सवाल

● क्या हरीश पटेल के बड़े भाई वर्ष 2012 से सरकारी सेवा में कार्यरत थे?

● नियुक्ति के समय परिवार की सेवा स्थिति का सत्यापन किसने किया?

● शपथपत्रों में दर्ज जानकारी का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान हुआ था?

● RTI में दस्तावेज नहीं देने का सटीक कानूनी आधार क्या है?

● शिकायत पर अब तक जांच या कार्रवाई क्यों और किस स्तर पर लंबित है?

गरीबों को नियमों का हवाला, रसूखदारों के लिए क्या अलग व्यवस्था?

शिकायत के साथ यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि सरकारी नियुक्तियों में सभी आवेदकों के लिए नियमों का समान रूप से पालन क्यों नहीं दिखाई देता। अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था जरूरतमंद और पात्र आश्रित परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि हरीश पटेल को दी गई नियुक्ति नियमानुसार है, तो प्रशासन को उन नियमों को स्पष्ट करना चाहिए, ताकि समान परिस्थितियों वाले अन्य पात्र आवेदकों को भी उनके अनुसार अवसर मिल सके।

हालांकि, अनुकंपा नियुक्ति सामान्य बेरोजगारों को सरकारी नौकरी देने की योजना नहीं है। इसकी पात्रता दिवंगत शासकीय कर्मचारी के आश्रितों और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होती है। इसलिए किसी अन्य आवेदक की पात्रता भी इन्हीं नियमों के अनुसार जांची जाएगी।

अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति

मंडला जिला कोषालय में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर उठे सवाल केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं हैं। यह मामला सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता, दस्तावेजों के सत्यापन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति के समय सभी आवश्यक तथ्यों का परीक्षण हुआ था या नहीं। यदि नियुक्ति सही है, तो उसका आधार स्पष्ट होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और कोष एवं लेखा विभाग शिकायत को गंभीरता से लेकर संबंधित अभिलेखों की जांच कराते हैं या यह मामला भी आरोपों, जवाबों और सूचना के अधिकार की धाराओं के बीच उलझा रह जाता है।

संपादकीय स्पष्टीकरण

समाचार में बड़े भाई की सरकारी नौकरी, नियुक्ति में अनियमितता, दस्तावेजों की कथित कूटरचना और RTI में जानकारी रोकने संबंधी बातें शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र विभागीय पुष्टि आवश्यक है। संबंधित कर्मचारी और विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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