दशहरे पर ऑटो चालकों की मनमानी के आरोप! 10 रुपये के सफर के लिए 50 रुपये, रात में 200 तक किराये की मांग
बिना परमिट संचालन, स्कूली बच्चों की ओवरलोडिंग और सड़कों पर बेतरतीब ऑटो रोकने की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
मंडला। दशहरा पर्व पर जहां शहरवासी उत्साह और श्रद्धा के साथ त्योहार मनाने निकले, वहीं कुछ ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने के आरोपों ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के अनुसार, जिन स्थानों तक पहुंचने के लिए सामान्य दिनों में महज 10 रुपये किराया लगता है, वहां त्योहार के दौरान 50 रुपये तक की मांग की गई।
इतना ही नहीं, रात के समय बस स्टैंड और अन्य स्थानों से अपने घर जाने वाले यात्रियों से 100 से 200 रुपये तक किराया मांगे जाने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित मार्गों की निर्धारित किराया दरों की जांच आवश्यक है। हालांकि, शिकायतों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि त्योहारों पर यात्रियों को उचित किराये में सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
यात्रियों की शिकायतों में क्या सामने आया?
सामान्य किराया: 10 रुपये बताया गया
दशहरे पर मांग: उसी सफर के लिए 50 रुपये तक
रात में शिकायत: 100 से 200 रुपये तक किराये की मांग
अन्य आरोप: बिना परमिट संचालन, ओवरलोडिंग और मनमाने स्थानों पर वाहन रोकना
नोट: ये आंकड़े और आरोप प्राप्त शिकायतों पर आधारित हैं। मार्गवार किराया दरों तथा उल्लंघन की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच से होगी।
त्योहार आते ही किराये में पांच गुना तक बढ़ोतरी का आरोप
दशहरा जैसे बड़े पर्व पर शहर में लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। बाजारों, धार्मिक स्थलों और रावण दहन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों से निकलते हैं। ऐसे अवसरों पर सार्वजनिक परिवहन की मांग भी बढ़ती है।
आरोप है कि कुछ ऑटो चालकों ने यात्रियों की इसी जरूरत का फायदा उठाते हुए किराये में भारी बढ़ोतरी कर दी। जहां सामान्य दिनों में 10 रुपये में यात्रा पूरी होने की बात कही जा रही है, वहीं दशहरे के दौरान उसी दूरी के लिए 50 रुपये तक मांगे जाने की शिकायतें मिली हैं।
परिवार के साथ निकले यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के सामने ऐसी स्थिति में परेशानी बढ़ जाती है। उन्हें एक ओर अपने गंतव्य तक पहुंचने की चिंता रहती है, तो दूसरी ओर अधिक किराये की मांग का सामना करना पड़ता है।
क्या त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ के बीच यात्रियों से वसूले जा रहे किराये की निगरानी होती है? यदि किराये की निर्धारित दरें हैं, तो उनकी जानकारी यात्रियों तक क्यों नहीं पहुंचाई जाती?
रात होते ही बढ़ जाती है यात्रियों की मजबूरी
सबसे अधिक परेशानी देर रात यात्रा करने वालों को होने की बात कही जा रही है। बाहर से मंडला आने वाले लोगों को बस स्टैंड अथवा अन्य स्थानों से अपने घर तक पहुंचने के लिए ऑटो का सहारा लेना पड़ता है।
रात के समय सार्वजनिक परिवहन के विकल्प सीमित होने पर यात्रियों की निर्भरता ऑटो चालकों पर बढ़ जाती है। आरोप है कि कुछ चालक इसी परिस्थिति में सामान्य दूरी के लिए भी 100 से 200 रुपये तक किराये की मांग करते हैं।
बाहर से आने वाले यात्रियों को शहर के रास्तों और सामान्य किराये की जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे अधिक किराये की मांग का विरोध करने की स्थिति में भी नहीं रहते। विशेषकर परिवार के साथ सफर कर रहे लोग विवाद से बचने के लिए मांगा गया किराया देने को मजबूर हो सकते हैं।
बिना वैध परमिट ऑटो चलने के आरोप, जांच जरूरी
मंडला जिले में ऑटो संचालन के दस्तावेजों और नियमों के पालन को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ ऑटो आवश्यक परमिट के बिना सड़कों पर संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, किसी विशेष वाहन के बिना परमिट चलने की पुष्टि उसके दस्तावेजों की जांच के बाद ही की जा सकती है। ऐसे में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह नियमित अभियान चलाकर परमिट, पंजीयन, फिटनेस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच करे।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित वाहन संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिले में ऑटो संचालन की निगरानी के लिए नियमित रूप से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
स्कूली बच्चों की ओवरलोडिंग से सुरक्षा पर सवाल
ऑटो संचालन में कथित अनियमितताओं का मामला केवल किराया वसूली तक सीमित नहीं है। स्कूलों में बच्चों को लाने और ले जाने वाले कुछ ऑटो में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के आरोप भी सामने आए हैं।
बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में बैठाकर वाहन चलाना उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। दुर्घटना या अचानक ब्रेक लगने जैसी परिस्थितियों में ऐसे वाहनों में सफर कर रहे बच्चों को अधिक जोखिम हो सकता है।
इस संबंध में परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की साझा जिम्मेदारी बनती है। बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की फिटनेस, चालक की पात्रता, निर्धारित क्षमता और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच आवश्यक है।
स्कूल वाहनों की जांच केवल कागजी औपचारिकता न बने। यदि क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की शिकायत सही पाई जाती है, तो समय रहते कार्रवाई कर संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाना चाहिए।
कहीं भी ऑटो रोकने से यातायात व्यवस्था प्रभावित
शहर में कुछ ऑटो चालकों द्वारा सड़क पर मनमाने स्थानों पर वाहन रोककर सवारियां बैठाने और उतारने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। व्यस्त मार्गों पर अचानक वाहन रोकने से पीछे चल रहे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है।
ऐसे हालात में यातायात बाधित होने और दुर्घटना की आशंका बढ़ने का खतरा रहता है। शहर में निर्धारित ऑटो स्टैंड, व्यवस्थित सवारी चढ़ाने-उतारने के स्थान और प्रमुख मार्गों पर नियमित निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही परिवहन और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में किराया वसूली, वाहनों के दस्तावेजों और यात्री सुरक्षा की निगरानी प्रभावी होना आवश्यक है।
मंडला में सामने आए आरोपों को देखते हुए परिवहन विभाग को किराये संबंधी शिकायतों की जांच करने, ऑटो के आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जरूरत है।
यातायात पुलिस को भी प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऑटो चालक निर्धारित स्थानों पर ही सवारियां बैठाएं और उतारें। स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाना भी आवश्यक है।
किराया सूची सार्वजनिक करने और शिकायत व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
यात्रियों को किसी मार्ग का उचित किराया पता न होने पर विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे में संबंधित विभाग को लागू किराया नियमों और दरों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए।
बस स्टैंड, प्रमुख बाजारों और ऑटो स्टैंडों पर किराये की जानकारी प्रदर्शित करने तथा शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था से यात्रियों को राहत मिल सकती है।
साथ ही, यात्रियों को भी शिकायत करते समय वाहन क्रमांक, यात्रा का मार्ग, समय और मांगे गए किराये जैसी जानकारी दर्ज कर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि शिकायतों की प्रभावी जांच हो सके।
जनता पूछ रही है—आखिर जवाबदेह कौन?
दशहरे के दौरान 10 रुपये वाले सफर के लिए 50 रुपये तक और रात में 100 से 200 रुपये तक किराया मांगने के आरोपों ने मंडला की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑटो चालक अपनी सेवाओं के बदले नियमानुसार उचित किराया पाने के हकदार हैं, लेकिन यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर अनुचित किराया वसूलने की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसी तरह बिना परमिट संचालन, निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने और यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जब यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने, स्कूली बच्चों की ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो जिम्मेदार विभाग इनकी जांच कब करेंगे? क्या त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और उचित किराये के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी?
अब देखना होगा कि परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। आम जनता को केवल नियमों की जानकारी नहीं, बल्कि सड़कों पर उनका प्रभावी पालन भी चाहिए।
संपादकीय टिप्पणी: समाचार में उल्लिखित किराया वसूली, बिना परमिट संचालन और ओवरलोडिंग संबंधी बातें शिकायतों एवं आरोपों पर आधारित हैं। किसी विशेष चालक या वाहन के नियम उल्लंघन की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही की जा सकती है।
