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सड़क नहीं तो विकास कैसा? गड्ढों में फंसा गांव का भविष्य, स्कूल जाते बच्चे रोज उठा रहे जोखिम



तिंदुआ बम्हनी पंचायत के खम्हरिया–इमलीटोला–कांवरीटोला मार्ग की बदहाली पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश | बच्ची के घायल होने के बाद फिर उठे सवाल

सरकार ने साइकिल दी, गांव ने पूछा—चलाएं कहां? एंबुलेंस भी रास्ते में अटकती है, फिर जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी?




दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में विकास के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़कें जमीनी हकीकत की पोल खोलती नजर आ रही हैं। कहीं सड़क निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है तो कहीं वर्षों से ग्रामीण पक्की सड़क की बाट जोह रहे हैं। जनपद पंचायत नैनपुर की ग्राम पंचायत तिंदुआ बम्हनी के खम्हरिया, इमलीटोला और कांवरीटोला क्षेत्र में सड़क की बदहाली अब ग्रामीणों के लिए महज परेशानी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का जोखिम बन चुकी है।

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों के अनुसार स्कूल जाते समय एक बच्ची सड़क के गड्ढे में गिरकर घायल हो गई। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। बरसात में सड़क की हालत और बिगड़ जाती है और बच्चों सहित बुजुर्गों, महिलाओं तथा मरीजों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ती है।


8 से 10 किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा!

ग्रामीणों के मुताबिक झुलपुर से खम्हरिया, खम्हरिया से इमलीटोला, इमलीटोला से बम्हनी और बम्हनी से कांवरीटोला तक लगभग 8 से 10 किलोमीटर मार्ग आज भी पक्की सड़क की सुविधा से वंचित है।

बारिश के मौसम में यही कच्चा रास्ता कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन चलाना तो दूर, पैदल निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।


साइकिल मिली, लेकिन सड़क नहीं मिली!

सरकार स्कूली बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए साइकिल सहित तमाम योजनाएं चला रही है। लेकिन ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब गांव तक पहुंचने वाली सड़क ही सुरक्षित नहीं है, तो बच्चों को मिली साइकिल आखिर चलेगी कहां?

बच्चों को रोजाना कीचड़, फिसलन और गड्ढों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार बच्चे गिरकर चोटिल होते हैं, साइकिल फिसल जाती है, कपड़े खराब हो जाते हैं और रास्ते की परेशानी के चलते बच्चों को स्कूल पहुंचने में भी देर होती है।

क्या यही है ग्रामीण बच्चों के लिए सुरक्षित और सुगम शिक्षा का रास्ता?

मरीज गंभीर हो तो सड़क उससे भी गंभीर समस्या!

सड़क की बदहाली का असर केवल स्कूली बच्चों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर वाहन बुलाना भी चुनौती बन जाता है। खराब रास्ते के कारण कई वाहन चालक गांव तक आने में आनाकानी करते हैं।

सबसे गंभीर स्थिति गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के समय बनती है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है।

सवाल यह है कि जब सड़क ही मरीज तक पहुंचने में बाधा बन जाए तो सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ आखिर कैसे मिलेगा?


सड़क की बदहाली से रिश्तों पर भी पड़ रहा असर!

ग्रामीणों ने एक और चिंताजनक पहलू सामने रखा है। उनका दावा है कि शादी-ब्याह के दौरान जब दूसरे गांवों से परिवार रिश्ते के लिए आते हैं और गांव तक पहुंचने वाली बदहाल सड़क देखते हैं तो कई परिवार पीछे हट जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं रही, बल्कि गांव की सामाजिक प्रतिष्ठा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ा अहम सवाल बन चुकी है।

आवेदन पर आवेदन… फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी क्यों?

ग्रामीणों का कहना है कि वे संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं। लिखित आवेदन भी दिए गए, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है।

ऐसे में सवाल सिर्फ ग्राम पंचायत से नहीं, बल्कि जनपद पंचायत, संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी है—

जब ग्रामीण वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं तो उनकी आवाज जिम्मेदारों के कानों तक क्यों नहीं पहुंच रही?

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

ग्रामीणों का सवाल—ग्रामीणों के हिस्से में सिर्फ वादे क्यों?


सरकार गांवों के विकास, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण संपर्क मार्गों को लेकर लगातार योजनाओं की बात करती है। लेकिन खम्हरिया–इमलीटोला–कांवरीटोला मार्ग की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है।

रेवांचल टाइम्स ग्रामीणों की इस आवाज को जिम्मेदारों तक पहुंचाते हुए पूछता है—आखिर कब जागेगा प्रशासन? कब सुधरेगी सड़क? और कब गांव के बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा?

ग्रामीणों की मांग है कि झुलपुर से खम्हरिया, इमलीटोला, बम्हनी होते हुए कांवरीटोला तक सड़क को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा पात्र अन्य योजना के तहत स्वीकृत कर शीघ्र पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।

यह सिर्फ सड़क बनाने की मांग नहीं है। यह बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, मरीजों की जिंदगी, गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और पूरे ग्रामीण क्षेत्र के सम्मानजनक जीवन का सवाल है।

वही अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस पुकार को कब तक अनसुना करते हैं। सड़क बनेगी या फिर एक और बरसात ग्रामीणों को उसी कीचड़, गड्ढों और जोखिम भरे रास्तों के हवाले कर दी जाएगी—यह आने वाला समय बताएगा

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