पैसों के लालच और विवाद में कुल्हाड़ी से उतारा था मौत के घाट
दमुआ पुलिस की त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक साक्ष्यों के दम पर 2 घंटे में पकड़ाया था आरोपी
गवाहों के पक्षद्रोही होस्टिंले होने के बावजूद सटीक विवेचना से अदालत ने सुनाई सजा
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|छिंदवाड़ा जिले के दमुआ थाना अंतर्गत ग्राम चुरनी चौगान में घटे पिता की हत्या के जघन्य एवं सनसनीखेज मामले में माननीय अपर सत्र न्यायालय, जुन्नारदेव ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने अपने ही पिता की कुल्हाड़ी से नृशंस हत्या करने वाले आरोपी पुत्र राजेश राकेशिया (32 वर्ष) को धारा 103(1) बीएनएस के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास और ₹5,000 के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
क्या थी पूरी घटना
मामले का खुलासा 8 जून 2025 की सुबह हुआ, जब प्रार्थी राधेलाल राकेसिया ने पुलिस को सूचना दी कि उनके पिता रूपचंद राकेसिया अपने निर्माणाधीन मकान में लकड़ी की खटिया पर खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़े हैं। गर्दन पर गंभीर चोट के निशान थे।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उपनिरीक्षक राजेश साहू पुलिस टीम और एफएसएल अधिकारी के साथ मौके पर पहुंचे। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा द्वारा इसे जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी में चिन्हित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
ज़मीन बेचने के पैसों पर थी कलयुगी बेटे की नजर
पुलिस विवेचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ
पैसों की मांग मृतक रूपचंद ने हाल ही में अपनी कृषि भूमि लगभग 10 लाख रुपये में बेची थी और राशि बैंक में जमा कराई थी।
विवाद और मारपीट आरोपी बेटा राजेश कोई काम नहीं करता था और पैसों के लिए अक्सर पिता से मारपीट करता था।
थाने में शिकायत घटना के ठीक एक दिन पहले भी मृतक ने आरोपी पुत्र के खिलाफ दमुआ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
वैज्ञानिक साक्ष्य बने सजा का आधार
घटना के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी राजेश राकेशिया को महज 2 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी जप्त की।
गवाहों के मुकरने पर भी नहीं डगमगाया केस
विचारण के दौरान आरोपी के सगे-संबंधी होने के कारण कुछ महत्वपूर्ण साक्षी पक्षद्रोही होस्टिंले हो गए थे। इसके बावजूद, तत्कालीन विवेचक उनि. राजेश साहू द्वारा की गई उत्कृष्ट एवं वैज्ञानिक विवेचना, घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट वैज्ञानिक अधिकारी श्रीमती अजीता जौहरी के ठोस आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपराध को सिद्ध किया।
इन्होंने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
विवेचना एवं पुलिस टीम: तत्कालीन थाना प्रभारी उनि. राजेश साहू, कार्य. निरी. प्रमोद सिरसाम, उपनिरी. साहूकार राजेश एवं निरी. राम सीताम।
अभियोजन पैरवी: तत्कालीन ADPO श्रीमती गंगावती डेहरिया, एजीपी पंकज श्रीवास्तव एवं बाबूलाल ककोडिया न्यायालय जुन्नारदेव।
यह निर्णय पुलिस की उत्कृष्ट विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन पैरवी का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिससे समाज में अपराधियों के प्रति कड़ा संदेश गया है।


