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आत्मा की आराधना का महापर्व ‘पर्युषण’, 16 सितंबर से पिंडरई में गूंजेगा दशलक्षण धर्म का संदेश

दैनिक रेवांचल टाइम्स | पिंडरई, मंडला
✦ धर्म • साधना • आत्मशुद्धि ✦

आत्मा की आराधना का महापर्व है ‘पर्युषण’, 16 सितंबर से शुरू होगा दस दिवसीय दशलक्षण पर्व

पिंडरई में आर्यिका मां विमल मति माता जी ससंघ का मिलेगा मंगल सान्निध्य; उत्तम क्षमा से ब्रह्मचर्य तक दस धर्मों की होगी आराधना

पिंडरई/मंडला। भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी, तदनुसार 16 सितंबर से दिगम्बर जैन परंपरा का पावन पर्युषण महापर्व प्रारंभ होने जा रहा है। दस दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालु आत्मशुद्धि, संयम, तप, त्याग और क्षमा जैसे आध्यात्मिक गुणों की आराधना करेंगे।



“पर्युषण केवल पर्व नहीं, आत्मा की ओर लौटने की साधना”
दस दिनों तक धर्म, तप, त्याग, संयम और आत्मविशुद्धि की आराधना

आर्यिका मां विमल मति माता जी ससंघ का मिलेगा मंगल सान्निध्य

पर्युषण महापर्व के दौरान पिंडरई के श्रद्धालुओं को संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या परम वंदनीय आर्यिका मां विमल मति माता जी ससंघ का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा।

आर्यिका मां की देशना के माध्यम से श्रद्धालुओं को दशलक्षण धर्मों के आध्यात्मिक महत्व और उन्हें जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा मिलेगी।

क्या है पर्युषण का आध्यात्मिक अर्थ?

जैन परंपरा में पर्युषण को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है। इसका मूल भाव बाहरी आकर्षणों से हटकर स्वयं के भीतर झांकना, अपने आचरण का चिंतन करना और धर्म के माध्यम से आत्मा के विशुद्ध गुणों की आराधना करना है।

दशलक्षण धर्म के दस सोपान
✦ उत्तम क्षमा
✦ उत्तम मार्दव
✦ उत्तम आर्जव
✦ उत्तम शौच
✦ उत्तम सत्य
✦ उत्तम संयम
✦ उत्तम तप
✦ उत्तम त्याग
✦ उत्तम आकिंचन्य
✦ उत्तम ब्रह्मचर्य

दस दिनों तक आत्मशुद्धि का संदेश

पर्युषण के प्रत्येक दिन दशलक्षण धर्म के अलग-अलग स्वरूप का चिंतन और आराधना की जाएगी। क्षमा से प्रारंभ होने वाली यह आध्यात्मिक यात्रा मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग और आकिंचन्य से होते हुए ब्रह्मचर्य धर्म तक पहुंचेगी।

इन दस धर्मों के माध्यम से क्रोध, अहंकार, छल-कपट, लोभ और आसक्ति जैसी प्रवृत्तियों से दूर होकर आत्मा के स्वाभाविक गुणों की ओर बढ़ने का संदेश दिया जाता है।

समापन पर मनेगा क्षमावाणी पर्व

दस दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के बाद क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। क्षमावाणी जैन दर्शन के सबसे सुंदर संदेशों में से एक है, जिसमें मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगकर वैमनस्य को समाप्त करने की प्रेरणा दी जाती है।

क्षमा से बड़ा कोई शस्त्र नहीं और आत्मशुद्धि से बड़ी कोई साधना नहीं।

श्री विद्या स्वभाव भवन में होंगे सभी आयोजन

सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष चौधरी कैलाश चंद्र जी द्वारा साधु सेवा समिति के सदस्य ऋषभ जी को दी गई जानकारी के अनुसार पर्युषण महापर्व के सभी धार्मिक आयोजन श्री विद्या स्वभाव भवन में आयोजित किए जाएंगे।

महापर्व को लेकर जैन समाज में उत्साह और भक्ति का वातावरण है। दस दिनों तक होने वाली आराधना के माध्यम से श्रद्धालु आत्मचिंतन, संयम और सदाचार का संकल्प लेते हुए धर्म के दस लक्षणों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे।

पर्युषण का संदेश
बाहर की दुनिया को जीतने से पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करना,
क्षमा करना, संयम रखना और आत्मा को निर्मल बनाना ही धर्म की वास्तविक साधना है।

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