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सरकारी छुट्टी भी स्कूल प्रबंधन की मर्जी पर? विरोध के बाद याद आया शासन का आदेश... अल्पसंख्यक स्कूल सरकार को दिखा रहे ठेंगा... भाजपा नेता मुजम्मिल अली ने दिखाया आइना

रेवांचल टाइम्स | जबलपुर

सरकारी छुट्टी भी स्कूल प्रबंधन की मर्जी पर? विरोध के बाद याद आया शासन का आदेश



गणेश चतुर्थी पर सार्वजनिक अवकाश के बावजूद कुछ निजी स्कूलों में छुट्टी नहीं होने का आरोप; भाजपा नेता मुजम्मिल अली ने जताई आपत्ति, जिला शिक्षा अधिकारी को दी जानकारी

जबलपुर। गणेश चतुर्थी पर शासन की ओर से सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने के बावजूद जबलपुर के कुछ निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों को छुट्टी नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालयों को संचालित रखने की तैयारी थी। इसकी जानकारी मिलने पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े मुजम्मिल अली ने संबंधित स्कूल प्रबंधन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद विद्यालयों द्वारा अवकाश घोषित किए जाने की बात कही गई है।



सवाल यही—शासन ने छुट्टी घोषित की तो स्कूल खुले रखने की तैयारी क्यों? मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि शासन की ओर से सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, तो संबंधित विद्यालयों में उसके अनुपालन को लेकर असमंजस की स्थिति क्यों बनी?

इन स्कूलों में अवकाश नहीं होने का दावा

प्राप्त जानकारी के अनुसार फरान हाई स्कूल गोहलपुर, ईडब्ल्यूएस कन्या स्कूल गोहलपुर और हुसैनिया स्कूल बहोराबाग सहित कुछ अन्य विद्यालयों में गणेश चतुर्थी के अवसर पर विद्यार्थियों को अवकाश नहीं दिए जाने की शिकायत सामने आई।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शासन द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बावजूद इन विद्यालयों में छुट्टी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। हालांकि इस संबंध में संबंधित विद्यालय प्रबंधनों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।



स्कूल पहुंचे मुजम्मिल अली, प्रबंधन के सामने जताई आपत्ति

मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के मुजम्मिल अली संबंधित विद्यालयों में पहुंचे। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए शासन द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश संबंधी निर्देशों का पालन करने की मांग की।

मुजम्मिल अली के अनुसार आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद संबंधित विद्यालयों ने विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित कर दिया।

जिला शिक्षा अधिकारी को भी दी जानकारी
मुजम्मिल अली ने पूरे मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी, जबलपुर को देते हुए जिले के सभी संबंधित विद्यालयों में शासन के अवकाश संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।

शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

इस घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी विद्यालय में शासन द्वारा घोषित अवकाश के पालन को लेकर शिकायत सामने आती है और किसी व्यक्ति अथवा संगठन को मौके पर पहुंचकर आदेश की याद दिलानी पड़ती है, तो यह देखना भी जरूरी है कि ऐसे निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

“सार्वजनिक अवकाश कोई वैकल्पिक सुविधा नहीं”
मुजम्मिल अली का कहना है कि शासन द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश को संबंधित संस्थानों में लागू कराया जाना चाहिए। विद्यार्थियों और अभिभावकों को इस संबंध में किसी तरह की असमंजस या परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की भी है।

नियमों की जांच और स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने मांग की है कि जिन विद्यालयों में सार्वजनिक अवकाश का पालन नहीं किए जाने की शिकायत मिली है, वहां तथ्यों और लागू नियमों की जांच की जाए। यदि किसी स्तर पर शासन के निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

साथ ही जिले के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों को अवकाश संबंधी शासन के आदेशों एवं उन पर लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

सवाल सिर्फ छुट्टी का नहीं, व्यवस्था की ‘छुट्टी’ का भी यदि शासन के आदेश के बावजूद विद्यालय स्तर पर अवकाश को लेकर अलग स्थिति बनती है और शिकायत के बाद व्यवस्था बदलती है, तो यह जांच का विषय है कि आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय है। अब निगाह शिक्षा विभाग पर है कि वह पूरे मामले में तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।
नोट: विद्यालयों में अवकाश नहीं दिए जाने और विरोध के बाद छुट्टी घोषित किए जाने से संबंधित विवरण शिकायतकर्ता पक्ष से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। 

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