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नैनपुर में ‘घर बैठे डिग्री’ के दावों पर सवाल, कंप्यूटर संस्थानों की जांच की मांग

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | मंडला-नैनपुर

नैनपुर में ‘घर बैठे डिग्री’ के दावों पर सवाल! कंप्यूटर संस्थान चला रहे कॉलेज स्तर के कोर्स?

DCA-PGDCA से लेकर BCA और B.Sc. तक पाठ्यक्रम कराने की चर्चा; विश्वविद्यालय की संबद्धता, अध्ययन केंद्र की अनुमति और डिग्री की वैधता की जांच की मांग

नैनपुर/मंडला। नैनपुर में संचालित कुछ निजी कंप्यूटर एवं शिक्षण संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने के दावों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ संस्थानों के माध्यम से DCA, PGDCA के साथ BCA और B.Sc. जैसे पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश और पढ़ाई की व्यवस्था बताई जा रही है।


मामला विद्यार्थियों के भविष्य और डिग्री की वैधता से जुड़ा होने के कारण अब नैनपुर में संचालित निजी कंप्यूटर एवं शिक्षण संस्थानों की मान्यता, संबद्धता और पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति की निष्पक्ष जांच की मांग सामने आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल
जिस विश्वविद्यालय के नाम से डिग्री या डिप्लोमा दिए जाने की बात कही जा रही है, क्या उसने नैनपुर स्थित संबंधित संस्थान को उस पाठ्यक्रम के लिए विधिवत अधिकृत किया है?

विश्वविद्यालय कहीं और, नैनपुर में डिग्री कोर्स कैसे?

कुछ निजी संस्थानों द्वारा अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्धता अथवा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित संस्थान की वास्तविक भूमिका क्या है—क्या वह अधिकृत अध्ययन केंद्र है, प्रवेश अथवा प्रशिक्षण केंद्र है या उसे संबंधित डिग्री पाठ्यक्रम की नियमित पढ़ाई कराने की अनुमति प्राप्त है?

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं कहां संचालित होती हैं, शिक्षक कौन हैं, उपस्थिति किस प्रकार दर्ज होती है और परीक्षा किस संस्था अथवा विश्वविद्यालय द्वारा तथा किन नियमों के तहत आयोजित की जाती है।

🎓 एडमिशन से पहले विद्यार्थी पूछें
विश्वविद्यालय कौन-सा है? • संस्थान की अधिकृत स्थिति क्या है? • कोर्स की मान्यता क्या है? • कक्षाएं कहां लगेंगी? • परीक्षा कौन कराएगा? • डिग्री किस विश्वविद्यालय से जारी होगी?

UGC के नियमों और विश्वविद्यालय की अनुमति की जांच जरूरी

विश्वविद्यालयों द्वारा मुख्य परिसर से बाहर पाठ्यक्रम, ऑफ-कैंपस सेंटर, अध्ययन केंद्र अथवा अन्य माध्यम से शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने के लिए लागू विश्वविद्यालय कानूनों और नियामक प्रावधानों का पालन आवश्यक होता है। इसलिए केवल किसी विश्वविद्यालय का नाम, लोगो या प्रवेश संबंधी सामग्री दिखना अपने आप में किसी स्थानीय संस्थान को प्रत्येक डिग्री पाठ्यक्रम संचालित करने का अधिकार साबित नहीं करता।

इसी कारण संबंधित विश्वविद्यालय से सीधे यह सत्यापित किया जाना जरूरी है कि नैनपुर स्थित संबंधित संस्थान को किस पाठ्यक्रम के लिए, किस अवधि तक और किस स्वरूप में अधिकृत किया गया है।

‘घर बैठे डिग्री’ के दावों की भी हो जांच

स्थानीय स्तर पर कुछ पाठ्यक्रमों में नियमित कक्षाओं के बिना डिग्री अथवा डिप्लोमा उपलब्ध कराने संबंधी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अभी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा तथ्यात्मक जांच ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

यदि विद्यार्थी नियमित अध्ययन किए बिना केवल प्रवेश, परीक्षा अथवा प्रमाणपत्र की प्रक्रिया से जुड़े हैं, तो यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित पाठ्यक्रम का स्वीकृत अध्ययन माध्यम क्या है और पूरी प्रक्रिया नियामक मानकों के अनुरूप है या नहीं।

सभी निजी कंप्यूटर संस्थानों की जांच की मांग

जांच में इन बिंदुओं की पड़ताल की मांग—

संस्थान किन-किन डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले रहे हैं?
संबंधित विश्वविद्यालय से उनकी संबद्धता अथवा अधिकृत केंद्र की स्थिति क्या है?
प्रत्येक पाठ्यक्रम के संचालन की लिखित अनुमति उपलब्ध है या नहीं?
नियमित कक्षाएं कहां और कितने विद्यार्थियों की लगती हैं?
शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति का रिकॉर्ड क्या है?
परीक्षा किसके नियंत्रण में और कहां आयोजित होती है?
विद्यार्थियों को जारी डिग्री/डिप्लोमा की वैधता और मान्यता क्या है?
प्रचार में किए जा रहे दावों और वास्तविक अनुमति में कोई अंतर तो नहीं?

सबसे बड़ा जोखिम विद्यार्थियों के भविष्य का

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थी बेहतर शिक्षा और रोजगार की उम्मीद में निजी संस्थानों में प्रवेश लेते हैं। परिवार फीस, किताब, परीक्षा और अन्य मदों पर अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार खर्च करते हैं। ऐसे में यदि पढ़ाई पूरी होने के बाद किसी डिग्री की मान्यता अथवा संस्थान की अधिकृत स्थिति पर विवाद सामने आता है, तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों को हो सकता है।

⚠️ जांच से सही संस्थानों को भी मिलेगी स्पष्टता
सभी निजी संस्थानों की जांच का अर्थ हर संस्था को दोषी मानना नहीं है। जो संस्थान नियमानुसार और वैध अनुमति के साथ पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं, जांच से उनकी स्थिति भी स्पष्ट होगी। वहीं नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग

विद्यार्थियों और अभिभावकों की ओर से मांग उठ रही है कि नैनपुर में संचालित निजी कंप्यूटर एवं शिक्षण संस्थानों की विश्वविद्यालय संबद्धता, पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति, नियमित कक्षाओं, परीक्षा व्यवस्था और जारी होने वाली डिग्री एवं डिप्लोमा की मान्यता की जांच कर स्थिति सार्वजनिक की जाए।

यदि किसी संस्था द्वारा बिना वैध अनुमति किसी डिग्री या डिप्लोमा को लेकर भ्रामक दावा किए जाने की पुष्टि होती है तो विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा करते हुए नियमानुसार कार्रवाई हो। साथ ही जो संस्थान नियमों के अनुरूप काम कर रहे हैं, उनकी अधिकृत स्थिति भी सार्वजनिक होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम समाप्त हो सकेगा।

डिग्री से पहले जांचें मान्यता • विश्वविद्यालय से करें सत्यापन • विद्यार्थियों के भविष्य से न हो खिलवाड़

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