Breaking

revanchal times new

स्कूल-आंगनबाड़ी में ‘चूल्हा बंद’, भुगतान नहीं मिलने पर समूहों ने खोला मोर्चा

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | मंडला

सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘चूल्हा बंद’ हड़ताल, भुगतान के लिए समूहों का फूटा आक्रोश

मध्यान्ह भोजन और पोषण आहार व्यवस्था पर संकट; समूहों ने लंबित भुगतान के साथ कम राशि और कम राशन दिए जाने के भी लगाए आरोप

मंडला। सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के भोजन एवं पोषण से जुड़ी व्यवस्था भुगतान विवाद के कारण प्रभावित होने लगी है। मंडला जिले में मध्यान्ह भोजन और पोषण आहार से जुड़े समूहों ने ‘चूल्हा बंद’ हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलनरत समूहों का आरोप है कि कई महीनों से भुगतान लंबित है और बार-बार आवेदन, निवेदन तथा ज्ञापन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

🔥 चूल्हे बंद तो बच्चों के भोजन पर असर
समूहों के आंदोलन के कारण स्कूलों में मध्यान्ह भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार तैयार करने की व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई है। आंदोलन कितने केंद्रों और स्कूलों में प्रभावी है, इसकी आधिकारिक स्थिति प्रशासन से स्पष्ट होना बाकी है।

कई महीनों से भुगतान नहीं मिलने का आरोप

समूहों के अनुसार, मध्यान्ह भोजन और पोषण आहार के संचालन से जुड़ा भुगतान कई महीनों से अटका हुआ है। उनका कहना है कि समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन और ज्ञापन दिए गए। समाचार माध्यमों के जरिए भी शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन भुगतान की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

समूहों का कहना है कि लगातार आर्थिक दबाव बढ़ने के बाद उनके सामने आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। नियमित भुगतान नहीं होने से भोजन व्यवस्था चलाने के साथ रसोइयों और अन्य खर्चों का भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है।

कम राशि और कम राशन देने का भी आरोप

आंदोलनरत समूहों ने मामला केवल लंबित भुगतान तक सीमित नहीं बताया है। उनका आरोप है कि कुछ स्तरों पर निर्धारित राशि से कम भुगतान और अपेक्षा से कम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।

समूहों के सामने आर्थिक संकट
आंदोलनकारियों का कहना है कि राशन, भोजन तैयार करने और व्यवस्था से जुड़े दूसरे खर्च लगातार चलते रहते हैं। भुगतान समय पर नहीं मिलने से समूहों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और व्यवस्था को नियमित रूप से संचालित करना कठिन होता जा रहा है।

बच्चों के भोजन का मामला, भुगतान व्यवस्था पर उठे सवाल

मध्यान्ह भोजन और पोषण आहार की व्यवस्था सीधे बच्चों से जुड़ी है। ऐसे में समूहों के आंदोलन का असर यदि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन वितरण पर पड़ता है तो प्रशासन के सामने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित समूहों का भुगतान कितने समय से लंबित है, कितनी राशि बकाया है, भुगतान रुकने का कारण क्या है और राशन की निर्धारित मात्रा के मुकाबले वास्तव में कितना राशन उपलब्ध कराया गया। इन तथ्यों की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से ही हो सकती है।

“अब आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए”
आंदोलनरत समूहों की मांग है कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए और भविष्य में हर महीने समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। समूहों का कहना है कि मांगों के निराकरण और भुगतान मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रशासन के सामने पांच बड़े सवाल

समूहों का कितने महीनों का भुगतान लंबित है?
जिले में कुल कितनी राशि का भुगतान अटका हुआ है?
निर्धारित राशि से कम भुगतान के आरोप की वास्तविकता क्या है?
राशन की निर्धारित और वास्तविक आपूर्ति में कोई अंतर है या नहीं?
हड़ताल के दौरान बच्चों को भोजन एवं पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?

मामला बच्चों के भोजन और पोषण से सीधे जुड़ा होने के कारण प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा है। भुगतान, राशन आवंटन और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से ही समूहों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि समूहों और प्रशासन के बीच विवाद का असर बच्चों को मिलने वाले भोजन एवं पोषण आहार पर न पड़े।

बच्चों का भोजन न रुके • समूहों का बकाया स्पष्ट हो • राशन और भुगतान व्यवस्था की हो जांच

Post a Comment

Previous Post Next Post