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मेहंदी की रस्म से चांद की पूजा तक, सिंधी समाज की महिलाओं ने निभाई तीजा की परंपरा





पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा तीजा व्रत, फुलेहरा पूजन और तीजड़ी माता की कथा में शामिल हुईं महिलाएं


दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला सिंधी समाज की महिलाओं ने पति की दीर्घायु,खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ तीजा व्रत रखा। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए,जबकि कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखती हैं। तीजा को लेकर एक दिन पूर्व मेहंदी की रस्म निभाई गई।

सोमवार सुबह महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त में सरगी का सेवन कर व्रत की शुरुआत की। इसके बाद नए परिधानों में सोलह श्रृंगार कर हाथों में पूजा की थाली लेकर सामाजिक पुरोहित के घर पहुंचीं। यहां महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया।


सुबह तीज माता का फुलेहरा तैयार कर झूले में बांधा गया। इसमें फल,पूजन सामग्री का समावेश किया गया। महिलाओं ने परंपरागत रूप से तीज माता का झूला झुलाया और फुलेहरा का विधिवत पूजन किया।

शाम को सामाजिक पुरोहित के घर तीजड़ी माता की कथा का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने शामिल होकर कथा का श्रवण किया। रात में चंद्रदेव की पूजा कर उन्हें अर्घ्य दिया गया। इसके बाद महिलाओं ने पति की पूजा की और पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया।

तीजा पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया। घर के बड़ों के मार्गदर्शन में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। इस अवसर पर पतियों ने अपनी पत्नियों को उपहार भेंट कर पर्व की खुशियां साझा कीं।

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