हिंदी दिवस पर अलीगढ़ के डॉ. दिनेश कुमार शर्मा और कासगंज की डॉ. सोम शर्मा को ‘श्रीवास्तव स्मृति सम्मान’
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मंच पर उत्तर प्रदेश के साहित्य सेवियों का सम्मान; हिंदी की सेवा के साथ भाषा के प्रति प्रेम बनाए रखने का दिया संदेश
दैनिक रेवांचल टाइम्स | पटना, बिहार। हिन्दी दिवस के अवसर पर 14 सितंबर को पटना स्थित बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में साहित्य, भाषा और हिंदी सेवा को समर्पित गरिमामयी समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और कासगंज से जुड़े साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र के विद्वानों को हिंदी की सेवा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह का उद्घाटन बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने किया, जबकि अध्यक्षता बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने की। साहित्यकारों, शिक्षाविदों और हिंदी प्रेमियों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
डॉ. दिनेश कुमार शर्मा को ‘श्रीवास्तव स्मृति हिन्दी सेवी सम्मान’
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. दिनेश कुमार शर्मा को समारोह में ‘श्रीवास्तव स्मृति हिन्दी सेवी सम्मान’ से विभूषित किया गया। समारोह में उनकी धर्मपत्नी की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
हिंदी साहित्य के प्रति उनके योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें सम्मान प्रदान किया गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मंच पर यह सम्मान उनके साहित्यिक सफर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ा।
कासगंज की डॉ. सोम शर्मा भी हुईं सम्मानित
कासगंज के द्रौपदी देवी जाजू बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. सोम शर्मा को ‘स्व. डॉ. शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव स्मृति हिन्दी सेवी सम्मान’ प्रदान किया गया।
शिक्षा और हिंदी के प्रति उनके योगदान को देखते हुए दिया गया यह सम्मान कासगंज के साहित्य एवं शिक्षा जगत के लिए भी गौरव का अवसर बना।
साहित्य सेवियों और विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ, विभा रानी श्रीवास्तव, प्रो. जनार्दन सिंह, अरविंद कुमार सिंह, रत्नेश्वर सिंह, वीरेंद्र यादव, अशोक, प्रो. ऊषा रानी और ब्रहमानंद सहित अनेक गणमान्य नागरिक और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने हिंदी की साहित्यिक परंपरा, उसकी व्यापक स्वीकार्यता और नई पीढ़ी को भाषा एवं साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
हिंदी केवल भाषा नहीं, सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण कड़ी
हिन्दी दिवस पर आयोजित यह समारोह हिंदी की सेवा करने वाले साहित्यकारों और शिक्षाविदों के सम्मान के साथ भाषा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दे गया। हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ साहित्य सृजन, अध्ययन और नई पीढ़ी में भाषा के प्रति रुचि विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
